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Chitrakoot News: एरियर मद को बनाया घोटाले का हथियार, इसी से भेज दी खातों में 43.13 करोड़ की रकम

Sat, 18 Oct 2025 02:05 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट Updated Sat, 18 Oct 2025 02:05 AM IST
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Arrears item was made a weapon of scam, through this an amount of Rs 43.13 crore was sent to the accounts
12 सीकेटीपी-7- परिचय- मुख्यालय ​स्थित कोषागार विभाग का कार्यालय। संवाद - फोटो : samvad
चित्रकूट। कोषागार घोटाले में कर्मचारियों ने एरियर कॉलम को हथियार बनाकर 43.13 करोड़ रुपये की रकम हड़प ली। यह खेल दो चरणों में रचा गया। पहले चरण में पेंशन की राशि बढ़ाई गई, जबकि दूसरे चरण में हर माह फर्जी एरियर तैयार कर पेंशनरों के खातों में भेजी जाने लगी। इस पूरे प्रकरण में पटल सहायक, सहायक कोषागार अधिकारी और वरिष्ठ कोषागार अधिकारी की भूमिका समान रूप से संदिग्ध रही।
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पेंशनरों के खाते में नॉन-बजटरी फंड से प्रतिमाह धनराशि भेजी जाती है। इस मद में कभी फंड की कमी नहीं रहती, जिसका फायदा कर्मचारियों ने उठाया। माध्यमिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों और कर्मचारियों की पेंशन उपनिदेशक पेंशन कार्यालय से तथा बेसिक शिक्षा विभाग की पेंशन मंडलीय कोषागार पेंशन कार्यालय से स्वीकृत होती है। स्वीकृति के बाद कोषागार पेंशनर का ऑनलाइन पंजीकरण करता है, जिसके बाद हर माह पेंशन जारी करने के लिए प्रोसेस पैकेज तैयार होता है। घोटाले की शुरुआत इसी स्तर से हुई।
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प्रोसेस पैकेज के बाद कंप्यूटर से एक चेकलिस्ट निकाली जाती है, जिसमें पेंशनर का पीपीओ नंबर, नाम, नियमित पेंशन राशि, एरियर, डीए और मूल पेंशन राशि दर्ज होती है। इस सूची का मिलान पिछले माह के भुगतान रजिस्टर से किया जाता है। यदि इस माह की राशि बढ़ी हुई पाई जाती है, तो उसका कारण और मद पटल सहायक, सहायक कोषागार अधिकारी और वरिष्ठ कोषागार अधिकारी द्वारा जांचा जाना चाहिए था, लेकिन यही जांच जानबूझकर नजरअंदाज की गई और फर्जी भुगतान जारी रहा।
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ऐसे मामलों में भ्रष्टाचार की श्रृंखला पटल सहायक से लेकर वरिष्ठ कोषाधिकारी तक फैली होती है। निचले स्तर से शुरू हुआ यह खेल शीर्ष स्तर तक पहुंच गया, जहां मिलीभगत से करोड़ों रुपये पेंशनरों के खातों में फर्जी तरीके से स्थानांतरित कर दिए गए।

--ऐसे हुआ घोटाला--
वरिष्ठ कोषाधिकारी पद से सेवानिवृत्त अवधेश यादव बताते हैं कि जिन पेंशनरों के जीवित प्रमाणपत्र समय पर जमा नहीं होते, उनकी पेंशन रोक दी जाती है। प्रमाणपत्र जमा होने पर पुरानी रुकी पेंशन और वर्तमान माह की पेंशन दोनों एक साथ भेजी जाती हैं। इस दौरान एरियर और पेंशन अलग-अलग दर्ज होते हैं, जिन्हें जोड़कर राशि खाते में जाती है। ऐसे मामलों में मूल पेंशन राशि तो जस की तस रहती है, परंतु एरियर मद में रकम बढ़ जाती है, जिसका लेखा-जोखा पिछले माह से मेल नहीं खाता। इसी तरह नए पेंशनरों की स्वीकृति और पेंशन जारी होने के बीच की अवधि का एरियर बनाया जाता है। इसी एरियर को आधार बनाकर कोषागार कर्मचारियों ने फर्जी एंट्री के जरिए घोटाला किया।


इस घोटाले का एक दूसरा पहलू यह भी हो सकता है। जब घोटाले की शुरुआत हुई, उसी माह से यदि मूल पेंशन राशि बढ़ा दी गई और यह गड़बड़ी अगले माह पकड़ में नहीं आई, तो वह राशि नियमित पेंशन बन जाती है। इसके बाद यदि हर माह पिछले चेकलिस्ट को आधार बनाकर पेंशन भेजी जाए, तो अवैध राशि लगातार पेंशनरों के खातों में जाती रहेगी। इस तरह एरियर मद और मूल पेंशन में की गई बढ़ोतरी दोनों ही इस घोटाले के प्रमुख कारण बने।
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