{"_id":"63af35e150b9d44e264c1344","slug":"after-the-explosion-lumps-of-meat-fell-in-people-s-houses-the-road-became-smoke-chandauli-news-vns691261971","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandauli News: धमाके के बाद लोगों के घरों में गिरे मांस के लोथड़े, धुआं-धुआं हो गई सड़क","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandauli News: धमाके के बाद लोगों के घरों में गिरे मांस के लोथड़े, धुआं-धुआं हो गई सड़क
विज्ञापन
मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र के रविनगर स्थित निजी अस्पताल के बाद सड़क पर ऑक्सीजन सिलिंडर में हुए धमाके की आवाज से आधा शहर हिल गया। वहीं मात्र एक सेकंड में दो लोगों की दर्दनाक मौत से दो परिवार उजड़ गए। राजन मां-बाप का इकलौता पुत्र और घर का एकमात्र कमाऊ सदस्य था। उसके दो मासूम बच्चे भी हैं। राजन की मौत से उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया। धमाका इतना तेज था कि राजन का चेहरा भी उसके परिजन नहीं देख सके।
मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र कूढ़कला गांव निवासी चंद्रभानु (30) रोज की तरह शुक्रवार की सुबह अपने साथी न्यू महाल निवासी राजन पाल(24) के साथ अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलिंडर डिलिवरी देने के लिए घर से निकला था। उसकी गाड़ी पर कुल 25 ऑक्सीजन सिलिंडर लदे थे। इस दौरान अस्पताल में सिलिंडर की डिलिवरी देने के लिए सड़क पर सिलिंडर उतारने के दौरान उसमें धमाका हो गया। इसमें दोनों लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। चंद्रभान दो भाइयों में सबसे छोटा था। सूचना के बाद अस्पताल पहुंची उसकी मां शांति देवी, बड़े भाई चंदिका प्रसाद व भाभी का रो-रोकर बुुरा हाल हो गया। वहीं दूसरी तरफ राजन पाल अपने घर का इकलौता पुत्र था। राजन के पिता राजकुमार पाल व मां सोनी देवी, बड़ी बहन ऋतु और छोटी बहन रानी का भी रो-रोकर बुरा हाल हो गया है। राजन की पत्नी नीलम भी बेटी सृष्टि(01) व बेटे श्रेयांश (02) मढ़िया स्थित मायके गई हुई थी। मौत के बाद पिता माता और पत्नी का रो-रो रोकर बुरा हाल था। दोनों बच्चों के समझ में कुछ नहीं आ रहा था बस मां का चेहरा देख रहे थे।
पिता की तेरहवीं भी नहीं बीत पाई, पति की मौत की खबर आई
कूढ़कला गांव निवासी चंद्रभानु (30) की पांच वर्ष पहले चकिया के सिकंदरपुर स्थित गायघाट निवासी परदेशी राम की पुत्री सीमा के साथ हुई थी। चंद्रभानु का दो वर्ष का पुत्र ओम (02) भी है। सीमा की पिता की मौत 20 दिसंबर को हुई थी। जिससे सीमा काफी दुखी थी। पिता की तेरहवीं एक जनवरी को थी। इसमें शामिल होने के लिए सीमा अपने मायके गई थी। पर अभी तेरहवीं पूरी बीत भी नहीं पाई थी कि सीमा को उसके पति के मौत की खबर मिल गई। इस निष्ठुर नियति को सुनकर हर कोई मर्माहत हो गया। सीमा पर दुखों का पहाड़ टूूटा है। आंसू रूकने के नाम नहीं ले रहे थे। वह रह-रहकर बेहोश हो जा रही थी। संवाद
