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बूंद- बूंद पानी को तरसते ग्रामीण
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फोटो-7- पाठा क्षेत्र के चुरेह केशरूआ गांव में पानी लेने के लिए लाइन में इंतजार करते ग्रामीण। संवाद
- फोटो : CHITRAKUTT
चित्रकूट/मानिकपुर। जनपद के पाठा क्षेत्र में स्थित मानिकपुर ब्लाक के लगभग सभी गांव पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। अभी से ही यहां के गांव अपनी प्यास बुझाने के लिए बाहर से आपूर्ति होने वाली पानी पर निर्भर है।
चुरेहकसेरुआ ग्राम पंचायत 22 गांव से मिलकर बनी है। लगभग 48 वर्ग किमी के क्षेत्रफल की पंचायत में 25 हजार से ज्यादा ग्रामीण रहते हैं। वर्तमान में जल संकट यहां का एक अहम मुद्दा है। पानी की स्थिति का अंदाजा हम वर्षों से वीरान पड़े खेतों और अन्ना मवेशियों को देखकर लगा सकते हैं। हैंडपंप और कुआं लोगों के लिए पीने की पानी की आपूर्ति कर रहे हैं। पाठा क्षेत्र के टेकुरी में मात्र एक कुआं पानी की आपूर्ति कर रहा है। पर इस बात की कोई निश्चितता नहीं आने वाले समय कुआं रहेगा या नहीं। वहीं केकरामार गांव में भी एक मात्र भारतीय बाल कोष निधि द्वारा स्थापित टंकी और हैंडपंप लोगों की प्यास बुझा रहे हैं। पर दोनों ही भगवान भरोसे है। कारण है कि सूखने के बाद गांव में किसी वैकल्पिक जल संसाधन की व्यवस्था नहीं है।
दिल्ली विश्वविद्यालय के शोधार्थी पानी और पलायन पर काम रहे शैलेश यादव ने बताया कि इस गांव में लगभग 200 की संख्या में हैंडपंप हैं। पर अप्रैल में ही गांव के अधिकांश हैंडपंप और कुआं सूख चुके हैं। इसलिए लोगों को पीने के पानी के लिए संकट होगा। इस पंचायत के कई गांव ऐसे भी हैं जो अपनी प्यास बुझाने के लिए टैंकर द्वारा उपलब्ध पानी के ऊपर निर्भर हैं।
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पाठा के गांव से मुख्यालय लौटे शैलेश ने बताया कि सुखरामपुर की स्थिति काफी दयनीय है। इस गांव के लोगों को अपनी पीने की पानी की आवश्यकता को पूरा करने के लिए गांव के एक मात्र नल पर निर्भर होना पड़ता है। कारण है कि कई घंटों तक लाइन में पानी लेने के लिए खड़ा होना पड़ता है। हाल ही में 19 अप्रैल को जनपद में पंचायत का चुनाव हुआ। पर उम्मीदवारों व गांव के लोगों ने इस ओर कोई पहल नहीं उठाई।
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चुरेहकसेरुआ ग्राम पंचायत 22 गांव से मिलकर बनी है। लगभग 48 वर्ग किमी के क्षेत्रफल की पंचायत में 25 हजार से ज्यादा ग्रामीण रहते हैं। वर्तमान में जल संकट यहां का एक अहम मुद्दा है। पानी की स्थिति का अंदाजा हम वर्षों से वीरान पड़े खेतों और अन्ना मवेशियों को देखकर लगा सकते हैं। हैंडपंप और कुआं लोगों के लिए पीने की पानी की आपूर्ति कर रहे हैं। पाठा क्षेत्र के टेकुरी में मात्र एक कुआं पानी की आपूर्ति कर रहा है। पर इस बात की कोई निश्चितता नहीं आने वाले समय कुआं रहेगा या नहीं। वहीं केकरामार गांव में भी एक मात्र भारतीय बाल कोष निधि द्वारा स्थापित टंकी और हैंडपंप लोगों की प्यास बुझा रहे हैं। पर दोनों ही भगवान भरोसे है। कारण है कि सूखने के बाद गांव में किसी वैकल्पिक जल संसाधन की व्यवस्था नहीं है।
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दिल्ली विश्वविद्यालय के शोधार्थी पानी और पलायन पर काम रहे शैलेश यादव ने बताया कि इस गांव में लगभग 200 की संख्या में हैंडपंप हैं। पर अप्रैल में ही गांव के अधिकांश हैंडपंप और कुआं सूख चुके हैं। इसलिए लोगों को पीने के पानी के लिए संकट होगा। इस पंचायत के कई गांव ऐसे भी हैं जो अपनी प्यास बुझाने के लिए टैंकर द्वारा उपलब्ध पानी के ऊपर निर्भर हैं।
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पाठा के गांव से मुख्यालय लौटे शैलेश ने बताया कि सुखरामपुर की स्थिति काफी दयनीय है। इस गांव के लोगों को अपनी पीने की पानी की आवश्यकता को पूरा करने के लिए गांव के एक मात्र नल पर निर्भर होना पड़ता है। कारण है कि कई घंटों तक लाइन में पानी लेने के लिए खड़ा होना पड़ता है। हाल ही में 19 अप्रैल को जनपद में पंचायत का चुनाव हुआ। पर उम्मीदवारों व गांव के लोगों ने इस ओर कोई पहल नहीं उठाई।