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रोक बेअसर, धधकती रही भट्ठियां

Mon, 23 Jan 2017 01:49 AM IST
चंदौली ब्यूरो, अमर उजाला
चंदौली ब्यूरो, अमर उजाला Updated Mon, 23 Jan 2017 01:49 AM IST
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प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए शासन ने होटलों, ढाबों में केरोसिन और कोयले के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी है। इससे होटल ढाबा संचालकों में खलबली की स्थिति है। क्योंकि जिले के अधिकांश होटलों, ढाबों और दूकानों पर कोयले और किरोसिन का ही इस्तेमाल ईंधन के रूप में होता है। दूकानदारों का कहना है कि इस आदेश से दूकानदारी मुश्किल हो जाएगी।
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पर्यावरण संरक्षण के लिए लगातार नए निर्देश जारी किए जा रहे हैं। पहले एनजीटी ने खुले में कूड़ों को जलाने पर पाबंदी लगाई और अब प्रदेेश सरकार ने होटल, ढाबों और दूकानों पर कोयला और केरोसिन के प्रयोग पर पाबंदी की घोषणा की है।  जिले के मुगलसराय नगर में ही 15 से बीस भोजनालय हैं। इसी तरह दो दर्जन से अधिक ढाबे हैं। यदि पूरे जिले की बात करें तो तीस भोजनालय और 90 से सौ ढाबे हैं। रेस्टूरेंट आदि में तो गैस का उपयोग होता है लेकिन ढाबों, भोजनालयों के साथ ठेले खोमचे और रेहडियों पर कोयले के साथ किरोसिन का उपयोग होता है।
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भोजनालय चलाने वाले रमेश का कहना है कि इस आदेश से दूकान लगभग बंद हो जाएगी। यही नहीं पुलिस वालों को कमाई का एक और मौका मिलेगा। ढाबा संचालक कृष्णा ने बताया कि पर्यावरण संरक्षित करना है तो अन्य कार्य करें।
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 ईट भट्ठे, फैक्टरियों से तो कम ही धुआं ढाबे पर निकलता है। ठेले पर मूंगफली भून रहे किशोर ने बताया कि कोयला और किरोसिन सस्ता होता है। इसी वजह से              इसका प्रयोग करते हैं। कोयले का चाय और मिठाई की दूकानों पर खूब इस्तेमाल होता है। हालांकि यह भी सच है कि धुआं और राख के चलते गंदगी भी  होती है।
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