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...यहां 'बच्चे' ही करते हैं बंदियों से दुराचार
इलाहाबाद/अंकुर त्रिपाठी
Updated Thu, 21 Mar 2013 12:12 PM IST
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नाबालिग अपराधियों को सुधारने के इरादे से बने बाल सुधार गृह में बंदियों से दुराचार और यातना दिए जाने का खुलासा हुआ है। जांच और बयान से पता चला है कि सुधार गृह में नौ बाल कैदी दूसरे बंदियों से बेहद क्रूरता से पेश आते हैं। वे खुद को मालिक मानते हुए बाकी बंदियों से गुलाम सरीखा सुलूक करते हैं।
ये कैदी बंदियों से मारपीट, गालीगलौज, जबरदस्ती, शारीरिक शोषण और दुष्कर्म करते है। कई बंदियों को आग से दागा भी। इन नौ बंदियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा लिख विवेचना सीओ प्रथम ने शुरू की है।
अब यह साफ हो चुका है कि बाल सुधार, राजकीय बालिका, शिशु गृहों के भीतर यातनाघर जैसा माहौल है। इन गृहों के कर्मचारियों पर अहम जिम्मेदारी है कि वे वहां रखे गए बच्चों से संवेदनशीलता से पेश आएं। उनका ख्याल रखें। मगर ऐसा हो नहीं रहा।
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शिवकुटी स्थित राजकीय बालिका गृह में बच्चियों से सुरक्षाकर्मी और चपरासी ने बलात्कार किया था तो अब खुल्दाबाद थाने के सामने स्थित बाल सुधार गृह में बंदियों के यौन शोषण, जुल्म, मनमानी में भी कर्मचारियों की लापरवाही सामने आई है। अगर 17 मार्च को सुधार गृह में बाल संवाद न आयोजित होता तो शायद वहां के जुल्मो-सितम का सच अभी सामने आ भी नहीं पाता।
बाल संवाद में रो पड़े पीड़ित बंदी
दरअसल, एक बाल बंदी की शिकायत पर किशोर न्याय बोर्ड की ओर से रविवार को सुधार गृह के अंदर बाल संवाद किया गया। बाल बंदियों को बुलाकर अलग-अलग बात करने पर सुधार गृह के अंदर हो रही अमानवीय हरकतों का सनसनीखेज खुलासा हुआ। कई बाल बंदियों के बयान सुनकर किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य सन्न रह गए।
उफ! भयानक यातना झेल रहे बाल बंदी
जिला जज द्वारा सोमवार को जारी आदेश पर किशोर न्याय बोर्ड के पेशकार अशोक श्रीवास्तव की अर्जी पर खुल्दाबाद थाने में लिखी गई पांच पेज की एफआईआर में राजकीय बाल संप्रेक्षण गृह में बंदियों के बयान के आधार पर भयानक यातना का खुलासा किया गया है।
एक बंदी ने बताया है कि उसे दो बंदियों ने धमकी दी कि पिटाई की शिकायत की तो उसे मारकर पांच नंबर में डाल देंगे। कह दिया जाएगा कि दवा नहीं मिलने से मर गया। इसी तरह सुर्ती देने से मना करने पर एक बंदी को तख्त पर पटककर लात-घूंसे से बुरी तरह पीटा गया। बंदी ने सुधार गृह के कर्मचारी को बताया तो उसने चुप रहने के लिए कहा। सुबह फिर वही वाकया हुआ।
