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दुग्ध उत्पादकों का 2019 से है बकाया, आश्वासन के बाद भी नहीं चुकाया

Sat, 20 Nov 2021 01:00 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 20 Nov 2021 01:00 AM IST
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Milk producers have dues since 2019, not paid even after assurance
नक्सल क्षेत्र में लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने और युवाओं को रोजगार दिए जाने के उद्देश्य 2011 मे श्वेत क्रांति कार्यक्रम के तहत अंबेडकर दुग्ध उत्पादन सहकारी समिति लिमिटेड की स्थापना हुई थी। जब स्थापना हुई तो क्षेत्र भर के दो दर्जन से अधिक समितियां इससे जुड़ीं। पराग दूध संघ रामनगर को नियमित दूध मुहैया कराने के बाद भी 2019 से भुगतान न किए जाने से संचालक का लाखों रुपये फंसा है। इसका खामियाजा दुग्ध उत्पादकों को भुगतना पड़ रहा है।
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सचिव राम नरेश उर्फ बच्चा यादव ने कहा कि चिलिंग बिल का भुगतान 2019 से बकाया है। ट्रांसपोर्ट गाड़ी लोडिंग और ड्राइवर व अन्य मदों के लाखों रुपए के कई भुगतान लंबित है। अफसर जीएम कार्यालय से भुगतान न होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ ले रहे हैं। करीब चार से पांच हजार लीटर दूध कलेक्ट होता था। शुरू में तो सब कुछ बेहतर चल रहा था। हालांकि धीरे- धीरे गांव में दूध मुहैया कराने ,दुग्ध उत्पादकों को पैसा दिए जाने में लापरवाही बरती जाने लगी। प्रतिदिन दो से तीन हजार लीटर दूध संस्था को मिलता है, जबकि पैसे का भुगतान एक तिहाई ही होता था। ऐसे में धीरे-धीरे दुग्ध उत्पादकों के यहां से दूध आना बंद हो गया। अब केवल एक हजार लीटर दूध ही सिर्फ आ रहा है। दूध के एवज में मिलने वाला पैसा सितंबर माह के बाद से पूरा नहीं मिला। ऐसे में दुग्ध उत्पादकों का करीब 16 लाख रुपये विभाग में फंसे है। दुग्ध उत्पादक दूध देने से हाथ खड़ा करने की तैयारी में हैं।
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