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अन्ना मवेशियों से बचाव का किसानों ने ढू़ंढ़ा तरीका
अमर उजाला ब्यूरो, चित्रकूट
Updated Wed, 28 Dec 2016 11:32 PM IST
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खेतों की फसल अन्ना मवेशियों से बचाने के लिए खेत किनारे बांधी गई लोहे की तार
- फोटो : अमर उजाला
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अन्ना मवेशी की बढ़ती समस्या के बीच किसानों ने इससे बचने का रास्ता भी निकालना शुरू किया है। किसान अन्ना मवेशी से फसल को बचाने के लिए कटीले तारों का सहारा ले रहे हैं। खेतों में लकड़ियों के सहारे चारों तरफ से तार लगाकर खेत सुरक्षित किये जा रहे हैं।
बुंदेलखंड में प्रचलित अन्ना प्रथा से किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। कई बार किसानों ने इसका हल तलाश करने के लिए सरकार और अधिकारियों से भी गुहार लगाई लेकिन अभी तक स्थायी हल नहीं मिल सका है।
समस्या इतनी विकराल हो गई कि अब विधानसभा में भी सवाल उठाया गया है। हर राजनैतिक दल का नेता इस समस्या का जिक्र करता है। परेशान किसान को जब सरकार व प्रशासनिक अधिकारियों से कोई स्थायी हल नहीं कर सके।
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तब किसानों ने खेतों की फसल बचाने के लिए खुद कुछ पहल की है। सड़क किनारे वाले खेतों के चारों ओर कटिया तार लगाना शुरू कर दिया। जिला मुख्यालय के आस पास सहित मऊ, पहाड़ी, मानिकपुर, भरतकूप, शिवरापुर क्षेत्रों के खेतों में देखा जा रहा है किसान राजनारायण सिंह, सुरेश शंकर लाल, मोती तिवारी आदि ने बताया कि इससे फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है।
कंटीले तार लगने के डर से अन्ना खेत में नहीं घुसते हैं। अभी सड़क किनारे के किसान ऐसा कर रहे हैं।
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बुंदेलखंड में प्रचलित अन्ना प्रथा से किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। कई बार किसानों ने इसका हल तलाश करने के लिए सरकार और अधिकारियों से भी गुहार लगाई लेकिन अभी तक स्थायी हल नहीं मिल सका है।
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समस्या इतनी विकराल हो गई कि अब विधानसभा में भी सवाल उठाया गया है। हर राजनैतिक दल का नेता इस समस्या का जिक्र करता है। परेशान किसान को जब सरकार व प्रशासनिक अधिकारियों से कोई स्थायी हल नहीं कर सके।
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तब किसानों ने खेतों की फसल बचाने के लिए खुद कुछ पहल की है। सड़क किनारे वाले खेतों के चारों ओर कटिया तार लगाना शुरू कर दिया। जिला मुख्यालय के आस पास सहित मऊ, पहाड़ी, मानिकपुर, भरतकूप, शिवरापुर क्षेत्रों के खेतों में देखा जा रहा है किसान राजनारायण सिंह, सुरेश शंकर लाल, मोती तिवारी आदि ने बताया कि इससे फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है।
कंटीले तार लगने के डर से अन्ना खेत में नहीं घुसते हैं। अभी सड़क किनारे के किसान ऐसा कर रहे हैं।