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पराली जलाने से पर्यावरण को होता है नुकसान -

Thu, 28 Oct 2021 12:45 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 28 Oct 2021 12:45 AM IST
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Burning of stubble causes damage to the environment
शिकारगंज। धान की पराली जलाने पर पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुंचता है। इसलिए किसानों को पराली न जलाकर उसे खेत में ही नष्ट करने के विकल्प को अपनाने की जरूरत है। ये बातें नेवाजगंज ग्राम पंचायत में हरित क्रांति योजना के तहत कृषि गोष्ठी में जिला उद्यान अधिकारी अलका श्रीवास्तव ने कही।
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उन्होंने कहा कि पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति नष्ट हो जाती है तथा मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं। इससे उत्पादन प्रभावित होता है। उन्होंने किसानों को कहा कि हरी खाद, जैविक खाद तथा कंपोस्ट खाद का प्रयोग किसानों को खेती में करना होगा। इसके लिए पशुपालन भी आवश्यक है। उन्होंने किसानों से दहलन-तिलहन की खेती का रकबा बढ़ाने, बीज तथ भूमि का शोधन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसानों को किचेन गार्डेन की दिशा में प्रयास करना चाहिए ताकि वे अपने उपयोग के लिए सब्जियां खुद उगा सकते हैं। इस अवसर पर एसडीओ सुरेश प्रसाद, अमरनाथ सिंह पटेल, जर्नादन सिंह, प्रवीण कुमार सिंह, चेतनारायण सिंह, सुरेन्द्र कुमार यादव, अशोक कुमार सिंह, संध्या देवी, रामभरोस जायसवाल, पूजा देवी, रामानंद मौर्य, शेषधर सिंह, अरविंद सिंह बबलू, रामकेस मौर्य, गुलाब कनौजिया रहे।
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