विज्ञापन
राजन ने एक महीने पहले ही शुरू किया था सिलिंडर डिलिवरी का काम
राजन पाल ने एक माह पहले ही चंद्रभानु के साथ ऑक्सीजन सिलिंडर डिलवरी का काम शुरू किया था। उसके दोस्तों ने बताया कि राजन, फ्लिपकार्ट से जुड़ी कुरियर कंपनी ई-कार्ट में डिलवरी का कार्य करता था। वह घर का एकमात्र कमाऊ सदस्य था। पैसे कम होने के कारण घर का खर्च चला पाने में उसे परेशानी हो रही थी। जिसके बाद उसने एक माह पहले आक्सीजन सिलिंडर की डिलिवरी शुरू किया था।
अस्पताल के खंभे और घरों के चौखट तक उखड़ गए
रविनगर में अस्पताल के बाहर शुक्रवार को ऑक्सीजन सिलिंडर के सड़क पर गिरने से हुआ धमाका इतना अधिक तेज था कि आसपास के आधा दर्जन घरों के खिड़की और दरवाजे के शीशे टूट गए। पास की बड़ी बिल्डिंग का दरवाजा लॉक था। उसका चौखट और लॉक टूट गया। अस्पताल का खंभा उखड़ गया। अस्पताल में खड़ी कार और अन्य वाहनों के शीशे भी फूट गए। सिलिंडर के टुकड़े घटना स्थल से लगभग पांच सौ मीटर की दूरी पर जाकर गिरे। वहीं दूसरी तरफ सिलिंडर उतार रहे एक व्यक्ति के शरीर के चीथड़े लगभग 50 मीटर दूर तक लोगों के घरों में जाकर गिरे।
शुक्रवार की सुबह सबकुछ सामान्य दिनों की तरह चल रहा था। रविनगर व आसपास के क्षेत्र में सभी लोग अपने-अपने कार्यो में व्यस्त थे। तभी 09 बजकर 56 मिनट पर तेज धमाके की आवाज लोगों को सुनाई दी। धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि घटना स्थल से लगभग एक किलोमीटर परिधि में लोगों ने इसकी आवास सुनीं। इसके बाद जब लोगों ने घरों से बाहर निकल देखा तो उनके होश उड़ गये। पिकअप वाहन चालक व खलासी के शवों के चिथड़े उड़ गए थे। एक व्यक्ति के शव के टुकड़े आसपास से घरों में जाकर गिर थे।
‘हमार हीरा जइसन लाल कहां गइले’
ऑक्सीजन सिलिंडर ब्लास्ट के बाद चंद्रभानु की मां शांति का रो-रोकर बुरा हाल था। घटना की सूचना पर वह दौड़ते भागते अस्पताल तक पहुंच गई। तब तक चंद्रभानु का शव मर्चरी में भेजा जा चुका था। मां अस्पताल के बाहर ही गश खाकर गिर गई। होश में आई तो रोने लगी। बार-बार यही कह रही थी--‘हम सुबहे देखनी ह, हमार हीरा जइनसन लाइ कहां गइले, बतावा जा।’ वहीं राजन के पिता के आंसू रूकने का नाम नहीं ले रहे थे।
पहले भी हो चुकी है सिलिंडर ब्लास्ट की घटनाएं
जिले में पहले भी सिलिंडर फटने की घटनाएं हो चुकी हैं। 23 सितंबर 2020 को मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र के चंदासी स्थित इंडियन एयर गैस लिमिटेड फैक्ट्री में सिलिंडर में एसिटिलीन गैस भरने के दौरान विस्फोट हो गया था। उस आपरेटर समेत तीन लोग घायल हो गए थे। उस दौरान फैक्ट्री में कैल्शियम कार्बाइड से एसिटिलीन गैस बनाकर सिलिंडर में भरने का काम किया जा रहा था। वहीं 22 अगस्त 2021 को रामनगर थाना क्षेत्र के सूजाबाद स्थित पोलाव शहीद बाबा की मजार के पास मेले में गुब्बारे में हवा भरने वाला सिलिंडर में ब्लास्ट हो गया था। उस दौरान एक महिला सहित दो लोगों की मौत हो गई थी वहीं चार लोग घायल हो गए थे।
