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भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं सुनाईं
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फोटो-1-आचार्य सुरेंद्र दास। संवाद
- फोटो : CHITRAKOOT
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मऊ/चित्रकूट। मऊ व तरौंहा में भागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं सुनाई गईं।
मंगलवार को मऊ के दुधारी आश्रम खंडेहा में कथा में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और बाल लीलाओं की कथा व्यास आचार्य सुरेंद्र ने सुनाई। कहा कि जन्म होेने पर गोकुल में एक साल से अधिक उत्सव मनाया गया। कहा कि भगवान की मन लगाकर भक्ति करने वाले की भगवान जरूर सहायता करते हैं। सच्चे हृदय से हरि नाम के सुमिरन मात्र से कल्याण संभव है। इसके लिए कठिन तपस्या व यज्ञ की आवश्यकता है।
तरौंहा के गोपाल कुंज में संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा में कथाव्यास अभिषेक अवस्थी ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं व रासलीला का वर्णन किया। श्रीकृष्ण की झांकियां भी प्रस्तुत की गईं। पूतना वध, श्रीकृष्ण की बालपन की शरारतें, कालिया नाग मर्दन व गोपिकाओं के श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम की कथा सुनाई। बताया कि कलियुग में ईश्वर का नाम ही काफी है। इस मौके पर गोरिया देवी, पत्नी देवी दयाल कु शवाहा, रमेश अवस्थी, अतुल अवस्थी मौजूद रहे।
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मंगलवार को मऊ के दुधारी आश्रम खंडेहा में कथा में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और बाल लीलाओं की कथा व्यास आचार्य सुरेंद्र ने सुनाई। कहा कि जन्म होेने पर गोकुल में एक साल से अधिक उत्सव मनाया गया। कहा कि भगवान की मन लगाकर भक्ति करने वाले की भगवान जरूर सहायता करते हैं। सच्चे हृदय से हरि नाम के सुमिरन मात्र से कल्याण संभव है। इसके लिए कठिन तपस्या व यज्ञ की आवश्यकता है।
तरौंहा के गोपाल कुंज में संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा में कथाव्यास अभिषेक अवस्थी ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं व रासलीला का वर्णन किया। श्रीकृष्ण की झांकियां भी प्रस्तुत की गईं। पूतना वध, श्रीकृष्ण की बालपन की शरारतें, कालिया नाग मर्दन व गोपिकाओं के श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम की कथा सुनाई। बताया कि कलियुग में ईश्वर का नाम ही काफी है। इस मौके पर गोरिया देवी, पत्नी देवी दयाल कु शवाहा, रमेश अवस्थी, अतुल अवस्थी मौजूद रहे।
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