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खुले आसमान के नीचे गुजर रही रात, बिगड़ रही छात्रों की सेहत
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खुले आसमान के नीचे गुजर रही रात, बिगड़ रही छात्रों की सेहत
बुलंदशहर/सिकंदराबाद। यूक्रेन में फंसे जिले के छात्र खुले आसमान के नीचे रात गुजारने के लिए मजबूर हो रहे हैं। उनकी सेहत भी बिगड़ने लगी है। कोई पोलैंड तो कोई रोमानिया के बॉर्डर पर फंसा है। उनके सामने खाने-पीने का भी संकट गहरा रहा है। यहां परिजनों की चिंता बढ़ती जा रही है। वहीं, मंगलवार को एक छात्र और सकुशल लौट आया। अब तक जिले के तीन छात्रों की वापसी हुई है।
यूक्रेन में फंसे सिकंदराबाद के मोहल्ला भाटियावाड़ा निवासी अनुराग सैनी, वैद्यवाड़ा निवासी मुकुल गोयल, बस स्टैंड निवासी आकाश सैनी छात्रों के लिए बनाए गए सेल्टर हाउस पहुंच गए हैं। फोन पर हुई बात में छात्र मुकुल गोयल ने बताया कि वह रोमानिया में बुखारेस्ट एयरपोर्ट के पास बने सेल्टर हाउस पहुंच गया है। घर वापसी के लिए फ्लाइट का इंतजार है। छात्र आकाश सैनी के पिता जयप्रकाश सैनी ने बताया कि आकाश रोमानिया में सेल्टर हाउस में पहुंच फ्लाइट का इंतजार कर रहा है। छात्र अनुराग सैनी के चाचा धनेश्वर सैनी ने बताया कि अनुराग कीव से ट्रेन द्वारा अपने साथियों के साथ स्लोवाकिया बॉर्डर पहुंच गया है। शीघ्र वह स्लोवाकिया में बने सेल्टर हाउस में पहुंच जाएगा। तीनों छात्रों के सुरक्षित यूक्रेन से दूसरे देशो में पहुंच जाने पर परिजनों ने राहत की सांस ली है।
छात्र हिमांक सिंह ने बताया कि सोमवार को हंगरी पहुंच गया है। छात्र प्रतीक वर्मा और कुनाल राजौरा ने बताया कि अभी यूक्रेन में ही फंसे हुए हैं। उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। छात्र आतिफ अहमद ने बताया कि यूक्रेन से निकलने के लिए जूझ रहा है। पैसे भी खत्म हो गए हैं। पेट भरने के लिए भी पूरा खाना और पानी नहीं मिल रहा है। डिबाई के शशांक सोनी ने दोपहर मेसेज कर परिजनों को बताया कि वह रोमानिया बॉडर से एयरपोर्ट के लिए रवाना हो गया है। यहां पर काफी ठंड पड़ रही हैै।
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छात्र तालिब अपने घर लौटा, परिजनों में खुशी
गुलावठी। यूक्रेन में फंसा गुलावठी के ग्राम आसिफाबाद चंद्रपुरा निवासी एमबीबीएस छात्र तालिब अली चौहान सकुशल घर आ गया है। उसकी घर वापसी से खुश परिजनों ने मंगलवार को गांव में मिठाइयां बांटी।
तालिब अली चौहान ने बताया कि वह यूक्रेन के इबानों से एमबीबीएस कर रहा है। इबानों में हमले शुरू हो गए थे। वह 25 फरवरी को इबानों से बस से बॉर्डर के लिए निकला था। आठ घंटे के सफर के बाद वह रोमानिया बॉर्डर पहुंचा। वहां से सोमवार देर शाम दिल्ली पहुंचा। जैसे ही वह परिजनों से मिला आंखों में आंसू छलक आए। दिल्ली से घर आने पर उससे मिलने वालों का गांव में तांता लगा हुआ है। तालिब के पिता शाहिद अली ने कहा कि भारत सरकार के कारण ही तालिब घर लौटा है। तालिब ने बताया कि बस ने उन्हें बॉर्डर से करीब 15 किलोमीटर दूर ही उतार दिया था। बाकी रास्ते का सफर कड़ाके की ठंड में पैदल ही पूरा किया। बॉर्डर पर करीब 1500 छात्र थे। काफी मशक्कत के बाद रोमानिया पहुंचे। रोमानिया में लोगों ने उन्हें नि:शुल्क भोजन व पानी दिया। रोमानिया के लोग शिविर लगाकर देश के छात्रों की मदद कर रहे हैं। यूक्रेन में डर और तबाही का मंजर है।
ऑनलाइन पढ़ाई का इंतजार, शांति होने पर जाएंगे वापस
बुलंदशहर। यूक्रेन से वापस लौटे डीएम रोड निवासी मोहम्मद जैद और स्याना क्षेत्र के गांव बिगरऊ निवासी छात्रा खुशी ने कहना है कि उन्हें ऑनलाइन पढ़ाई का इंतजार है। इसके लिए समय दिया गया है। शांति होने पर वापस यूक्रेन पहुंचकर अपनी पढ़ाई शुरू करेंगे।
मोहम्मद जैद बताया कि वह दिसंबर में गया था। उसका पहला साल है। खुशी ने बताया कि वह एमबीबीएस द्वितीय वर्ष की छात्रा है। वापस लौटने कि लिए कई तरह की समस्याओं का सामना भी करना पड़ा। बैच के कई साथी अभी भी पोलैंड और रोमानिया बॉर्डर पर फंसे हुए हैं। तालिब अली चौहान का कहना है कि हो सकता है कि फिर यूक्रेन न जाऊं। परिस्थितियां देखकर आगे का निर्णय लिया जाएगा।