इसी तरह एक अन्य बंदी को इतना मारा-पीटा गया कि वह कई दिन उठ-लेट नहीं पा रहा था। तीन-चार बंदियों ने आयोग के सदस्यों को यह बताकर झकझोर दिया कि उनके साथ लगातार सामूहिक दुराचार किया जाता रहा है। जब भी इस बाबत कर्मचारियों को बताया तो उन्हें चुपचाप रहने को कह दिया गया। एफआईआर में भी यह जिक्र किया गया है कि पीड़ित बंदियों के बयान से उजागर अमानवीय हरकतों को जान किसी भी रूह कांप सकती है।
बिना पूछे टायलेट जाने पर भी पिटाई
बाल सुधार गृह में आठ-दस बंदियों ने अपनी हुकूमत चला रखी है। उनके हुक्म के बिना कोई बंदी पेशाब भी करने चले जाएं तो उसकी लात-घूंसे और बेल्ट से खूब पिटाई होती है। ये मनबढ़ कैदी गुंडों जैसा बर्ताव करते हैं। दूसरे बंदियों से अपने कपड़े धुलवाते हैं, सफाई कराते हैं। हुक्म मिलने पर उनके हाथ-पैर की मालिश भी करनी होती है। वे दूसरे बंदियों के साबुन-तेल छीन लेते हैं। कमरे में ही बैठकर ब्रश करते और बाल्टी में थूकते हैं।
दूसरे बंदियों को पानी लाना और बाल्टी साफ करना होता है। ना-नुकुर किया तो पीटते और हाथ-पैर की उंगली में कागज फंसाकर जलाते हैं। इस वजह से दो-तीन बंदियों की उंगलियां झुलस गईं। खासतौर से नए बंदियों को ये पुराने बंदी गुलाम बनाकर रखते हैं। हुक्म नहीं मानने पर नए बंदियों की खासी मरम्मत होती है।
क्या गिरेगी लापरवाह कर्मियों पर गाज?
बाल सुधार गृह में दुराचार, मारपीट, जुल्म, गुंडागर्दी जेल अधीक्षक और दूसरे कर्मचारियों की जानकारी में होता रहा। बंदियों के बयान से भी यह बात उजागर हो चुकी है। एफआईआर में भी लिखा गया है कि जांच में राजकीय कर्मचारियों की लापरवाही सामने आती है तो उन पर कार्रवाई की जाए।
शिवकुटी स्थित बालिका गृह में बालिकाओं से रेप के मामले में वहां की अधीक्षिका समेत नौ कर्मचारियों का निलंबन और गिरफ्तारी की गई थी। अब बाल गृह में यातना और दुराचार में भी अधीक्षक समेत दूसरे कर्मचारियों की लापरवाही, उदासीनता का पता चला है। जिला प्रोबेशन अधिकारी पुनीत मिश्र ने कहा है कि दोषियों पर कार्रवाई होगी।
नौ बंदियों पर गंभीर धाराओं में मुकदमा
किशोर न्याय बोर्ड के पेशकार अशोक श्रीवास्तव की अर्जी पर मंगलवार रात खुल्दाबाद थाने में धारा 377, 374, 325, 323, 504, 506 और दलित बंदी के उत्पीड़न पर 3 (1) एससी-एसटी एक्ट में केस लिखा गया है। मुकदमे की विवेचना क्षेत्राधिकारी प्रथम को सौंपी गई है। सीओ ने बताया कि उन्होंने जांच शुरू कर दी है। बुधवार को पीड़ित नौ बंदियों से बात की। बंदियों ने खुद पर हुए उत्पीड़न के बारे में बताया।
नौ पीड़ितों का कराया गया मेडिकल टेस्ट
बाल सुधार गृह में मारपीट और यौन शोषण का शिकार हुए नौ बंदियों का मेडिकल टेस्ट कराया गया है। सीओ प्रथम समरबहादुर सिंह ने बताया कि पांच बंदियों का किशोर न्याय बोर्ड की ओर से परीक्षण कराया गया था जिसकी पैथोलॉजी रिपोर्ट अभी नहीं मिली है।
