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अस्पतालों का कचरा बना खतरा
ब्यूरो/ अमरउजाला, चंदौली
Updated Mon, 09 May 2016 01:19 AM IST
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जिला अस्पताल परिसर में इधर उधर फेंका गया मेडिकल कचरा
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जनपद के दो संयुक्त जिला अस्पतालों सहित अन्य सरकारी व निजी अस्पतालों में मेडिकल कचरा के निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है। सरकारी अस्पताल के आकस्मिक वार्ड को छोड़ कर अन्य हिस्सों में डस्टबिन तक नहीं रखा गया है। जिससे मेडिकल कचरा अस्पतालों के बाहर गड्ढों, नालियों व खुले स्थानों पर फेंका जा रहा है। निजी चिकित्सालय भी मेडिकल कचरे को कहीं भी फेंक देते हैं, जिससे बीमारियों के फैलने का खतरा बना रहता है। इसे लेकर न तो स्वास्थ्य महकमा गंभीर है और न ही जिला प्रशासन।
जिला मुख्यालय पर पंडित कमलापति त्रिपाठी संयुक्त चिकित्सालय व चकिया तहसील मुख्यालय पर संयुक्त चिकित्सालय समेत पांच सामुदायिक व नौ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और लगभग तीन सौ प्राथमिक उप केंद्र जनपद में हैं। इसके अतिरिक्त निजी अस्पताल लगभग सभी कस्बों व शहरी इलाकों में कुकुरमुत्ते की तरह फैले हुए हैं। इन अस्पतालों में कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था पर गौर करें तो इस मामले में न केवल सरकारी अस्पताल फिसड्डी हैं, बल्कि निजी अस्पतालों का हाल भी कुछ ऐसा है। मरीजों की जख्मों की सफाई के बाद संक्रमित पट्टियों के अलावा उपयोग में लाए गए गए इंजेक्शन व साफ-सफाई के बाद निकलने वाला कूड़ा अस्पतालों के बाहर फेंक दिया जाता है। जिला अस्पताल का मेडिकल कचरा आकस्मिक वार्ड के मुख्य गेट के सामने मंदिर के पीछे खुले में फेंक दिया जाता है, जो पानी में पड़े-पड़े सड़ने लगता है। यही हाल अन्य सरकारी अस्पतालों का है। कुछ सरकारी अस्पतालों में तो कूड़ेदान तक नहीं है। ऐसे में कूड़े को कोने में फेंक देते हैं।
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जिला मुख्यालय पर पंडित कमलापति त्रिपाठी संयुक्त चिकित्सालय व चकिया तहसील मुख्यालय पर संयुक्त चिकित्सालय समेत पांच सामुदायिक व नौ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और लगभग तीन सौ प्राथमिक उप केंद्र जनपद में हैं। इसके अतिरिक्त निजी अस्पताल लगभग सभी कस्बों व शहरी इलाकों में कुकुरमुत्ते की तरह फैले हुए हैं। इन अस्पतालों में कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था पर गौर करें तो इस मामले में न केवल सरकारी अस्पताल फिसड्डी हैं, बल्कि निजी अस्पतालों का हाल भी कुछ ऐसा है। मरीजों की जख्मों की सफाई के बाद संक्रमित पट्टियों के अलावा उपयोग में लाए गए गए इंजेक्शन व साफ-सफाई के बाद निकलने वाला कूड़ा अस्पतालों के बाहर फेंक दिया जाता है। जिला अस्पताल का मेडिकल कचरा आकस्मिक वार्ड के मुख्य गेट के सामने मंदिर के पीछे खुले में फेंक दिया जाता है, जो पानी में पड़े-पड़े सड़ने लगता है। यही हाल अन्य सरकारी अस्पतालों का है। कुछ सरकारी अस्पतालों में तो कूड़ेदान तक नहीं है। ऐसे में कूड़े को कोने में फेंक देते हैं।
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