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पढ़ने में ऐसा लगता था, जो घटना लिखी है वह सामने हो रही
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चित्रकूट। बुंदेली बोली में शुरू किए गए अखबार ‘खबर लहरिया’ पर आधारित ‘राइटिंग विद फायर’ डॉक्यूमेंट्री को ऑस्कर 2022 की फाइनल नॉमिनेशन्स की लिस्ट में शामिल किया गया है। इस श्रेणी में शामिल करने पर इस अखबार को पढ़ने वाले समाज सेवी, व्यापारी व राजनीतिक दलों के नेताओं ने खुशी जताई है। इन लोगों ने कहा कि निश्चित रूप से महिलाओं की मेहनत रंग लाई है। अखबार पढ़ने में ऐसा लगाता था कि जो घटना लिखी है वह सामने हो रही है।
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मैना देवी ने बताया कि जिस तरह से महिलाएं इस अखबार के लिए काम काम करती थी, उनको देखकर स्थानीय महिलाओं को भी खुशी होती थी। जब वह जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं तो उन्होेंने इंटरव्यू लिया था। वह स्थानीय भाषा में ही प्रश्न पूछती थीं। जिसका उत्तर वह स्थानीय भाषा के आधार पर देती थीं। महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय की प्रो. नीलम चौरे ने बताया कि ‘खबर लहरिया’ अखबार विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में आता था। जिसको विश्वविद्यालय के अधिकतर शिक्षक व छात्र पढ़ते थे। जिसमें छात्राओं के लिए किए जा रहे कार्याें को लेकर अक्सर खबरें छपती थीं।
पूर्व सांसद भैरो प्रसाद मिश्र ने बताया कि ‘खबर लहरिया’ अखबार को जब स्थानीय भाषा में पढ़ते थे तो लिखी गईं खबरें ऐसी होती थीं जैसे खबर पढ़ने वाले के सामने वह घटना हो रही है। उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश केसरवानी सहित व्यापारी सुशील कक्का ने कहा कि ‘खबर लहरिया’ पर बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘राइटिंग विद फायर’ ऑस्कर में शामिल करने पर उन्हें बहुत खुशी हुई है। अखबार में व्यापारियों की समस्याओं को भी प्रमुखता से रखा जाता रहा है। इस अखबार को व्यापारी ही अधिकतर पढ़ते थे।
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पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मैना देवी ने बताया कि जिस तरह से महिलाएं इस अखबार के लिए काम काम करती थी, उनको देखकर स्थानीय महिलाओं को भी खुशी होती थी। जब वह जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं तो उन्होेंने इंटरव्यू लिया था। वह स्थानीय भाषा में ही प्रश्न पूछती थीं। जिसका उत्तर वह स्थानीय भाषा के आधार पर देती थीं। महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय की प्रो. नीलम चौरे ने बताया कि ‘खबर लहरिया’ अखबार विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में आता था। जिसको विश्वविद्यालय के अधिकतर शिक्षक व छात्र पढ़ते थे। जिसमें छात्राओं के लिए किए जा रहे कार्याें को लेकर अक्सर खबरें छपती थीं।
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पूर्व सांसद भैरो प्रसाद मिश्र ने बताया कि ‘खबर लहरिया’ अखबार को जब स्थानीय भाषा में पढ़ते थे तो लिखी गईं खबरें ऐसी होती थीं जैसे खबर पढ़ने वाले के सामने वह घटना हो रही है। उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश केसरवानी सहित व्यापारी सुशील कक्का ने कहा कि ‘खबर लहरिया’ पर बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘राइटिंग विद फायर’ ऑस्कर में शामिल करने पर उन्हें बहुत खुशी हुई है। अखबार में व्यापारियों की समस्याओं को भी प्रमुखता से रखा जाता रहा है। इस अखबार को व्यापारी ही अधिकतर पढ़ते थे।
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