बाकी चार बंदियों को बुधवार को पुलिस ने बेली अस्पताल ले जाकर टेस्ट कराया। मेडिकल रिपोर्ट से भी पीड़ित बंदियों पर हुए जुल्म का पता चल सकेगा। सुधार गृह में किशोर बंदियों पर कहर ढाने के आरोपी नौ बाल बंदियों में एक मंगलवार को जमानत पर छूटकर गया है। उसकी तलाश हो रही है। एक बंदी को प्रतापगढ़ कारागार भेज दिया गया है।
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ये कैदी बंदियों से मारपीट, गालीगलौज, जबरदस्ती, शारीरिक शोषण और दुष्कर्म करते है। कई बंदियों को आग से दागा भी। इन नौ बंदियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा लिख विवेचना सीओ प्रथम ने शुरू की है।
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अब यह साफ हो चुका है कि बाल सुधार, राजकीय बालिका, शिशु गृहों के भीतर यातनाघर जैसा माहौल है। इन गृहों के कर्मचारियों पर अहम जिम्मेदारी है कि वे वहां रखे गए बच्चों से संवेदनशीलता से पेश आएं। उनका ख्याल रखें। मगर ऐसा हो नहीं रहा।
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शिवकुटी स्थित राजकीय बालिका गृह में बच्चियों से सुरक्षाकर्मी और चपरासी ने बलात्कार किया था तो अब खुल्दाबाद थाने के सामने स्थित बाल सुधार गृह में बंदियों के यौन शोषण, जुल्म, मनमानी में भी कर्मचारियों की लापरवाही सामने आई है। अगर 17 मार्च को सुधार गृह में बाल संवाद न आयोजित होता तो शायद वहां के जुल्मो-सितम का सच अभी सामने आ भी नहीं पाता।
बाल संवाद में रो पड़े पीड़ित बंदी
दरअसल, एक बाल बंदी की शिकायत पर किशोर न्याय बोर्ड की ओर से रविवार को सुधार गृह के अंदर बाल संवाद किया गया। बाल बंदियों को बुलाकर अलग-अलग बात करने पर सुधार गृह के अंदर हो रही अमानवीय हरकतों का सनसनीखेज खुलासा हुआ। कई बाल बंदियों के बयान सुनकर किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य सन्न रह गए।
उफ! भयानक यातना झेल रहे बाल बंदी
जिला जज द्वारा सोमवार को जारी आदेश पर किशोर न्याय बोर्ड के पेशकार अशोक श्रीवास्तव की अर्जी पर खुल्दाबाद थाने में लिखी गई पांच पेज की एफआईआर में राजकीय बाल संप्रेक्षण गृह में बंदियों के बयान के आधार पर भयानक यातना का खुलासा किया गया है।
एक बंदी ने बताया है कि उसे दो बंदियों ने धमकी दी कि पिटाई की शिकायत की तो उसे मारकर पांच नंबर में डाल देंगे। कह दिया जाएगा कि दवा नहीं मिलने से मर गया। इसी तरह सुर्ती देने से मना करने पर एक बंदी को तख्त पर पटककर लात-घूंसे से बुरी तरह पीटा गया। बंदी ने सुधार गृह के कर्मचारी को बताया तो उसने चुप रहने के लिए कहा। सुबह फिर वही वाकया हुआ।
इसी तरह एक अन्य बंदी को इतना मारा-पीटा गया कि वह कई दिन उठ-लेट नहीं पा रहा था। तीन-चार बंदियों ने आयोग के सदस्यों को यह बताकर झकझोर दिया कि उनके साथ लगातार सामूहिक दुराचार किया जाता रहा है। जब भी इस बाबत कर्मचारियों को बताया तो उन्हें चुपचाप रहने को कह दिया गया। एफआईआर में भी यह जिक्र किया गया है कि पीड़ित बंदियों के बयान से उजागर अमानवीय हरकतों को जान किसी भी रूह कांप सकती है।
