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100 घरों में बनाई जाएगी औषधि वाटिका
अमर उजाला ब्यूरो, चित्रकूट।
Updated Sun, 20 Sep 2015 11:33 PM IST
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टेढ़ी ग्राम में रविवार को जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें लोगाें को औषधीय पौधों का महत्व बताया गया। मुख्य अतिथि और डीआरआई के सचिव डॉ. अशोक पांडेय ने कहा कि औषधीय पौधे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं। इस मौके पर 30 ग्रामीणों को 100 उपयोगी पौधे बांटे गए। गांव के 100 घरों में औषधि वाटिका बनाने की बात भी कही गई।
दीनदयाल शोध संस्थान के प्रकल्प आरोग्यधाम के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि आरोग्यधाम में आयुर्वेद, योग तथा प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से उपचार किया जाता है। कार्यक्रम की रूपरेखा डॉ. रामलखन सिकरवार ने प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड, भोपाल द्वारा दी गई आर्थिक सहायता से टेढ़ी ग्राम के 100 घरों में पांच-पांच उपयोगी पौधों का रोपण औषधि वाटिका के रूप में किया जाना है। ये पांच पौधे हैं- मीठी नीम, गुरुचि, घृतकुमारी, सहजन और तुलसी।
ये हैं पौधों के लाभ
- सहजन की पत्तियों में विटामिन ए और सी की प्रचुर मात्रा होती है। इसके सेवन से नेत्र ज्योति बढ़ती है। पत्तियों को दुधारू पशुओं को खिलाने से दूध की मात्रा बढ़ती है। बीज से पानी शुद्ध होता है। फलों की सब्जी बनती है।
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- मीठी नीम की पत्तियां दाल, पोहा, कढ़ी, चटनी तथा अचार में प्रयुक्त होती हैं तथा पाचन शक्ति बढ़ाती हैं।
- घृतकुमारी का उपयोग फोड़ा फुंसी, जलन तथा कटे स्थान पर होता है। पत्तियों का जेल चेहरे पर लगाने से झुर्रियां मिटती हैं। बाल धोने से रूसी गायब हो जाती है।
- तुलसी पवित्र होने के साथ उपयोगी भी है, इसके सेवन से खांसी जुकाम ठीक होता है।
- गुरुचि रसायन हर प्रकार के रोग में लाभदायक है।
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दीनदयाल शोध संस्थान के प्रकल्प आरोग्यधाम के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि आरोग्यधाम में आयुर्वेद, योग तथा प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से उपचार किया जाता है। कार्यक्रम की रूपरेखा डॉ. रामलखन सिकरवार ने प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड, भोपाल द्वारा दी गई आर्थिक सहायता से टेढ़ी ग्राम के 100 घरों में पांच-पांच उपयोगी पौधों का रोपण औषधि वाटिका के रूप में किया जाना है। ये पांच पौधे हैं- मीठी नीम, गुरुचि, घृतकुमारी, सहजन और तुलसी।
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ये हैं पौधों के लाभ
- सहजन की पत्तियों में विटामिन ए और सी की प्रचुर मात्रा होती है। इसके सेवन से नेत्र ज्योति बढ़ती है। पत्तियों को दुधारू पशुओं को खिलाने से दूध की मात्रा बढ़ती है। बीज से पानी शुद्ध होता है। फलों की सब्जी बनती है।
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- मीठी नीम की पत्तियां दाल, पोहा, कढ़ी, चटनी तथा अचार में प्रयुक्त होती हैं तथा पाचन शक्ति बढ़ाती हैं।
- घृतकुमारी का उपयोग फोड़ा फुंसी, जलन तथा कटे स्थान पर होता है। पत्तियों का जेल चेहरे पर लगाने से झुर्रियां मिटती हैं। बाल धोने से रूसी गायब हो जाती है।
- तुलसी पवित्र होने के साथ उपयोगी भी है, इसके सेवन से खांसी जुकाम ठीक होता है।
- गुरुचि रसायन हर प्रकार के रोग में लाभदायक है।