प्राणदायिनी एक पल में बन सकती है प्राणघातिनी
आक्सीजन सिलिंडर बरती गई थोड़ी से असावधानी बड़ी घटना का कारण बन सकती है। शुक्रवार को रविनगर में हुई घटना ने इसे साबित कर दिया है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी रमाशंकर तिवारी ने बताया कि
सिलिंडर में ऑक्सीजन बेहद तेज प्रेशर से भरी जाती है। ऐसे में लीकेज होने पर उसी प्रेशर से वह बाहर भी निकलती है। सिलेंडर में 2000 पीएसआई (पाउंड स्क्वायर इंच) की स्पीड से गैस भरी जाती है। लीकेज होने पर इतनी ही स्पीड से गैस बाहर भी निकलती है। लीकेज होने पर सिलेंडर भी उसी तरह रफ्तार से पीछे भागेगा, जिस तरह गुब्बारे से हवा निकलने पर वह पीछे भागता है। यह बेहद खतरनाक है। घर या प्लांट में आक्सीजन सिलिंडर में विस्फोट होने पर इमारत के ढहने का भी खतरा है। ऐसे में इसका इस्तेेमाल काफी सावधानी से करना चाहिए। ऑक्सीजन खत्म होने पर इसे बार-बार भरवाने के लिए रिफिल करना जरूरी होता है। यही वजह है कि इसमें रिसाव की संभावना होती है और किसी अनहोनी के चलते इसमें आग भी लग सकती है। इसके अलावा आक्सीजन सिलिंडर को हमेशा सीधे रखना चाहिए और उसमें क्लंप लगा हो । इसके साथ ही पांच साल में सिलिंडर की हाइड्रो टेस्टिंग भी जरूरी होती है।
तीन घन क्यूबिक मीटर का था ऑक्सीजन सिलिंडर
नगर में रविनगर में शुक्रवार हो ब्लास्ट हुआ आक्सीजन सिलिंडर तीन क्यूबिक मीटर की क्षमता का था। दरअसल अस्पतालों अधिकतर तीन व सात क्यूबिक मीटर सिलिंडर इस्तेमाल किये जाते है। सात क्यूबिक मीटर सिलिंडर का इस्तेमाल आक्सीजन प्लांट में किया जाता है जहां पाइप के माध्यम से बेड तक आक्सीजन की सप्लाई होती है। वहीं तीन क्यूबिक मीटर के सिलिंडर को आवश्कता पड़ने पर मरीके में बेड के पास ही ट्राली के माध्यम से लगाया जाता है। संवाद
विज्ञापन
मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र कूढ़कला गांव निवासी चंद्रभानु (30) रोज की तरह शुक्रवार की सुबह अपने साथी न्यू महाल निवासी राजन पाल(24) के साथ अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलिंडर डिलिवरी देने के लिए घर से निकला था। उसकी गाड़ी पर कुल 25 ऑक्सीजन सिलिंडर लदे थे। इस दौरान अस्पताल में सिलिंडर की डिलिवरी देने के लिए सड़क पर सिलिंडर उतारने के दौरान उसमें धमाका हो गया। इसमें दोनों लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। चंद्रभान दो भाइयों में सबसे छोटा था। सूचना के बाद अस्पताल पहुंची उसकी मां शांति देवी, बड़े भाई चंदिका प्रसाद व भाभी का रो-रोकर बुुरा हाल हो गया। वहीं दूसरी तरफ राजन पाल अपने घर का इकलौता पुत्र था। राजन के पिता राजकुमार पाल व मां सोनी देवी, बड़ी बहन ऋतु और छोटी बहन रानी का भी रो-रोकर बुरा हाल हो गया है। राजन की पत्नी नीलम भी बेटी सृष्टि(01) व बेटे श्रेयांश (02) मढ़िया स्थित मायके गई हुई थी। मौत के बाद पिता माता और पत्नी का रो-रो रोकर बुरा हाल था। दोनों बच्चों के समझ में कुछ नहीं आ रहा था बस मां का चेहरा देख रहे थे।