बिना पूछे टायलेट जाने पर भी पिटाई
बाल सुधार गृह में आठ-दस बंदियों ने अपनी हुकूमत चला रखी है। उनके हुक्म के बिना कोई बंदी पेशाब भी करने चले जाएं तो उसकी लात-घूंसे और बेल्ट से खूब पिटाई होती है। ये मनबढ़ कैदी गुंडों जैसा बर्ताव करते हैं। दूसरे बंदियों से अपने कपड़े धुलवाते हैं, सफाई कराते हैं। हुक्म मिलने पर उनके हाथ-पैर की मालिश भी करनी होती है। वे दूसरे बंदियों के साबुन-तेल छीन लेते हैं। कमरे में ही बैठकर ब्रश करते और बाल्टी में थूकते हैं।
दूसरे बंदियों को पानी लाना और बाल्टी साफ करना होता है। ना-नुकुर किया तो पीटते और हाथ-पैर की उंगली में कागज फंसाकर जलाते हैं। इस वजह से दो-तीन बंदियों की उंगलियां झुलस गईं। खासतौर से नए बंदियों को ये पुराने बंदी गुलाम बनाकर रखते हैं। हुक्म नहीं मानने पर नए बंदियों की खासी मरम्मत होती है।
क्या गिरेगी लापरवाह कर्मियों पर गाज?
बाल सुधार गृह में दुराचार, मारपीट, जुल्म, गुंडागर्दी जेल अधीक्षक और दूसरे कर्मचारियों की जानकारी में होता रहा। बंदियों के बयान से भी यह बात उजागर हो चुकी है। एफआईआर में भी लिखा गया है कि जांच में राजकीय कर्मचारियों की लापरवाही सामने आती है तो उन पर कार्रवाई की जाए।
शिवकुटी स्थित बालिका गृह में बालिकाओं से रेप के मामले में वहां की अधीक्षिका समेत नौ कर्मचारियों का निलंबन और गिरफ्तारी की गई थी। अब बाल गृह में यातना और दुराचार में भी अधीक्षक समेत दूसरे कर्मचारियों की लापरवाही, उदासीनता का पता चला है। जिला प्रोबेशन अधिकारी पुनीत मिश्र ने कहा है कि दोषियों पर कार्रवाई होगी।
नौ बंदियों पर गंभीर धाराओं में मुकदमा
किशोर न्याय बोर्ड के पेशकार अशोक श्रीवास्तव की अर्जी पर मंगलवार रात खुल्दाबाद थाने में धारा 377, 374, 325, 323, 504, 506 और दलित बंदी के उत्पीड़न पर 3 (1) एससी-एसटी एक्ट में केस लिखा गया है। मुकदमे की विवेचना क्षेत्राधिकारी प्रथम को सौंपी गई है। सीओ ने बताया कि उन्होंने जांच शुरू कर दी है। बुधवार को पीड़ित नौ बंदियों से बात की। बंदियों ने खुद पर हुए उत्पीड़न के बारे में बताया।
नौ पीड़ितों का कराया गया मेडिकल टेस्ट
बाल सुधार गृह में मारपीट और यौन शोषण का शिकार हुए नौ बंदियों का मेडिकल टेस्ट कराया गया है। सीओ प्रथम समरबहादुर सिंह ने बताया कि पांच बंदियों का किशोर न्याय बोर्ड की ओर से परीक्षण कराया गया था जिसकी पैथोलॉजी रिपोर्ट अभी नहीं मिली है।
बाकी चार बंदियों को बुधवार को पुलिस ने बेली अस्पताल ले जाकर टेस्ट कराया। मेडिकल रिपोर्ट से भी पीड़ित बंदियों पर हुए जुल्म का पता चल सकेगा। सुधार गृह में किशोर बंदियों पर कहर ढाने के आरोपी नौ बाल बंदियों में एक मंगलवार को जमानत पर छूटकर गया है। उसकी तलाश हो रही है। एक बंदी को प्रतापगढ़ कारागार भेज दिया गया है।