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पूर्व विधायक इसे ही लगाएं

Thu, 19 May 2022 12:57 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 19 May 2022 12:57 AM IST
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Duddhi's ex-MLA Ruby Prasad's caste certificate revoked
चंदौली। सोनभद्र के दुद्धी विधानसभा (सुरक्षित) से पूर्व विधायक रही रूबी प्रसाद का जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया गया है। अनुसूचित जाति जनजाति आयोग की ओर तरफ से गठित कमेटी ने अपना फैसला देते हुए उनके प्रमाणपत्र को फर्जी करार दिया। जिला मुख्यालय पर मंगलवार की रात आए राज्य अनुसूचित जाति, जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष रामनरेश पासवान ने इसकी जानकारी दी। वर्ष 2012 में उन्होंने ही रूबी प्रसाद के जाति प्रमाण पत्र पर आपत्ति जताते हुए याचिका दाखिल की थी।
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देर रात मुख्यालय पर बातचीत के दौरान बताया की रूबी प्रसाद फर्जी प्रमाणपत्र के सहारे दुद्धी से विधायक बनीं। वर्ष 2012 में इसकी शिकायत की गई और हाईकोर्ट तक मामला गया। इसकी अभी जांच की प्रक्रिया चल ही रही थी। इसी बीच प्रमुख सचिव समाज कल्याण हिमांशु कुमार को कमेटी गठित कर जांच के निर्देश दिए गए थे। मंगलवार को उस कमेटी का निर्णय आया है। इसमें प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने की बात सामने आई है और रूबी प्रसाद का प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया गया है।
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उन्होंने बताया कि रूबी प्रसाद न सिर्फ फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे विधायक बनीं। बल्कि विधायक रहते हुए इस पद का बेजा इस्तेमाल किया। वे जिस दल की सरकार बनती थी उस दल में शामिल होकर अपनी जांच को लगातार प्रभावित करने का प्रयास करती थीं, इसके बावजूद योगी सरकार ने इस मामले में पूरी पारदर्शिता के साथ जांच के निर्देश दिए और गठित कमेटी ने जांच के बाद बड़ा निर्णय लेते हुए आज उनके प्रमाण पत्र के निरस्तीकरण की कार्रवाई की। रामनरेश पासवान ने बताया कि 2007 में उन्होंने फर्जी तरीके से अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनवाया। इसके बाद वह 2012 में दुद्धी विधानसभा से विधायक बन गई. जानकारी जुटाई गई तो पता चला कि वह बिहार के समस्तीपुर की रहने वाली हैं। इनके पिता सुबोध सिंह (राजपूत) हैं। गठित कमेटी की विजिलेंस ने प्राथमिक स्कूली शिक्षा, वंशावली, खसरा-खतौनी समेत अन्य प्रमाण पत्रों की जांच की। जिसमें सामान्य जाति (राजपूत) का होना पाया गया। इसके अलावा उनके पिता सुबोध सिंह ने पूर्व विधायक रूबी कुमारी को अपनी बेटी रूबी सिंह होने की बात बताई। इन्होंने बताया कि रूबी ने एक अनुसूचित जाति के व्यक्ति से प्रेम विवाह किया है। इस पूरे मामले में कमेटी की जांच के बाद पाया गया कि रूबी प्रसाद ही रूबी सिंह हैं। जो राजपूत जाति की है, जिसके बाद 17 मई को उनका जाति प्रमाण पत्र निरस्त किए जाने का निर्णय लिया गया।
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पूर्व विधायक की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
चंदौली। पूर्व विधायक रूबी प्रसाद का जाति प्रमाण पत्र साबित होने और निरस्तीकरण की कार्रवाई के बाद उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे विधायक बनने व उसका लाभ लेने की दशा में उनके खिलाफ फर्जीवाड़ा से संबंधित मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। यही नहीं विधायक रहते हुए जिस तरह से सरकारी धन का उपयोग और लाभ लिया गया है। इस बाबत मुकदमा दर्ज किए जाने के साथ ही उनसे वसूली भी की जा सकती है। ऐसी दशा में आजीवन कारावास की सजा भी हो सकती है।
सोनभद्र। इस बाबत पूर्व विधायक रूबी प्रसाद का कहना था कि उन्हें प्रमाण पत्र निरस्त किए जाने की कोई जानकारी नहीं है। समिति की ओर से उनसे साक्ष्य मांगे गए थे, जिसे उन्होंने उपलब्ध करा दिए थे। पूर्व विधायक का कहना था कि इससे पहले भी हाईकोर्ट के निर्देशन में जांच हो चुकी है। डीएम, कमिश्नर की जांच में भी शिकायत खारिज हो गई थी। अब शिकायतकर्ता एससी-एसटी आयोग के उपाध्यक्ष रामनरेश पासवान अपने पद का दुरुपयोग करते हुए निजी रंजिश के कारण ऐसा कर रहे हैं, जिससे हमारी छवि खराब हो। उन्होंने जांच कमेटी की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब उपाध्यक्ष ही शिकायतकर्ता होंगे तो जांच निष्पक्ष कैसे हो सकती है।

रूबी प्रसाद की शादी सोनभद्र के डॉ. एच प्रसाद से हुई थी। राजनीति में रुचि के चलते वह दुद्धी सीट से कांग्रेस के समर्थन से निर्दल चुनाव लड़ीं और जीत गईं। इसके बाद उन्होंने सत्ताधारी दल समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। रूबी प्रसाद एक बार सर्वश्रेष्ठ विधायक का पुरस्कार प्राप्त कर चुकी हैं। इसके अलावा मिशेल ओबामा के हाथों विमेन इंपॉवरमेंट के लिये सम्मानित हुई थीं।
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