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ग्रामोदय विवि को होम्यो कालेज खोलने पर मदद- रामजी
Chitrakoot
Updated Mon, 30 Sep 2013 05:39 AM IST
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चित्रकूट। रिसर्च सोसाइटी आफ होम्योपैथी के तत्वाधान में रविवार को उद्यमिता विद्यापीठ में अंतर्राज्यीय होम्योपैथिक वैज्ञानिक संगोष्ठी हुई। इस मौके पर मुख्य अतिथि केंद्रीय अध्यक्ष होम्योपैथिक परिषद रामजी सिंह ने कहा कि अगर महात्मा गांधी ग्रामोदय विवि होम्यो कालेज खोलता है तो परिषद पूरी मदद करेगा।
कार्यक्रम की शुरुआत रामजी सिंह ने दीप प्रज्ज्वलन और डा. सैमुअल हैनीमैन के चित्र पर माल्यार्पण से की। उन्होंने कहा कि भारत में होम्योपैथी का भविष्य उज्ज्वल है। गुणात्मक होम्योपैथिक शिक्षा के लिए परिषद प्रतिबद्ध है और अब कालेजों को भी परिषद के मानक पूरे करने चाहिए। उपाध्यक्ष डा. भस्मे ने कहा कि भारत जैसे विकासशील देश में होम्योपैथी जनस्वास्थ्य की बेहतरी का माध्यम हो सकती है। ग्रामोदय विवि कुलपति प्रो. एके गुप्ता ने बताया कि होम्योपैथी पूरी तरह से वैज्ञानिक पद्धति है, इसमें बेहतर चिकित्सा और स्वास्थ्य की देखभाल के गुण मौजूद हैं। सदस्य डा. अनुरुद्ध वर्मा ने कहा कि बुंदेलखंड में कम से कम दो होम्योपैथिक मेडिकल कालेज खोले जाने चाहिए। हर गांव में एक होम्योपैथिक अस्पताल होना चाहिए। उन्होंने एनएचआरएम आयुष चिकित्सकों को एलोपैथिक चिकित्सकों के बराबर वेतन देने की मांग की। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व निदेशक होम्योपैथी प्रो. डा. बीएन सिंह ने की। उनका कहना था कि डा. हेनीमैन का आविष्कार होम्योपैथी विश्व की चिकित्सा की सबसे उचित पद्धति है। इस मौके पर दीनदयाल शोध संस्थान की नंदिता पाठक ने भी संबोधित किया। डा. मनमोहन तिवारी, डा. यूबी र6पाठी ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन पूर्व सांसद श्यामाचरण गुप्त ने किया।
वैज्ञानिक सत्र की कुछ महत्वपूर्ण बातें
- गुर्दे फेल होने पर अगर शुरुआत से ही होम्योपैथी चिकित्सा ली जाए तो गुर्दे पूरी तरह से स्वस्थ हो सकते हैं। डायलिसिस की फ्रीक्वेंसी कम हो सकती है।- डा. पवन पारिक, आगरा
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- श्वसन तंत्र की बीमारियों के निदान के लिए इस चिकित्सा का कोई मुकाबला नहीं।- प्रो. एसएम सिंह, प्राचार्य साईं नाथ पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट आफ होम्योपैथी
- लक्षणों के आधार पर इस चिकित्सा से सही इलाज किया जा सकता है।- सैय्यद तनवीर हसन, पंजाब
- बच्चों के खान पान पर ध्यान देने की जरूरत है। बच्चों की बीमारियों के उपचार में इस साइडएफेक्ट रहित इलाज का महत्व है। - प्रो. जीपी पाटिल जबलपुर
- लक्षणों के प्रकार और रोगी में इन रोगों के लक्षणों को ढूंढने में यह चिकित्सा पद्धति मदद करती है।- डा. सौरभ कुमार, इंदौर
- हड्डी रोग के उपचार में भी यह पद्धति महत्वपूर्ण है।- डा. पंकज श्रीवास्तव, लखनऊ
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कार्यक्रम की शुरुआत रामजी सिंह ने दीप प्रज्ज्वलन और डा. सैमुअल हैनीमैन के चित्र पर माल्यार्पण से की। उन्होंने कहा कि भारत में होम्योपैथी का भविष्य उज्ज्वल है। गुणात्मक होम्योपैथिक शिक्षा के लिए परिषद प्रतिबद्ध है और अब कालेजों को भी परिषद के मानक पूरे करने चाहिए। उपाध्यक्ष डा. भस्मे ने कहा कि भारत जैसे विकासशील देश में होम्योपैथी जनस्वास्थ्य की बेहतरी का माध्यम हो सकती है। ग्रामोदय विवि कुलपति प्रो. एके गुप्ता ने बताया कि होम्योपैथी पूरी तरह से वैज्ञानिक पद्धति है, इसमें बेहतर चिकित्सा और स्वास्थ्य की देखभाल के गुण मौजूद हैं। सदस्य डा. अनुरुद्ध वर्मा ने कहा कि बुंदेलखंड में कम से कम दो होम्योपैथिक मेडिकल कालेज खोले जाने चाहिए। हर गांव में एक होम्योपैथिक अस्पताल होना चाहिए। उन्होंने एनएचआरएम आयुष चिकित्सकों को एलोपैथिक चिकित्सकों के बराबर वेतन देने की मांग की। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व निदेशक होम्योपैथी प्रो. डा. बीएन सिंह ने की। उनका कहना था कि डा. हेनीमैन का आविष्कार होम्योपैथी विश्व की चिकित्सा की सबसे उचित पद्धति है। इस मौके पर दीनदयाल शोध संस्थान की नंदिता पाठक ने भी संबोधित किया। डा. मनमोहन तिवारी, डा. यूबी र6पाठी ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन पूर्व सांसद श्यामाचरण गुप्त ने किया।
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वैज्ञानिक सत्र की कुछ महत्वपूर्ण बातें
- गुर्दे फेल होने पर अगर शुरुआत से ही होम्योपैथी चिकित्सा ली जाए तो गुर्दे पूरी तरह से स्वस्थ हो सकते हैं। डायलिसिस की फ्रीक्वेंसी कम हो सकती है।- डा. पवन पारिक, आगरा
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- श्वसन तंत्र की बीमारियों के निदान के लिए इस चिकित्सा का कोई मुकाबला नहीं।- प्रो. एसएम सिंह, प्राचार्य साईं नाथ पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट आफ होम्योपैथी
- लक्षणों के आधार पर इस चिकित्सा से सही इलाज किया जा सकता है।- सैय्यद तनवीर हसन, पंजाब
- बच्चों के खान पान पर ध्यान देने की जरूरत है। बच्चों की बीमारियों के उपचार में इस साइडएफेक्ट रहित इलाज का महत्व है। - प्रो. जीपी पाटिल जबलपुर
- लक्षणों के प्रकार और रोगी में इन रोगों के लक्षणों को ढूंढने में यह चिकित्सा पद्धति मदद करती है।- डा. सौरभ कुमार, इंदौर
- हड्डी रोग के उपचार में भी यह पद्धति महत्वपूर्ण है।- डा. पंकज श्रीवास्तव, लखनऊ