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Chitrakoot News: अस्पताल में नहीं मिली एंबुलेंस तीन घंटे बाद टेंपो से ले गए शव
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टेंपो से शव ले जाते लोग।
- फोटो : संवाद
खोही/मानिकपुर (चित्रकूट)। धारकुंडी थाना क्षेत्र के अमिरती गांव के पास रविवार को खेत में लगे कटीले तार के करंट से मृत दोनों भाइयों के शवों का पोस्टमार्टम कराया गया। शवों को गांव ले जाने के लिए तीन घंटे इंतजार के बाद भी एंबुलेंस नहीं मिली। इस पर स्थानीय लोगों ने चंदा कर टेपों से शव गांव भिजवाया।
थाना क्षेत्र के अमिरती निवासी जयकिशोर ने बताया कि रविवार की शाम बेटे हरीलाल (15) और नीलेश (8) चचेरे भाई मोहन (8) के साथ ट्यूबवेल के पास खेल रहे थे। खेत में कटीले तार लगे थे, जिसमें करंट था। इसकी जानकारी बच्चों को नहीं थी। खेलते समय नीलेश ने तार पकड़ लिया।
करंट होने से वह चिपक गया। उसे बचाने के लिए बड़े भाई हरीलाल ने उसे पकड़कर खींचा, लेकिन वह भी चिपक गया। मोहन भी वहां पहुंचा। दोनों को पकड़ते ही वह छिटक गया। आसपास के लोग पहुंचे और किसी तरह तीनों को तार से अलग कर मझगवां अस्पताल ले गए।
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थाना प्रभारी शैलेंद्र पटेल ने बताया कि तीनों भाइयों को ट्यूबवेल के पास खेत में करंट लगा। इसमें हरीलाल व नीलेश की मौत हो गई। झुलसे मोहन को इलाज के बाद घर भेज दिया गया है। सोमवार की सुबह पोस्टमार्टम के बाद परिजन भाइयोंं के शव को गांव तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस या शव वाहन की मांग करते रहे लेकिन तीन घंटे तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
दोपहर को परिवार की हालत देखकर स्थानीय लोगों ने आपस में चंदा एकत्र कर टेंपो से दोनों के शव गांव भिजवाए। मझगवां अस्पताल के प्रभारी रूपेश सोनी ने बताया कि उनके पास किसी ने एंबुलेंस या शव वाहन की मांग का पत्र नहीं दिया है। इसकी जानकारी नहीं है।
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थाना क्षेत्र के अमिरती निवासी जयकिशोर ने बताया कि रविवार की शाम बेटे हरीलाल (15) और नीलेश (8) चचेरे भाई मोहन (8) के साथ ट्यूबवेल के पास खेल रहे थे। खेत में कटीले तार लगे थे, जिसमें करंट था। इसकी जानकारी बच्चों को नहीं थी। खेलते समय नीलेश ने तार पकड़ लिया।
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करंट होने से वह चिपक गया। उसे बचाने के लिए बड़े भाई हरीलाल ने उसे पकड़कर खींचा, लेकिन वह भी चिपक गया। मोहन भी वहां पहुंचा। दोनों को पकड़ते ही वह छिटक गया। आसपास के लोग पहुंचे और किसी तरह तीनों को तार से अलग कर मझगवां अस्पताल ले गए।
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थाना प्रभारी शैलेंद्र पटेल ने बताया कि तीनों भाइयों को ट्यूबवेल के पास खेत में करंट लगा। इसमें हरीलाल व नीलेश की मौत हो गई। झुलसे मोहन को इलाज के बाद घर भेज दिया गया है। सोमवार की सुबह पोस्टमार्टम के बाद परिजन भाइयोंं के शव को गांव तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस या शव वाहन की मांग करते रहे लेकिन तीन घंटे तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
दोपहर को परिवार की हालत देखकर स्थानीय लोगों ने आपस में चंदा एकत्र कर टेंपो से दोनों के शव गांव भिजवाए। मझगवां अस्पताल के प्रभारी रूपेश सोनी ने बताया कि उनके पास किसी ने एंबुलेंस या शव वाहन की मांग का पत्र नहीं दिया है। इसकी जानकारी नहीं है।