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रात में कप्तान के बंगले पर पहुंचे मजदूर
Chandauli
Updated Wed, 23 May 2012 12:00 PM IST
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मुगलसराय। पुलिस कप्तान के आवास पर मंगलवार की देर शाम लगभग एक दर्जन की संख्या में पहुंचे मजदूरों को देख पुलिस कर्मियों में हड़कंप मच गया। जैसे ही मजदूरों के कप्तान के बंगले पर पहुंचने की खबर कोतवाल को लगी। इसके बाद मय फोर्स कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंचकर उन्हें अपने घेरे में ले लिया और कोतवाली ले आई। हालांकि बाद में पता चला कि चकरोड के विवाद को लेकर एक पक्ष द्वारा मारपीट किए जाने की फरियाद को लेकर वे कप्तान के बंगले पर पहुंचे थे। नक्सल प्रभावित इस जनपद में पुलिस कप्तान के बंगले की सुरक्षा को धता बताते हुए इतनी संख्या में मजदूरों के अंदर प्रवेश करने की यह पहली घटना है। नक्सल जिला होने की वजह से पुलिस कप्तान की सुरक्षा व्यवस्था शुरू से ही चुस्त दुरुस्त रही है। मजदूरों के आवास परिसर में प्रवेश करने को लेकर लोगों में तरह तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं। गौरतलब है कि चंदौली जिला वर्ष 1999 के बाद से नक्सल प्रभावित जिले के रूप में चर्चित रहा है। वैसे भी बिहार बार्डर होने की वजह से अपराधिक गतिविधियोें का यह जनपद शुरू से ही केंद्र रहा है। वर्ष 2004 में हिनौत कांड की नक्सली घटना के बाद से पुलिस कप्तान के आवास परिसर की सुरक्षा व्यवस्था तब बढ़ा दी गई थी और एक लाख के इनामी नक्सली संजय कोल के मारे जाने के बाद से तो पुलिस कप्तान की सुरक्षा व्यवस्था खास तौर पर पुख्ता हो गया था। तब से लेकर आज तक कप्तान से मिलने के लिए जाने वालों की जांच के बाद ही प्रवेश दिया जाता रहा है। जिले के नवागत पुलिस कप्तान अमित पाठक के आने के बाद आम फरियादियों के लिए भले ही उनके दरवाजे खुले हों लेकिन मंगलवार की रात में जिस तरह एक दर्जन की संख्या में मजदूरों को लेकर कुछ लोग आवास परिसर में पहुंचे वे कत्तई सुरक्षा मानक के अनुरूप नहीं देखा जा सकता है। यह बात दीगर रही कि कप्तान ने आवास में आए मजदूरों को फरियादी बताते हुए वापस कोतवाली भेज दिया लेकिन इसको लेकर पुलिस कर्मियों में हड़कंप तो मच ही गया था। पूछे जाने पर कप्तान ने बताया कि जमुनीपुर के पास चकरोड बनाने की बात को लेकर विवाद हुआ था। जिसमें कुछ लोग आए थे। इंस्पेक्टर को बुलाकर थाने भेज दिया।
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