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Chandauli News: अब नहीं बर्बाद होगा चंद्रप्रभा बांध का पानी, दरारें भरने का काम तेज
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शिकारगंज। सिंचाई विभाग के चंद्रप्रभा प्रखंड के द्वितीय उपखंड में स्थित चंद्रप्रभा बांध का पानी अब बर्बाद नहीं होगा। इसके लिए 12 करोड़ की लागत से बांध की दरारें भरने के साथ ही इसको और मजबूत करने का काम तेजी से चल रहा है। यह कार्य मुंबई की एक कंस्ट्रक्शन कंपनी करा रही है। बांध की मरम्मत होने पर 200 क्यूसेक पानी का रिसाव रुकेगा और 11 हजार हेक्टेयर खेत की सिंचाई के लिए भरपूर पानी मिलेगा।
चंद्रप्रभा बांध के पक्के हिस्से में निर्मित सुलूज गेट से 20 साल से लगातार 200 क्यूसेक पानी का रिसाव हो रहा है। इसके चलते गर्मी के दिनों में बांध का पानी स्टोर न रहकर बर्बाद हो जा रहा था। पानी के बहाव के कारण खेत की सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा था। इस परेशानी से जूझ रहे किसान पांच साल से आंदोलन कर रहे थे। इसके बाद सिंचाई विभाग की तरफ से बांध के सुदृढ़ीकरण की योजना बनाई गई। इसके तहत बांध के पक्के और उससे सटे कच्चे भाग की मरम्मत के लिए 12 करोड़ की कार्ययोजना स्वीकृत हुई। इस पैसे से अब बांध की मरम्मत का कार्य चल रहा है। मुंबई की कंपनी बांध की दरारें बंद करने का काम करा रही है। इसके अलावा बांध की मरम्मत भी जारी है। इसके साथ ही अब पानी की बर्बादी रुकने के संकेत मिलने लगे हैं। चंद्रप्रभा बांध पूरी तरह भर जाने पर 3000 मिलियन घनफीट पानी की क्षमता है। बांध से चकिया ब्लॉक के शिकारगंज, चौबिसहा, मझली पट्टी और बबुरी क्षेत्र के 11000 हेक्टेयर खेतों की सिंचाई होती है। इसके अतिरिक्त बांध के पानी से नेवाजगंज पश्चिम, नेवाजगंज पूर्वी बैरा पश्चिमी लिफ्ट कैनाल भी संचालित होता है। बांध से हो रहे लगातार रिसाव को रोकने के लिए बांध के पक्के हिस्से में बनी दरारों को भरने के लिए विशेष केमिकल का उपयोग किया जा रहा है। यह केमिकल दरारों में पहुंचकर उसमें फिक्स हो जाता है। इससे पानी का रिसाव रुक जाता है।जल शक्ति विभाग के अधीक्षण अभियंता ज्ञानचंद सिंह का कहना है कि अंडर वाटर ग्राउंडिंग के बाद बांध के सुलूज गेट सहित अन्य भागों से पानी के रिसाव की आशंका खत्म हो जाएगी और किसानों को सिंचाई के लिए भरपूर पानी मिलेगा।
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चंद्रप्रभा बांध के पक्के हिस्से में निर्मित सुलूज गेट से 20 साल से लगातार 200 क्यूसेक पानी का रिसाव हो रहा है। इसके चलते गर्मी के दिनों में बांध का पानी स्टोर न रहकर बर्बाद हो जा रहा था। पानी के बहाव के कारण खेत की सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा था। इस परेशानी से जूझ रहे किसान पांच साल से आंदोलन कर रहे थे। इसके बाद सिंचाई विभाग की तरफ से बांध के सुदृढ़ीकरण की योजना बनाई गई। इसके तहत बांध के पक्के और उससे सटे कच्चे भाग की मरम्मत के लिए 12 करोड़ की कार्ययोजना स्वीकृत हुई। इस पैसे से अब बांध की मरम्मत का कार्य चल रहा है। मुंबई की कंपनी बांध की दरारें बंद करने का काम करा रही है। इसके अलावा बांध की मरम्मत भी जारी है। इसके साथ ही अब पानी की बर्बादी रुकने के संकेत मिलने लगे हैं। चंद्रप्रभा बांध पूरी तरह भर जाने पर 3000 मिलियन घनफीट पानी की क्षमता है। बांध से चकिया ब्लॉक के शिकारगंज, चौबिसहा, मझली पट्टी और बबुरी क्षेत्र के 11000 हेक्टेयर खेतों की सिंचाई होती है। इसके अतिरिक्त बांध के पानी से नेवाजगंज पश्चिम, नेवाजगंज पूर्वी बैरा पश्चिमी लिफ्ट कैनाल भी संचालित होता है। बांध से हो रहे लगातार रिसाव को रोकने के लिए बांध के पक्के हिस्से में बनी दरारों को भरने के लिए विशेष केमिकल का उपयोग किया जा रहा है। यह केमिकल दरारों में पहुंचकर उसमें फिक्स हो जाता है। इससे पानी का रिसाव रुक जाता है।जल शक्ति विभाग के अधीक्षण अभियंता ज्ञानचंद सिंह का कहना है कि अंडर वाटर ग्राउंडिंग के बाद बांध के सुलूज गेट सहित अन्य भागों से पानी के रिसाव की आशंका खत्म हो जाएगी और किसानों को सिंचाई के लिए भरपूर पानी मिलेगा।
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