फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bulandshahar News ›   The banks of the Ganga at Ahar will prove beneficial for turtles; a hatchery will be set up.

Bulandshahar News: कछुआ के लिए मुफीद बनेगा अहार का गंगा किनारा, बनेगी हैचरी

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 07 Jun 2026 10:42 PM IST
विज्ञापन
The banks of the Ganga at Ahar will prove beneficial for turtles; a hatchery will be set up.
अहार क्षेत्र से होकर गुजर रही गंगा नदी। संवाद
बुलंदशहर। वन विभाग ने कछुआ प्रजाति को संरक्षित रखने की दिशा में पहल शुरू की है। कछुआ के लिए अहार का गंगा किनारा मुफीद बनेगा। यहां कछुआ की प्रजाति को बढ़ाने के लिए हैचरी बनाई जाएगी। इसके लिए वन विभाग की ओर से शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। इस पर जल्द ही स्वीकृति मिलने की आस है।
विज्ञापन

डीएफओ डॉ. हरेंद्र सिंह ने बताया कि कछुआ प्रजाति बचाने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं। कछुआ संरक्षण के लिए ्शासन की ओर से कई पहल शुरू हो रही है। इसके चलते वन विभाग और वर्ल्ड वाइल्ड फॉरेस्ट (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) ने कछुआ प्रजाति को संरक्षित रखने की दिशा में कई अहम कदम उठाए हैं। कछुआ प्रजाति की संख्या बढ़ाने के लिए अहार क्षेत्र में गंगा किनारे को चिह्नित किया गया है। यहां पर हैचरी बनाई जाएगी। इस हैचरी में कछुआ के अंडे रखकर वहां पर कछुआ को जन्म देने के बाद उनकी संख्या बढ़ाने और संरक्षण करने का काम किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि जल्द ही हैचरी बनकर तैयार हो जाएगी और उसमें अंडे रख दिए जाएंगे। इस क्षेत्र में जन्म लेने वाले कछुआ के संरक्षण और उनकी देखरेख के भी व्यापक इंतजाम किए जाएंगे। इसके लिए शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। संभावना है कि जल्द ही इस पर स्वीकृति मिल जाएगी। स्वीकृति मिलते ही हैचरी का निर्माण करा दिया जाएगा। हैचरी में थ्री-स्ट्राइप्ड रूफ्ड टर्टल, इंडियन टेंट टर्टल व ब्राउन रूफ्ड टर्टल के अलावा रेड-क्राउन्ड रूफ्ड टर्टल दुर्लभ प्रजाति के कछुआ का संरक्षण और प्रजनन किया जाएगा। इसमें वर्ल्ड वाइल्ड फोरेस्ट (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) का भी विशेष सहयोग रहेगा। उन्होंने बताया कि अभी तक हस्तिनापुर स्थित हैचरी से ही गंगा में छोड़े जाने वाले कछुआ मंगवाए जाते हैं। अहार में हैचरी बनने के बाद फिर हस्तिनापुर से कछुआ मंगवाने की जरूरत नहीं रहेगी।
विज्ञापन

गंगा किनारे से एकत्रित किए जाएंगे अंडे
डीएफओ डॉ. हरेंद्र सिंह के अनुसार कछुए गंगा नदी के तट पर रेत में घोंसला बनाकर अंडे देते हैं। गंगा नदी के बहाव का क्षेत्र हर साल बदल जाता है। जहां गंगा का पानी नहीं होता, वहां पर किसान खेती करने लगते हैं। इस जमीन की जुताई करने, खेतों में फसल को पानी देने व कीटनाशक का प्रयोग करने से अंडे नष्ट होते हैं। किसान भी अंडों को फेंक देते हैं। ऐसे ही हर साल हजारों अंडे बर्बाद हो जाते हैं और कछुओं संख्या अपेक्षाकृत नहीं बढ़ती है। अहार में हैचरी बनने के बाद जहां भी अंडे मिलेंगे उन्हें वन विभाग के कर्मचारी एकत्रित करेंगे। इन अंडों को हैचरी में मानव निर्मित घोंसलों में रखा जाएगा। घोंसलों को सुरक्षित स्थान पर बनाया जाएगा। अंडों से कछुओं के बाहर आने के बाद इन्हें गंगा की धारा में छोड़ दिया जाएगा। बताया कि कछुए नवंबर से अप्रैल तक अंडे देते हैं। घोंसला बनाकर अंडा देते समय वे तापमान का ध्यान रखते हैं। कछुए घोंसले में अंडे की लेयर बनाते हैं। सबसे ऊपर की लेयर से बच्चे सबसे पहले निकलते हैं। कछुआ अंडे देने के बाद घोंसले के बाद फिर नहीं आता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed