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हत्या के मामले में फर्नीचर कारीगर को आजीवन कारावास
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चित्रकूट। लेनदेन के विवाद में युवक की गोली मारकर हत्या करने के मामले में दोष सिद्ध होने पर न्यायालय ने दोषी फर्नीचर कारीगर को उम्र कैद की सजा सुनाई। साथ ही 25 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया गया है। मामला सन 2014 का है।
मंगलवार को जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी श्यामसुंदर मिश्रा ने बताया कि भरतकूप क्षेत्र के पहरा गांव के निवासी बद्री प्रसाद उर्फ नत्थू भैया पुत्र वृंदावन ने 19 जनवरी 2014 को कर्वी कोतवाली में हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
वादी के अनुसार उसका पुत्र वीरेंद्र कुमार 18 जनवरी 2014 को दोपहर 2:00 बजे घर से क्रशर की ओर जाने की बात कहकर निकला था। इसके बाद गांव के ही बुद्धा उर्फ बुद्ध विलास पुत्र बच्चूलाल ने उनको आकर सूचना दी कि उनके बेटे को किसी ने गोली मार दी है और वह गांव के भैयालाल के दरवाजे के बाहर लगे हैंडपंप के पास पड़ा हुआ है।
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जानकारी मिलने पर परिजन तत्काल वीरेंद्र को जिला अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस द्वारा विवेचना किए जाने और परिजनों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट हुआ था कि बुद्ध विलास ने फर्नीचर बनाने के नाम पर मृतक से 25,000 रुपये उधार लिए थे, किंतु न तो उसने फर्नीचर बनाया और न ही वीरेंद्र का पैसा वापस कर रहा था। इस बात को लेकर दोनों के बीच विवाद भी हुआ था।
इसी रंजिश के चलते बुद्धा ने वीरेंद्र को गोली मार दी और स्वयं को बचाने के लिए उसके परिवारी जनों को सूचना दे आया। साथ ही स्वयं उसे अस्पताल तक साथ लेकर भी आया, लेकिन इसके बाद लगातार उसके क्रियाकलापों में संदेह होने पर पुलिस ने उसे पकड़ लिया था।
बचाव और अभियोजन पक्ष के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद सोमवार को जनपद न्यायाधीश रवींद्र नाथ दुबे ने इस मामले में दोषी बुद्धा उर्फ बुद्धविलास को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। साथ ही 25 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया गया।
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मंगलवार को जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी श्यामसुंदर मिश्रा ने बताया कि भरतकूप क्षेत्र के पहरा गांव के निवासी बद्री प्रसाद उर्फ नत्थू भैया पुत्र वृंदावन ने 19 जनवरी 2014 को कर्वी कोतवाली में हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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वादी के अनुसार उसका पुत्र वीरेंद्र कुमार 18 जनवरी 2014 को दोपहर 2:00 बजे घर से क्रशर की ओर जाने की बात कहकर निकला था। इसके बाद गांव के ही बुद्धा उर्फ बुद्ध विलास पुत्र बच्चूलाल ने उनको आकर सूचना दी कि उनके बेटे को किसी ने गोली मार दी है और वह गांव के भैयालाल के दरवाजे के बाहर लगे हैंडपंप के पास पड़ा हुआ है।
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जानकारी मिलने पर परिजन तत्काल वीरेंद्र को जिला अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस द्वारा विवेचना किए जाने और परिजनों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट हुआ था कि बुद्ध विलास ने फर्नीचर बनाने के नाम पर मृतक से 25,000 रुपये उधार लिए थे, किंतु न तो उसने फर्नीचर बनाया और न ही वीरेंद्र का पैसा वापस कर रहा था। इस बात को लेकर दोनों के बीच विवाद भी हुआ था।
इसी रंजिश के चलते बुद्धा ने वीरेंद्र को गोली मार दी और स्वयं को बचाने के लिए उसके परिवारी जनों को सूचना दे आया। साथ ही स्वयं उसे अस्पताल तक साथ लेकर भी आया, लेकिन इसके बाद लगातार उसके क्रियाकलापों में संदेह होने पर पुलिस ने उसे पकड़ लिया था।
बचाव और अभियोजन पक्ष के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद सोमवार को जनपद न्यायाधीश रवींद्र नाथ दुबे ने इस मामले में दोषी बुद्धा उर्फ बुद्धविलास को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। साथ ही 25 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया गया।