विज्ञापन
पिता की तेरहवीं भी नहीं बीत पाई, पति की मौत की खबर आई
कूढ़कला गांव निवासी चंद्रभानु (30) की पांच वर्ष पहले चकिया के सिकंदरपुर स्थित गायघाट निवासी परदेशी राम की पुत्री सीमा के साथ हुई थी। चंद्रभानु का दो वर्ष का पुत्र ओम (02) भी है। सीमा की पिता की मौत 20 दिसंबर को हुई थी। जिससे सीमा काफी दुखी थी। पिता की तेरहवीं एक जनवरी को थी। इसमें शामिल होने के लिए सीमा अपने मायके गई थी। पर अभी तेरहवीं पूरी बीत भी नहीं पाई थी कि सीमा को उसके पति के मौत की खबर मिल गई। इस निष्ठुर नियति को सुनकर हर कोई मर्माहत हो गया। सीमा पर दुखों का पहाड़ टूूटा है। आंसू रूकने के नाम नहीं ले रहे थे। वह रह-रहकर बेहोश हो जा रही थी। संवाद
विज्ञापन
राजन ने एक महीने पहले ही शुरू किया था सिलिंडर डिलिवरी का काम
राजन पाल ने एक माह पहले ही चंद्रभानु के साथ ऑक्सीजन सिलिंडर डिलवरी का काम शुरू किया था। उसके दोस्तों ने बताया कि राजन, फ्लिपकार्ट से जुड़ी कुरियर कंपनी ई-कार्ट में डिलवरी का कार्य करता था। वह घर का एकमात्र कमाऊ सदस्य था। पैसे कम होने के कारण घर का खर्च चला पाने में उसे परेशानी हो रही थी। जिसके बाद उसने एक माह पहले आक्सीजन सिलिंडर की डिलिवरी शुरू किया था।
अस्पताल के खंभे और घरों के चौखट तक उखड़ गए
रविनगर में अस्पताल के बाहर शुक्रवार को ऑक्सीजन सिलिंडर के सड़क पर गिरने से हुआ धमाका इतना अधिक तेज था कि आसपास के आधा दर्जन घरों के खिड़की और दरवाजे के शीशे टूट गए। पास की बड़ी बिल्डिंग का दरवाजा लॉक था। उसका चौखट और लॉक टूट गया। अस्पताल का खंभा उखड़ गया। अस्पताल में खड़ी कार और अन्य वाहनों के शीशे भी फूट गए। सिलिंडर के टुकड़े घटना स्थल से लगभग पांच सौ मीटर की दूरी पर जाकर गिरे। वहीं दूसरी तरफ सिलिंडर उतार रहे एक व्यक्ति के शरीर के चीथड़े लगभग 50 मीटर दूर तक लोगों के घरों में जाकर गिरे।
शुक्रवार की सुबह सबकुछ सामान्य दिनों की तरह चल रहा था। रविनगर व आसपास के क्षेत्र में सभी लोग अपने-अपने कार्यो में व्यस्त थे। तभी 09 बजकर 56 मिनट पर तेज धमाके की आवाज लोगों को सुनाई दी। धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि घटना स्थल से लगभग एक किलोमीटर परिधि में लोगों ने इसकी आवास सुनीं। इसके बाद जब लोगों ने घरों से बाहर निकल देखा तो उनके होश उड़ गये। पिकअप वाहन चालक व खलासी के शवों के चिथड़े उड़ गए थे। एक व्यक्ति के शव के टुकड़े आसपास से घरों में जाकर गिर थे।
‘हमार हीरा जइसन लाल कहां गइले’
