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नहाय खाय से व्रत होगा शुरू
चंदौली ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Fri, 04 Nov 2016 01:25 AM IST
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लोक आस्था का महापर्व चार दिवसीय डाला छठ की शुरूआत शुक्रवार को नहाय खाय के साथ होगी। व्रत के मद्देनजर गुरुवार को बाजार में चहल पहल तेज रही। वहीं शहरी और ग्रामीण इलाकों में सरोवरों की साफ सफाई का सिलसिला तेज हो गया है।
सूर्य की अराधना के महापूर्व डाला छठ को लेकर पूरा जिला ही भक्तिमय हो गया है। अत्यंत शुद्धता और नियम से मनाए जाने वाले व्रत की तैयारियां तो दीपावली से ही शुरू हो गई थी। तालाबों की साफ सफाई के साथ घरों में चावल बीनने, गेहूं सूखाने आदि की भी शुरूआत हो गई। यही नहीं अर्घ्य के लिए सूप दउरी आदि के बाजार भी सज गए।
शुक्रवार को नहाय खाय की शुरूआत होगी। इस दिन व्रती सुबह शुद्धता पूर्वक लौकी की सब्जी, चने की दाल और चावल बनाएंगे और उसे खाकर व्रत का संकल्प लेंगे। शनिवार को व्रती दिन भर निराजल रहकर शाम के वक्त बखीर का भोग लगाएंगे और चंद्र दर्शन कर एक बार जल ग्रहण करेंगे फिर 36 घंटे के निराजल कठिन व्रत रखेंगे। रविवार की शाम सरोवर तटों पर पहुंच कर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगे और सोमवार की सुबह उदयाचल सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का परायण करेंगे। नहाय खाय के लिए गुरुवार को बाजार में लौकी की अत्यधिक डिमांड रही। डिमांड की वजह से बाजार में चालीस रुपये प्रति किलोग्राम तक के भाव में लौकी बिकी। वहीं बाजार में बांस के सूप, दउरी के साथ बर्तन की दुकानों पर पीतल के सूप की भी बिक्री हुई। बाजार में सूप सौ से दो सौ तक तथा दउरी दो सौ से तीन सौ रुपये तक में बिके जबकि पीतल की सूप चार सौ रुपये तक के भाव में बिके।
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सूर्य की अराधना के महापूर्व डाला छठ को लेकर पूरा जिला ही भक्तिमय हो गया है। अत्यंत शुद्धता और नियम से मनाए जाने वाले व्रत की तैयारियां तो दीपावली से ही शुरू हो गई थी। तालाबों की साफ सफाई के साथ घरों में चावल बीनने, गेहूं सूखाने आदि की भी शुरूआत हो गई। यही नहीं अर्घ्य के लिए सूप दउरी आदि के बाजार भी सज गए।
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शुक्रवार को नहाय खाय की शुरूआत होगी। इस दिन व्रती सुबह शुद्धता पूर्वक लौकी की सब्जी, चने की दाल और चावल बनाएंगे और उसे खाकर व्रत का संकल्प लेंगे। शनिवार को व्रती दिन भर निराजल रहकर शाम के वक्त बखीर का भोग लगाएंगे और चंद्र दर्शन कर एक बार जल ग्रहण करेंगे फिर 36 घंटे के निराजल कठिन व्रत रखेंगे। रविवार की शाम सरोवर तटों पर पहुंच कर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगे और सोमवार की सुबह उदयाचल सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का परायण करेंगे। नहाय खाय के लिए गुरुवार को बाजार में लौकी की अत्यधिक डिमांड रही। डिमांड की वजह से बाजार में चालीस रुपये प्रति किलोग्राम तक के भाव में लौकी बिकी। वहीं बाजार में बांस के सूप, दउरी के साथ बर्तन की दुकानों पर पीतल के सूप की भी बिक्री हुई। बाजार में सूप सौ से दो सौ तक तथा दउरी दो सौ से तीन सौ रुपये तक में बिके जबकि पीतल की सूप चार सौ रुपये तक के भाव में बिके।
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