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चित्रकूटः वैज्ञानिकों के दल ने तलाशी टाइगर कॉरीडोर की संभावना

Sun, 02 Feb 2020 11:06 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 02 Feb 2020 11:06 PM IST
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Chitrakoot: Team of scientists search for possibility of tiger corridor
चित्रकूट। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई ) के वैज्ञानिकों का दल यहां आने और टाइगर कारीडोर तथा ग्रीनबेल्ट की संभावनाओं को तलाशने की कोशिश के बीच एक बार पुन: चर्चाएं शुरू हो गई है। पन्ना टाइगर रिजर्व पन्ना के पूर्व डायरेक्टर एमपी ताम्रकार व सतना के डीएफओ राजीव मिश्रा भी मौजूद रहे। सभी ने यूपी एमपी की सीमा से सटे इस जंगल में वन्य जीव प्राणियों के लिए वन हाट और सुरक्षित स्थान की संभावना तलाश की।
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वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दो महीने से तराई के किसी ना किसी जंगल में बाघ घूमते मिले किंतु वह जिस रास्ते पर आगे बढ़ना चाहते हैं वह जा नहीं पा रहे। एक तो वन भूमि के पट्टे खेती किसानी के लिए दे दिए गए। दूसरे जो एक दशक पहले घने जंगल हुआ करते थे आज वह अवैध कटान के चलते खलिहान हो गए। विशेषज्ञों का कहना है कि साहस शक्ति और निर्भीकता का प्रतीक बाघ यदि किसी से डरता है तो वह रोशनी है। उजाले के वजह से वह अपनी राह बदल देता है। जिले की सीमा से सटे मध्यप्रदेश वन विभाग के प्रयासों के बारे में चित्रकूट उप्र के डीएफओ कैलाश प्रकाश ने बताया कि अभी उनके पास डब्ल्यूआईआई की टीम नहंी आई है।
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वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई ) के वैज्ञानिक ों ने माना कि बाघों के लिए एक जगह से दूसरी जगह तक आने-जाने के लिए नदियों के किनारे अथवा जंगली नाले राजमार्ग की तरह होते हैं। इसकी वजह यह है कि नदी नालों के किनारे हरियाली होती है जिससे आकर्षित होकर शाकाहारी जानवर शिकार के लिए मिल जाते हैं। दूसरे छिपने के लिए झाड़ियां तथा पीने के लिए पानी भी सहजता से सुलभ होता हैं। बाघों का जब नालों के आसपास शिकार नहीं मिलते तभी मैदानी जंगल में आते हैं। गर्मी के दिनों में नालों की तलहटी में ठंडक भी बनी रहती है जो बाघों को आराम करने के लिए उपयुक्त होती है। वैज्ञानिकों के साथ मौजूद डीएफओ राजीव मिश्रा ने बताया कि सतना मप्र के चितहरा मझगवां से लेकर मानिकपुर चित्रकूट के मारकुंडी व रानीपुर क्षेत्र इनके लिए मुफीद महसूस होने लगा है। इसी कारण इस क्षेत्र में कई बार शिकारियों का डेरा भी जमता है और वह वन्यजीव प्राणियों का शिकार करते हैं। इन्हें दबोचने के लिए कडे़ कदम उठाए जा रहे हैं ताकि शिकारी इस ओर न आएं और वन्य जीव प्राणी निश्चिंत होकर इन जंगलोें में विचरण कर सकें।
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