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श्रीमद भागवत कथा को मोक्ष का साधन बताया

Mon, 04 Nov 2019 12:42 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 04 Nov 2019 12:42 AM IST
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कमालपुर। वर्तमान में कलियुग से मुक्ति हेतु भागवत शास्त्र का श्रवण तथा भक्ति ज्ञान वैराग्य की प्राप्ति, देवर्षि नारद की भक्ति से भेंट तथा भक्त का कष्ट दूर करने के लिए नारद द्वारा मृत्युलोक से प्रस्थान के पूर्व भागवत कथा में अपने तेज स्वरूप को स्थापित किया। अत: इस कथा को सुनने से साक्षात भगवान कृष्ण के दर्शन की प्राप्ति होती है। ये बातें क्षेत्र के जनौली में चल रही भागवत कथा के दूसरे दिन रविवार को वाराणसी से आये मुख्य वक्ता दिनमणि पांडेय ने कही। उन्होंने कहा कि संसार से मोक्ष पाना ही इस कथा का सार है।
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मुख्य कथा वाचक ने कहा कि वर्तमान में मनुष्य भौतिकवादी जीवन यापन कर रहा है जिससे वह भगवत भक्ति से दूर होता जा रहा है। माया के लिए जीवन यापन करन ही उसके दुखों का कारण है।उन्होंने कहा कि भागवत कथा के श्रवण सेजीवन के 16 संस्कारों के बारे में तथा जीवन को सार्थक बनाने की प्रकृति व्यवस्थित रूप से महर्षि वेद व्यास ने अपने तपोधर्म से वर्णित किया है।कथा में उन्होंने कहा कि मनुष्य के करने योग्य धर्म ब्राह्मणों का सम्मान, माता, पिता, गुरु के प्रति आदरभाव तथा शांतचित्त रहने के लिए मन को स्थिर करना जरूरी है। अगर मनुष्य शांतचित्त होकर भागवत कथा का श्रवण करता है तो वह मोक्ष को प्राप्त करता है। गोकर्ण धुंधकारी और आत्मदेव ब्राह्मणों के बारे में बताया कि मनुष्य को अपने कर्मों का फल अवश्य मिलता है। कथा श्रवण के मुख्य यजमान आशा चौबे, चंद्रकला चौबे और अखिलेश्वर चौबे रहे। इस दौरान लवकुश चौबे, दीनानाथ चौबे, क्षमाशंकर पांडेय, श्यामबली सिंह, राम अवतार सिंह, श्यामजी मौर्य रहे।
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