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किसान ही आर्थिक विकास की रीढ़
ब्यूरो/ अमर उजाला, चित्रकूट
Updated Tue, 30 Jun 2015 11:09 PM IST
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दीनदयाल शोध संस्थान कृषि विज्ञान केंद्र, मझगवां ने मंगलवार को खरीफ फसलों की तैयारी विषय पर कृषक सम्मेलन का आयोजन किया। इसमें किसानाें को उन्नत कृषि तकनीक की जानकारी और प्रशिक्षण दिया गया। मुख्य अतिथि कृषि स्थायी समिति के सभापति शांति भूषण पांडेय ने कहा कि किसान ही देश के आर्थिक विकास की रीढ़ हैं।
डा. राजेंद्र सिंह नेगी ने जिले की मिट्टी के अनुसार कम अवधि में पक कर तैयार होने वाली फसलों जैसे धान, सोयाबीन, उर्द, मूंग एवं तिल की उन्नत खेती की जानकारी दी। उद्यान विभाग, सतना के डॉ. संतोष शर्मा ने मध्यप्रदेश सरकार द्वारा कृषकों को दिए जा रहे अनुदान की जानकारी दी। केंद्र के पौध संरक्षण वैज्ञानिक लोकेश गंगराडे ने खरीफ फसलों में एकीकृत कीट एवं रोग प्रबंधन व बीज उपचार के फायदे बताए।
केंद्र के पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. रामप्रकाश शर्मा ने वर्षा पूर्व पशुओं में लगने वाले विभिन्न टीकों व रोग प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी। कृषि विज्ञान केंद्र, रीवा के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. एके पांडेय ने अरहर की रोपा पद्धति पर विस्तार से प्रकाश डाला। कृषि वैज्ञानिक डॉ. केएस बघेेल ने खरीफ फसलों की उन्नत किस्मों व बुवाई पद्धति की जानकारी दी। मुख्य अतिथि कृषि स्थायी समिति के सभापति शांति भूषण पांडेय ने निक्रा परियोजना के तहत चयनित ग्राम मोटवा के किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड का वितरण किया।
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डॉ. एसबी डॉडिन, सलाहकार, बायवर्सिटी इंटरनेशनल, दक्षिण एशिया ने केंद्र में कौशल विकास प्रशिक्षण (मशरूम उत्पादन) कार्यक्रम में उत्तीर्ण प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र दिए। दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव, अभय महाजन ने पं. दीनदयाल उपाध्याय एवं नानाजी द्वारा बताए गए मार्गों का अनुसरण करने की अपील की। 324 किसानों को फलदार पौध तथा 306 किसानों को धान की जलवायु प्रतिरोधी तीन किस्मों का एक-एक किग्रा बीज उपलब्ध कराया गया।
इसके पूर्व आदर्श सांसद ग्राम योजना के तहत चयनित ग्राम अबेर में किसान संगोष्ठी का आयोजन कर धान उत्पादन तकनीक की जानकारी दी गई। मौके पर डॉ. राजेंद्र सिंह नेगी, कार्यक्रम समन्वयक डॉ. वेदप्रकाश सिंह, प्रसार वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र, मझगवां मौजूद रहे।
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डा. राजेंद्र सिंह नेगी ने जिले की मिट्टी के अनुसार कम अवधि में पक कर तैयार होने वाली फसलों जैसे धान, सोयाबीन, उर्द, मूंग एवं तिल की उन्नत खेती की जानकारी दी। उद्यान विभाग, सतना के डॉ. संतोष शर्मा ने मध्यप्रदेश सरकार द्वारा कृषकों को दिए जा रहे अनुदान की जानकारी दी। केंद्र के पौध संरक्षण वैज्ञानिक लोकेश गंगराडे ने खरीफ फसलों में एकीकृत कीट एवं रोग प्रबंधन व बीज उपचार के फायदे बताए।
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केंद्र के पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. रामप्रकाश शर्मा ने वर्षा पूर्व पशुओं में लगने वाले विभिन्न टीकों व रोग प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी। कृषि विज्ञान केंद्र, रीवा के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. एके पांडेय ने अरहर की रोपा पद्धति पर विस्तार से प्रकाश डाला। कृषि वैज्ञानिक डॉ. केएस बघेेल ने खरीफ फसलों की उन्नत किस्मों व बुवाई पद्धति की जानकारी दी। मुख्य अतिथि कृषि स्थायी समिति के सभापति शांति भूषण पांडेय ने निक्रा परियोजना के तहत चयनित ग्राम मोटवा के किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड का वितरण किया।
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डॉ. एसबी डॉडिन, सलाहकार, बायवर्सिटी इंटरनेशनल, दक्षिण एशिया ने केंद्र में कौशल विकास प्रशिक्षण (मशरूम उत्पादन) कार्यक्रम में उत्तीर्ण प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र दिए। दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव, अभय महाजन ने पं. दीनदयाल उपाध्याय एवं नानाजी द्वारा बताए गए मार्गों का अनुसरण करने की अपील की। 324 किसानों को फलदार पौध तथा 306 किसानों को धान की जलवायु प्रतिरोधी तीन किस्मों का एक-एक किग्रा बीज उपलब्ध कराया गया।
इसके पूर्व आदर्श सांसद ग्राम योजना के तहत चयनित ग्राम अबेर में किसान संगोष्ठी का आयोजन कर धान उत्पादन तकनीक की जानकारी दी गई। मौके पर डॉ. राजेंद्र सिंह नेगी, कार्यक्रम समन्वयक डॉ. वेदप्रकाश सिंह, प्रसार वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र, मझगवां मौजूद रहे।