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बेटी के डोली के बाद उठी प्रधान पद पर विजयी पिता की अर्थी

Tue, 04 May 2021 12:10 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 04 May 2021 12:10 AM IST
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After the daughter's doli, the father of the victorious prime minister rose.
धानापुर। विकास खंड़ अंतर्गत किशुनपुरा गांव में रविवार की देर रात घटी एक घटना ने सबको झकझोर कर रख दिया है। किशुनपुरा गांव के विरेंद्र उर्फ रामविलास यादव (53) की सबसे छोटी बेटी की शादी कल थी। बरात आने से पहले विरेंद्र की तबीयत खराब हो गई। उन्हें हॉस्टिपल में भर्ती कराया गया। वे कोमा में चले गए। पिता की तबीयत खराब होने से बड़े पापा ने बेटी का कन्यादान किया। भोर की बजाय रात को आठ बजे ही बेटी की विदाई हो गई। रात 12 बजे मतगणना में विरेंद्र को विजयी घोषित किया गया और रात के डेढ़ बजे उनकी मौत हो गई। बेटी की डोली के बाद पिता की अर्थी उठने की इस घटना से पूरा गांव शोक में डूूब गया ।
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किशुनपुरा गांव निवासी रामबिलास यादव इस बार पंचायत चुनाव में प्रधान पद के प्रत्याशी थे। उन्होंने पूरे-जोर शोर से चुनावी तैयारी की थी। इसी बीच उन्होंने बलुआ थानान्तर्गत बल्लीपुर निवासी सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष श्यामनारायण यादव के पुत्र विकास यादव से तीन बेटियों में सबसे छोटी पूनम की शादी तय कर दी। रविवार को पंचायत चुनाव की मतगणना शुरू हुई और संयोगवश कल ही उनके बेटी की भी शादी थी। बेटी की शादी होने की वजह से रामविलास पूरे दिन तैयारी में जुटे रहे। शाम तीन बजे के करीब उनकी तबीयत खराब हो गई। आनन-फानन में उन्हें निजी चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। जहां वे कोमा में चले गए। इधर बेटी की बरात तो आई पर पिता की तबीयत खराब होने से वैवाहिक कार्यक्रम तेजी से हुआ। पिता के अनुपस्थिति में पूनम के बड़े पापा डॉ रामअनुज यादव ने कन्यादान किया। शाम आठ बजे के करीब बेेटी की विदाई हो गई। इधर रामविलास बेहोश पड़े थे। रात बारह बजे मतगणना भी पूरी हो गई और उन्हें विजयी घोषित कर दिया गया। लेकिन यह बात वे सुन भी नहीं सके और रात डेढ़ बजे के करीब उनकी मृत्यु हो गई। कुछ देर बाद खुशी गम में बदल गई और गांव में मातम छा गया। विरेंद्र की तीन बेटियां और एक पुत्र हैं। जिस घर में कल शहनाई बजी, देर रात जिंदाबाद के नारे लगे, उसी घर में सुबह चीख-पुकार और मातम सुनाई दे रहा था। सुबह परिजनों ने उनका अंतिम संस्कार कर दिया।
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