ऑक्सीजन सिलिंडर ब्लास्ट के बाद चंद्रभानु की मां शांति का रो-रोकर बुरा हाल था। घटना की सूचना पर वह दौड़ते भागते अस्पताल तक पहुंच गई। तब तक चंद्रभानु का शव मर्चरी में भेजा जा चुका था। मां अस्पताल के बाहर ही गश खाकर गिर गई। होश में आई तो रोने लगी। बार-बार यही कह रही थी--‘हम सुबहे देखनी ह, हमार हीरा जइनसन लाइ कहां गइले, बतावा जा।’ वहीं राजन के पिता के आंसू रूकने का नाम नहीं ले रहे थे।
पहले भी हो चुकी है सिलिंडर ब्लास्ट की घटनाएं
जिले में पहले भी सिलिंडर फटने की घटनाएं हो चुकी हैं। 23 सितंबर 2020 को मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र के चंदासी स्थित इंडियन एयर गैस लिमिटेड फैक्ट्री में सिलिंडर में एसिटिलीन गैस भरने के दौरान विस्फोट हो गया था। उस आपरेटर समेत तीन लोग घायल हो गए थे। उस दौरान फैक्ट्री में कैल्शियम कार्बाइड से एसिटिलीन गैस बनाकर सिलिंडर में भरने का काम किया जा रहा था। वहीं 22 अगस्त 2021 को रामनगर थाना क्षेत्र के सूजाबाद स्थित पोलाव शहीद बाबा की मजार के पास मेले में गुब्बारे में हवा भरने वाला सिलिंडर में ब्लास्ट हो गया था। उस दौरान एक महिला सहित दो लोगों की मौत हो गई थी वहीं चार लोग घायल हो गए थे।
प्राणदायिनी एक पल में बन सकती है प्राणघातिनी
आक्सीजन सिलिंडर बरती गई थोड़ी से असावधानी बड़ी घटना का कारण बन सकती है। शुक्रवार को रविनगर में हुई घटना ने इसे साबित कर दिया है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी रमाशंकर तिवारी ने बताया कि
सिलिंडर में ऑक्सीजन बेहद तेज प्रेशर से भरी जाती है। ऐसे में लीकेज होने पर उसी प्रेशर से वह बाहर भी निकलती है। सिलेंडर में 2000 पीएसआई (पाउंड स्क्वायर इंच) की स्पीड से गैस भरी जाती है। लीकेज होने पर इतनी ही स्पीड से गैस बाहर भी निकलती है। लीकेज होने पर सिलेंडर भी उसी तरह रफ्तार से पीछे भागेगा, जिस तरह गुब्बारे से हवा निकलने पर वह पीछे भागता है। यह बेहद खतरनाक है। घर या प्लांट में आक्सीजन सिलिंडर में विस्फोट होने पर इमारत के ढहने का भी खतरा है। ऐसे में इसका इस्तेेमाल काफी सावधानी से करना चाहिए। ऑक्सीजन खत्म होने पर इसे बार-बार भरवाने के लिए रिफिल करना जरूरी होता है। यही वजह है कि इसमें रिसाव की संभावना होती है और किसी अनहोनी के चलते इसमें आग भी लग सकती है। इसके अलावा आक्सीजन सिलिंडर को हमेशा सीधे रखना चाहिए और उसमें क्लंप लगा हो । इसके साथ ही पांच साल में सिलिंडर की हाइड्रो टेस्टिंग भी जरूरी होती है।
तीन घन क्यूबिक मीटर का था ऑक्सीजन सिलिंडर
नगर में रविनगर में शुक्रवार हो ब्लास्ट हुआ आक्सीजन सिलिंडर तीन क्यूबिक मीटर की क्षमता का था। दरअसल अस्पतालों अधिकतर तीन व सात क्यूबिक मीटर सिलिंडर इस्तेमाल किये जाते है। सात क्यूबिक मीटर सिलिंडर का इस्तेमाल आक्सीजन प्लांट में किया जाता है जहां पाइप के माध्यम से बेड तक आक्सीजन की सप्लाई होती है। वहीं तीन क्यूबिक मीटर के सिलिंडर को आवश्कता पड़ने पर मरीके में बेड के पास ही ट्राली के माध्यम से लगाया जाता है। संवाद