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बुलंदशहर/सिकंदराबाद। यूक्रेन में फंसे जिले के छात्र खुले आसमान के नीचे रात गुजारने के लिए मजबूर हो रहे हैं। उनकी सेहत भी बिगड़ने लगी है। कोई पोलैंड तो कोई रोमानिया के बॉर्डर पर फंसा है। उनके सामने खाने-पीने का भी संकट गहरा रहा है। यहां परिजनों की चिंता बढ़ती जा रही है। वहीं, मंगलवार को एक छात्र और सकुशल लौट आया। अब तक जिले के तीन छात्रों की वापसी हुई है।
यूक्रेन में फंसे सिकंदराबाद के मोहल्ला भाटियावाड़ा निवासी अनुराग सैनी, वैद्यवाड़ा निवासी मुकुल गोयल, बस स्टैंड निवासी आकाश सैनी छात्रों के लिए बनाए गए सेल्टर हाउस पहुंच गए हैं। फोन पर हुई बात में छात्र मुकुल गोयल ने बताया कि वह रोमानिया में बुखारेस्ट एयरपोर्ट के पास बने सेल्टर हाउस पहुंच गया है। घर वापसी के लिए फ्लाइट का इंतजार है। छात्र आकाश सैनी के पिता जयप्रकाश सैनी ने बताया कि आकाश रोमानिया में सेल्टर हाउस में पहुंच फ्लाइट का इंतजार कर रहा है। छात्र अनुराग सैनी के चाचा धनेश्वर सैनी ने बताया कि अनुराग कीव से ट्रेन द्वारा अपने साथियों के साथ स्लोवाकिया बॉर्डर पहुंच गया है। शीघ्र वह स्लोवाकिया में बने सेल्टर हाउस में पहुंच जाएगा। तीनों छात्रों के सुरक्षित यूक्रेन से दूसरे देशो में पहुंच जाने पर परिजनों ने राहत की सांस ली है।
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छात्र हिमांक सिंह ने बताया कि सोमवार को हंगरी पहुंच गया है। छात्र प्रतीक वर्मा और कुनाल राजौरा ने बताया कि अभी यूक्रेन में ही फंसे हुए हैं। उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। छात्र आतिफ अहमद ने बताया कि यूक्रेन से निकलने के लिए जूझ रहा है। पैसे भी खत्म हो गए हैं। पेट भरने के लिए भी पूरा खाना और पानी नहीं मिल रहा है। डिबाई के शशांक सोनी ने दोपहर मेसेज कर परिजनों को बताया कि वह रोमानिया बॉडर से एयरपोर्ट के लिए रवाना हो गया है। यहां पर काफी ठंड पड़ रही हैै।
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छात्र तालिब अपने घर लौटा, परिजनों में खुशी
गुलावठी। यूक्रेन में फंसा गुलावठी के ग्राम आसिफाबाद चंद्रपुरा निवासी एमबीबीएस छात्र तालिब अली चौहान सकुशल घर आ गया है। उसकी घर वापसी से खुश परिजनों ने मंगलवार को गांव में मिठाइयां बांटी।
तालिब अली चौहान ने बताया कि वह यूक्रेन के इबानों से एमबीबीएस कर रहा है। इबानों में हमले शुरू हो गए थे। वह 25 फरवरी को इबानों से बस से बॉर्डर के लिए निकला था। आठ घंटे के सफर के बाद वह रोमानिया बॉर्डर पहुंचा। वहां से सोमवार देर शाम दिल्ली पहुंचा। जैसे ही वह परिजनों से मिला आंखों में आंसू छलक आए। दिल्ली से घर आने पर उससे मिलने वालों का गांव में तांता लगा हुआ है। तालिब के पिता शाहिद अली ने कहा कि भारत सरकार के कारण ही तालिब घर लौटा है। तालिब ने बताया कि बस ने उन्हें बॉर्डर से करीब 15 किलोमीटर दूर ही उतार दिया था। बाकी रास्ते का सफर कड़ाके की ठंड में पैदल ही पूरा किया। बॉर्डर पर करीब 1500 छात्र थे। काफी मशक्कत के बाद रोमानिया पहुंचे। रोमानिया में लोगों ने उन्हें नि:शुल्क भोजन व पानी दिया। रोमानिया के लोग शिविर लगाकर देश के छात्रों की मदद कर रहे हैं। यूक्रेन में डर और तबाही का मंजर है।
ऑनलाइन पढ़ाई का इंतजार, शांति होने पर जाएंगे वापस
बुलंदशहर। यूक्रेन से वापस लौटे डीएम रोड निवासी मोहम्मद जैद और स्याना क्षेत्र के गांव बिगरऊ निवासी छात्रा खुशी ने कहना है कि उन्हें ऑनलाइन पढ़ाई का इंतजार है। इसके लिए समय दिया गया है। शांति होने पर वापस यूक्रेन पहुंचकर अपनी पढ़ाई शुरू करेंगे।
मोहम्मद जैद बताया कि वह दिसंबर में गया था। उसका पहला साल है। खुशी ने बताया कि वह एमबीबीएस द्वितीय वर्ष की छात्रा है। वापस लौटने कि लिए कई तरह की समस्याओं का सामना भी करना पड़ा। बैच के कई साथी अभी भी पोलैंड और रोमानिया बॉर्डर पर फंसे हुए हैं। तालिब अली चौहान का कहना है कि हो सकता है कि फिर यूक्रेन न जाऊं। परिस्थितियां देखकर आगे का निर्णय लिया जाएगा।