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किसानों को बताए गए मिट्टी के लाभ
चंदौली ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Tue, 06 Dec 2016 01:20 AM IST
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मृदा कार्ड के साथ किसान।
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कृषि विज्ञान केन्द्र सभागार में सोमवार को विश्व मृदा दिवस मनाया गया। इस मौके पर 280 किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्रदान किया गया।
इस दौरान केविके के मृदा वैज्ञानिक डा. एस राम ने उपस्थित किसानों को मृदा दिवस मनाने के उद्देश्य व उपयोगिता के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्वस्थ मिट्टी के बिना खेत हरा नहीं हो सकता। इसलिए खेतों की मृदा का निरंतर परीक्षण कर उसके स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए।
इस मौके पर कृषि विज्ञान केन्द्र डा. आरपीएस रघुवंशी ने कहा कि विश्व मृदा दिवस मनाने के पीछे मंशा यह है कि तेजी से गिर से मृदा स्वास्थ्य में सुधार लाया जाएगा। यह तभी संभव है जब किसान मृदा स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हों। बताया कि रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध इस्तेमाल से मृदा की उर्वरा शक्ति बिगड़ रही है, जो चिंता का विषय है। मृदा स्वास्थ्य में सुधार के लिए नियमित रूप से मृदा की जांच कराएं और जैविक उर्वरकों के इस्तेमाल को अधिक से अधिक इस्तेमाल करें।
फसल उत्पादन वैज्ञानिक डा. समीर कुमार पांडेय ने बताया कि किसान मिट्टी की जांच कराकर की उर्वरक का इस्तेमाल करें। जैव उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों का उत्पादन बढ़ेगा। जिस प्रकार शरीर के लिए खून की आवश्यकता होती है ठीक उसी प्रकार मिट्टी को स्वस्थ रखने के लिए जैविक खाद व जीवांश खाद की आवश्यकता पड़ती है। डा. अभय दीप गौतम ने मृदा परीक्षण से होने वाले लाभ व उसके महत्व की विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान कार्यक्रम में आए किसानों ने वैज्ञानिकों से मृदा सम्बन्धित विभिन्न सवाल किए।
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इस दौरान केविके के मृदा वैज्ञानिक डा. एस राम ने उपस्थित किसानों को मृदा दिवस मनाने के उद्देश्य व उपयोगिता के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्वस्थ मिट्टी के बिना खेत हरा नहीं हो सकता। इसलिए खेतों की मृदा का निरंतर परीक्षण कर उसके स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए।
इस मौके पर कृषि विज्ञान केन्द्र डा. आरपीएस रघुवंशी ने कहा कि विश्व मृदा दिवस मनाने के पीछे मंशा यह है कि तेजी से गिर से मृदा स्वास्थ्य में सुधार लाया जाएगा। यह तभी संभव है जब किसान मृदा स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हों। बताया कि रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध इस्तेमाल से मृदा की उर्वरा शक्ति बिगड़ रही है, जो चिंता का विषय है। मृदा स्वास्थ्य में सुधार के लिए नियमित रूप से मृदा की जांच कराएं और जैविक उर्वरकों के इस्तेमाल को अधिक से अधिक इस्तेमाल करें।
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फसल उत्पादन वैज्ञानिक डा. समीर कुमार पांडेय ने बताया कि किसान मिट्टी की जांच कराकर की उर्वरक का इस्तेमाल करें। जैव उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों का उत्पादन बढ़ेगा। जिस प्रकार शरीर के लिए खून की आवश्यकता होती है ठीक उसी प्रकार मिट्टी को स्वस्थ रखने के लिए जैविक खाद व जीवांश खाद की आवश्यकता पड़ती है। डा. अभय दीप गौतम ने मृदा परीक्षण से होने वाले लाभ व उसके महत्व की विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान कार्यक्रम में आए किसानों ने वैज्ञानिकों से मृदा सम्बन्धित विभिन्न सवाल किए।
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