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ब्रह्मचारिणी का किया पूजन
चंदौली ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Mon, 03 Oct 2016 01:30 AM IST
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मुख्यालय के मां काली परिसर में सजी मां काली की मूर्ति।
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शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन रविवार को मां दुर्गा के स्वरूप माता ब्रह्मचारिणी की भक्तों ने आराधना की। सुबह स्नान के बाद देवी मंदिरों में भक्तों ने माता टेका। इसके चलते नगर के प्रमुख मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहा।
इसके अलावा घरों में भी लोगों ने पूरे विधि विधान के साथ पूजन-अर्चन किया। क्षेत्र के मझवार गांव में नवरात्र के दूसरे दिन ही दर्शन-पूजन के लिए मां दुर्गा के पट खोल दिए गए।
ब्रह्मचारिणी देवी ज्ञान, वैराग्य और ध्यान की अधिष्ठात्री मानी जाती हैं। नगर सहित ग्रामीण अंचलों में मां के इस स्वरूप का पूजन-अर्चन लोगों ने पूरी श्रद्धा के साथ किया। दर्शन-पूजन के लिए नगर के काली मंदिर, श्रीराम जानकी शिव मठ मंदिर, महावीर मंदिर सहित अन्य मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहा। पौ फटते ही मंदिरों के घंट-घड़िय़ाल की गूंज से पूरे नगर का वातावरण भक्तिमय हो उठा था। वहीं दूसरी ओर घरों में भी दुर्गा सप्तशती का पाठ लोगों ने किया। सदर ब्लाक क्षेत्र के मझवार गांव में पंडाल में स्थापित मां दुर्गा का कपाट भक्तों के दर्शन-पूजन के लिए खोल दिया। इसके चलते वहां पूजन-अर्चन करने के लिए आसपास के गांवों के लोगों की भीड़ वहां देखने को मिली। मझवार गांव में नौ दिनों तक सायंकाल भजन-कीर्तन व रामायण पाठ का आयोजन होता है।
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इसके अलावा घरों में भी लोगों ने पूरे विधि विधान के साथ पूजन-अर्चन किया। क्षेत्र के मझवार गांव में नवरात्र के दूसरे दिन ही दर्शन-पूजन के लिए मां दुर्गा के पट खोल दिए गए।
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ब्रह्मचारिणी देवी ज्ञान, वैराग्य और ध्यान की अधिष्ठात्री मानी जाती हैं। नगर सहित ग्रामीण अंचलों में मां के इस स्वरूप का पूजन-अर्चन लोगों ने पूरी श्रद्धा के साथ किया। दर्शन-पूजन के लिए नगर के काली मंदिर, श्रीराम जानकी शिव मठ मंदिर, महावीर मंदिर सहित अन्य मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहा। पौ फटते ही मंदिरों के घंट-घड़िय़ाल की गूंज से पूरे नगर का वातावरण भक्तिमय हो उठा था। वहीं दूसरी ओर घरों में भी दुर्गा सप्तशती का पाठ लोगों ने किया। सदर ब्लाक क्षेत्र के मझवार गांव में पंडाल में स्थापित मां दुर्गा का कपाट भक्तों के दर्शन-पूजन के लिए खोल दिया। इसके चलते वहां पूजन-अर्चन करने के लिए आसपास के गांवों के लोगों की भीड़ वहां देखने को मिली। मझवार गांव में नौ दिनों तक सायंकाल भजन-कीर्तन व रामायण पाठ का आयोजन होता है।
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