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Chandauli News: खेतों और गड्ढों में भरे पानी से प्यास बुझा रही तीन गांवों की आबादी
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नौगढ़। विकास खंड के जमसोत, औरवाटाड़ और पथरोल गांव की आबादी स्वच्छ पेयजल के लिए तरस रही है। खेतों और गड्ढों में भरा दूषित पानी पीने के लिए ग्रामीण मजबूर हैं। पानी लाने के लिए महिलाओं को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। 20 वर्ष पहले टंकी बनाई गई थी लेकिन वह भ्रष्टाचार की वजह से चार दिन बाद ही खराब हो गई। इसके बाद टंकी की मरम्मत नहीं कराई गई।
चंदौली जिला बनने के बाद विकास कार्य तो बहुत हुए लेकिन वनांचल अभी भी काफी पिछड़ा हुआ है। नौगढ़ और चकिया क्षेत्र में आजादी के 70 वर्षों के बाद भी लोगों को पीने का शुद्ध पानी तक नहीं मिल पाया है। नौगढ़ क्षेत्र के 30-40 गांवों के लोग आज भी चुआड़ के पानी से अपनी प्यास बुझाते हैं। सबसे ज्यादा दयनीय स्थिति जमसोत, औरवाटाड़ और पथरोल गांव की है। तीनों गांवों के करीब 700 लोगों को शुद्ध पानी मयस्सर नहीं है। ग्रामीण बरसात के मौसम में खेतों और गड्ढों में भरा पानी पीने के लिए मजबूर हैं। महिलाएं लंबी दूरी तय कर बाल्टी में भरकर पानी लाती हैं।
किसी सरकार और प्रशासन ने इनकी मूलभूत जरूरतों पर ध्यान नहीं दिया। 20 वर्ष पहले यहां पानी की टंकी का निर्माण कराया गया था लेकिन वह चार दिन में ही खराब हो गई थी। मोटर जलने के साथ टंकी से पानी का रिसाव होने लगा था। उसकी आज तक मरम्मत नहीं कराई गई।
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चंदौली जिला बनने के बाद विकास कार्य तो बहुत हुए लेकिन वनांचल अभी भी काफी पिछड़ा हुआ है। नौगढ़ और चकिया क्षेत्र में आजादी के 70 वर्षों के बाद भी लोगों को पीने का शुद्ध पानी तक नहीं मिल पाया है। नौगढ़ क्षेत्र के 30-40 गांवों के लोग आज भी चुआड़ के पानी से अपनी प्यास बुझाते हैं। सबसे ज्यादा दयनीय स्थिति जमसोत, औरवाटाड़ और पथरोल गांव की है। तीनों गांवों के करीब 700 लोगों को शुद्ध पानी मयस्सर नहीं है। ग्रामीण बरसात के मौसम में खेतों और गड्ढों में भरा पानी पीने के लिए मजबूर हैं। महिलाएं लंबी दूरी तय कर बाल्टी में भरकर पानी लाती हैं।
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किसी सरकार और प्रशासन ने इनकी मूलभूत जरूरतों पर ध्यान नहीं दिया। 20 वर्ष पहले यहां पानी की टंकी का निर्माण कराया गया था लेकिन वह चार दिन में ही खराब हो गई थी। मोटर जलने के साथ टंकी से पानी का रिसाव होने लगा था। उसकी आज तक मरम्मत नहीं कराई गई।
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