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200 करोड़ की बंदरबांट पर कोर्ट हुआ सख्त
अमर उजाला ब्यूरो/बुलंदशहर
Updated Mon, 05 Sep 2016 10:44 PM IST
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कोर्ट
- फोटो : ब्यूरो
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मुआवजे की आड़ में 200 करोड़ की बंदरबांट पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। कोर्ट ने यूपी के चीफ सेक्रेटरी से समिति गठित कर मुआवजा वितरण मामले की जांच कराने का आदेश दिया है।
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1993 में यूपीएसआईडीसी ने अरनिया क्षेत्र में 1204 एकड़ भृूमि का अधिग्रहण औद्योगिक विकास के लिए किया था। क्षेत्र में औद्योगिक विकास करने के बजाय यूपीएसआईडीसी ने टीएचडीसी को जमीन बेच दी। टीएचडीसी इस जमीन पर 1360 मेगावाट पावर क्षमता का थर्मल पावर प्लांट बना रहा है।
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मुआवजा दर कम थी, इसलिए किसानों ने अधिग्रहण के बाद सरकारी मशीनरी को भूमि पर कब्जा नहीं करने दिया था। खास बात यह है कि जमीन पर कब्जा लेने के बजाय प्रशासन ने किसानों को 200 करोड़ रुपये निर्धारित मुआवजे से अलग बांट दिए।
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दो बार मुआवजा वितरण पर कोर्ट ने संज्ञान लिया और प्रकरण की जांच कराने का आदेश मुख्य सचिव को दिया। एडीएम प्रशासन अरविंद कुमार मिश्र ने बताया कि कोर्ट ने चीफ सेक्रेटरी से समिति बनाकर जांच कराने को कहा है। शासन स्तर से जांच कमेटी का गठन किया जाएगा।