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Chandauli News: नाम और पते में मामूली अंतर, लाभार्थी सूची में नाम, फिर भी 3.50 लाख के नहीं बने आयुष्मान कार्ड
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पीडीडीयू नगर। गरीबों को 5 लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की गारंटी देने वाली आयुष्मान भारत योजना में रिकार्ड की गड़बड़ियां रोड़ा बन गई हैं। चयनित लाभार्थियों के नाम, जन्मतिथि, पता, पिता या पति के नाम समेत अन्य विवरण में मामूली अंतर होने की वजह से 3,49,969 लोगों के आयुष्मान कार्ड नहीं बन पाए हैं। अब ये आवेदक कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। साथ ही पात्रता की अर्हताएं पूरी करने के बाद भी इन्हें योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल पर दर्ज लाभार्थियों के विवरण में कई तरह की गड़बड़ियां हैं। इसकी वजह से उनके आयुष्मान कार्ड नहीं बन पा रहे हैं। वर्ष 2011 में हुए आर्थिक सर्वेक्षण के विवरण के आधार पर लाभार्थियों का चयन कर आयुष्मान कार्ड बनाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से सूची जारी होने के बाद लाभार्थी आधार कार्ड बनवाने पहुंच रहे हैं तो दस्तावेजों में मिलान करने पर ऐसी गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। किसी लाभार्थी के नाम, जन्मतिथि तो किसी के पिता या पति के नाम में मामूली अंतर होने से उनके कार्ड नहीं बन पा रहे। पात्र होने के बावजूद अब तक करीब 3.50 लाख लोगों के आयुष्मान कार्ड नहीं बन सके।
जिले में 9,76,431 लाभार्थियों के सापेक्ष अब तक 6,26,462 के कार्ड ही बन सके हैं। 3,49,969 लाभार्थी अभी तक कार्ड से वंचित हैं। आयुष्मान कार्ड के जरिये पात्र परिवारों को सूचीबद्ध अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है। ऐसे में बड़ी संख्या में लाभार्थियों का कार्ड नहीं बन पाना विभाग के लिए चुनौती है। वहीं, पात्र सूची में नाम होने और सारी अर्हताएं पूरी करने के बाद भी बड़ी संख्या में लाभार्थियों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। दस्तावेजों में गड़बड़ियों की वजह से अधिकारियों और कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं।
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बोले लाभार्थी--
- मेरे आधार कार्ड के नाम से आयुष्मान कार्ड की सूची में दर्ज नाम में ए का अंतर है। इस मामूली गड़बड़ी के कारण मेरा आयुष्मान कार्ड नहीं बन पा रहा है। - संध्या, ईसापुर, कलानी
- आधार कार्ड और स्वास्थ्य विभाग की सूची में दर्ज नाम में स्पेस का अंतर है। इसके कारण आयुष्मान कार्ड नहीं बन पा रहा है। ऐसे में निजी अस्पताल में इलाज कजाना पड़ रहा है। - राजकुमार यादव, कूढ़े खुर्द
- मेरे दिल में छेद है। आयुष्मान भारत योजना की सूची में नाम होने के बावजूद आधार कार्ड और स्वास्थ्य विभाग के विवरण में अंतर के कारण मेरा कार्ड नहीं बन पाया। -धीरज कुमार, बरठीं
- मुझे कान का ऑपरेशन करवाना है। इंटरनेट पर मौजूद लाभार्थियों की सूची में मेरा नाम दर्ज है लेकिन जन्मतिथि में अंतर होने की वजह से मेरा कार्ड नहीं बन रहा है। - नंदकिशोर, बरठी
इनसेट-
आयुष्मान योजना के आंकड़े
- कुल लाभार्थी : 9,76,431
- कार्ड बने : 6,26,462
- प्रगति : 64.16 फीसदी
- कार्ड से वंचित : 3,49,969
- बाकी : 35.84 फीसदी
इनसेट
नाम में अंतर पर ‘एक ही व्यक्ति’ होने का प्रमाणपत्र जरूरी
आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों के नाम, जन्मतिथि, पता, पिता अथवा पति के नाम और अन्य त्रुटियां होने पर संशोधन कराया जा सकता है। इसके लिए जिला स्तर पर डाटा सुधार की प्रक्रिया की जा रही है। लाभार्थी संबंधित केंद्र पर जरूरी अभिलेखों के साथ पहुंचकर अपने विवरण का सत्यापन और सुधार करा सकते हैं। लाभार्थियों के आधार कार्ड और आयुष्मान पोर्टल पर दर्ज नाम में अंतर होने पर ‘एक ही व्यक्ति’ होने का प्रमाणपत्र देना होगा। प्रमाणपत्र पर आशा, एएनएम, सीएचओ, ग्राम पंचायत प्रशासक, आयुष्मान भारत के नोडल अधिकारी और चिकित्सा अधिकारी के हस्ताक्षर कराने होंगे। स्थानीय जांच और दस्तावेजों के मिलान के बाद लाभार्थी के पति, पिता, जन्मतिथि, जेंडर, पता में संशोधन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। संवाद
इनसेट-
अब तक 70 हजार लोगों ने कराया इलाज
जिले में आयुष्मान भारत योजना के तहत 44 निजी और सरकारी अस्पताल पंजीकृत हैं। वर्ष 2025 तक इन अस्पतालों में 70,014 मरीजों ने 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा का लाभ उठाया है।
कोट-
आयुष्मान भारत के लाभार्थियों के रिकाॅर्ड में गड़बड़ियों को दूर किया जा रहा है। नाम संशोधन छोड़ कर जन्मतिथि सहित अन्य गड़बड़ियों को दूर करने के लिए शिविर लगाए जा रहे हैं। इसमें आशा कार्यकर्ताओं की मदद ली जा रही है। निगरानी भी की जा रही है। जल्द ही सभी लाभार्थियों के कार्ड बना दिए जाएंगे। - डॉ. परितोष मिश्र, सीएमओ, चंदौली
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स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल पर दर्ज लाभार्थियों के विवरण में कई तरह की गड़बड़ियां हैं। इसकी वजह से उनके आयुष्मान कार्ड नहीं बन पा रहे हैं। वर्ष 2011 में हुए आर्थिक सर्वेक्षण के विवरण के आधार पर लाभार्थियों का चयन कर आयुष्मान कार्ड बनाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से सूची जारी होने के बाद लाभार्थी आधार कार्ड बनवाने पहुंच रहे हैं तो दस्तावेजों में मिलान करने पर ऐसी गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। किसी लाभार्थी के नाम, जन्मतिथि तो किसी के पिता या पति के नाम में मामूली अंतर होने से उनके कार्ड नहीं बन पा रहे। पात्र होने के बावजूद अब तक करीब 3.50 लाख लोगों के आयुष्मान कार्ड नहीं बन सके।
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जिले में 9,76,431 लाभार्थियों के सापेक्ष अब तक 6,26,462 के कार्ड ही बन सके हैं। 3,49,969 लाभार्थी अभी तक कार्ड से वंचित हैं। आयुष्मान कार्ड के जरिये पात्र परिवारों को सूचीबद्ध अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है। ऐसे में बड़ी संख्या में लाभार्थियों का कार्ड नहीं बन पाना विभाग के लिए चुनौती है। वहीं, पात्र सूची में नाम होने और सारी अर्हताएं पूरी करने के बाद भी बड़ी संख्या में लाभार्थियों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। दस्तावेजों में गड़बड़ियों की वजह से अधिकारियों और कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं।
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बोले लाभार्थी
- मेरे आधार कार्ड के नाम से आयुष्मान कार्ड की सूची में दर्ज नाम में ए का अंतर है। इस मामूली गड़बड़ी के कारण मेरा आयुष्मान कार्ड नहीं बन पा रहा है। - संध्या, ईसापुर, कलानी
- आधार कार्ड और स्वास्थ्य विभाग की सूची में दर्ज नाम में स्पेस का अंतर है। इसके कारण आयुष्मान कार्ड नहीं बन पा रहा है। ऐसे में निजी अस्पताल में इलाज कजाना पड़ रहा है। - राजकुमार यादव, कूढ़े खुर्द
- मेरे दिल में छेद है। आयुष्मान भारत योजना की सूची में नाम होने के बावजूद आधार कार्ड और स्वास्थ्य विभाग के विवरण में अंतर के कारण मेरा कार्ड नहीं बन पाया। -धीरज कुमार, बरठीं
- मुझे कान का ऑपरेशन करवाना है। इंटरनेट पर मौजूद लाभार्थियों की सूची में मेरा नाम दर्ज है लेकिन जन्मतिथि में अंतर होने की वजह से मेरा कार्ड नहीं बन रहा है। - नंदकिशोर, बरठी
इनसेट-
आयुष्मान योजना के आंकड़े
- कुल लाभार्थी : 9,76,431
- कार्ड बने : 6,26,462
- प्रगति : 64.16 फीसदी
- कार्ड से वंचित : 3,49,969
- बाकी : 35.84 फीसदी
इनसेट
नाम में अंतर पर ‘एक ही व्यक्ति’ होने का प्रमाणपत्र जरूरी
आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों के नाम, जन्मतिथि, पता, पिता अथवा पति के नाम और अन्य त्रुटियां होने पर संशोधन कराया जा सकता है। इसके लिए जिला स्तर पर डाटा सुधार की प्रक्रिया की जा रही है। लाभार्थी संबंधित केंद्र पर जरूरी अभिलेखों के साथ पहुंचकर अपने विवरण का सत्यापन और सुधार करा सकते हैं। लाभार्थियों के आधार कार्ड और आयुष्मान पोर्टल पर दर्ज नाम में अंतर होने पर ‘एक ही व्यक्ति’ होने का प्रमाणपत्र देना होगा। प्रमाणपत्र पर आशा, एएनएम, सीएचओ, ग्राम पंचायत प्रशासक, आयुष्मान भारत के नोडल अधिकारी और चिकित्सा अधिकारी के हस्ताक्षर कराने होंगे। स्थानीय जांच और दस्तावेजों के मिलान के बाद लाभार्थी के पति, पिता, जन्मतिथि, जेंडर, पता में संशोधन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। संवाद
इनसेट-
अब तक 70 हजार लोगों ने कराया इलाज
जिले में आयुष्मान भारत योजना के तहत 44 निजी और सरकारी अस्पताल पंजीकृत हैं। वर्ष 2025 तक इन अस्पतालों में 70,014 मरीजों ने 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा का लाभ उठाया है।
कोट-
आयुष्मान भारत के लाभार्थियों के रिकाॅर्ड में गड़बड़ियों को दूर किया जा रहा है। नाम संशोधन छोड़ कर जन्मतिथि सहित अन्य गड़बड़ियों को दूर करने के लिए शिविर लगाए जा रहे हैं। इसमें आशा कार्यकर्ताओं की मदद ली जा रही है। निगरानी भी की जा रही है। जल्द ही सभी लाभार्थियों के कार्ड बना दिए जाएंगे। - डॉ. परितोष मिश्र, सीएमओ, चंदौली