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Bulandshahar News: 83 करोड़ की परियोजना 50 करोड़ के बांध पर निर्भर
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ऊंचागांव। क्षेत्र के माली की मढैया से अमरोहा को जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी गंगा नदी पर पुल निर्माण परियोजना एक बार फिर अधर में लटक गई है। करीब 83.18 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 1062.65 मीटर लंबे इस पुल को जनवरी 2022 में शुरू होकर मात्र 18 माह में पूरा होना था लेकिन अब इसकी संभावित लोकार्पण तिथि जून 2026 तक खिंचती नजर आ रही है।
परियोजना को पहले घटिया सामग्री के प्रयोग और निर्माण एजेंसी की लापरवाही का दंश झेलना पड़ा, जिसमें तीन बीम भरभराकर गिर गए थे। अब निर्माण के लिए लगाए गए अस्थायी पुल के पास गंगा नदी के तेज कटाव ने एप्रोच रोड को निगलना शुरू कर दिया है, जिसके चलते सेतु निगम को काम रोकने के लिए मजबूर होना पड़ा है। अब शासन को बांध बनाने के लिए 50 करोड़ रुपये का नया प्रस्ताव भेजा गया है, जिस पर मंजूरी मिलना बाकी है।
माजरा माली मढैया गंगा घाट पर पुल निर्माण की प्रक्रिया विवादों से भरी रही है। वर्ष 2021 में शासन ने इस परियोजना को स्वीकृति दी थी। जनवरी 2022 में निर्माण कार्य शुरू हुआ और 18 महीने में पूरा होने का लक्ष्य रखा गया था। पुल के दोनों ओर दो-दो सौ मीटर की एप्रोच रोड भी बनाई जानी थी लेकिन 29 मार्च 2024 की रात उस वक्त निर्माण की पोल खुल गई, जब कार्यदायी संस्था द्वारा बीम डालने का कार्य चल रहा था और अचानक तीन बीम भरभराकर गिर गए।
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इस बड़ी दुर्घटना ने बुलंदशहर से लेकर लखनऊ तक हड़कंप मचा दिया था। तुरंत शासन ने उच्च स्तरीय जांच टीम गठित की, जिसकी रिपोर्ट में घटिया सामग्री के प्रयोग और निर्माण में घोर लापरवाही का खुलासा हुआ था। जांच के नतीजों के बाद एडिकोन कंपनी के ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया और उसे 3 साल के लिए ब्लैक लिस्ट कर दिया गया।
इसके अलावा, पुल निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी कर रहे कई अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गाज गिरी थी। इस पूरी प्रक्रिया के चलते करीब छह महीने तक निर्माण कार्य पूरी तरह बंद रहा, जिससे परियोजना निर्धारित समय से कई महीने पीछे हो गई। बारिश के बाद जब दोबारा काम शुरू हुआ, तो स्थानीय लोगों में मार्च 2025 तक पुल की सौगात मिलने की उम्मीद जगी थी। निर्माण एजेंसी ने तेजी दिखाई और 1062.65 मीटर लंबा पुल का कार्य काफी हद तक पूर्ण भी कर लिया गया था लेकिन अब नई समस्या सामने आ गई है। ठेकेदार ने गंगा में अस्थायी पुल के जो पिलर बनाए थे, उनके पास सिल्ट और मानसून के तेज बहाव के कारण गंगा नदी ने एप्रोच रोड की ओर करीब तीन सौ मीटर तक भयानक कटान शुरू कर दिया है।
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परियोजना को पहले घटिया सामग्री के प्रयोग और निर्माण एजेंसी की लापरवाही का दंश झेलना पड़ा, जिसमें तीन बीम भरभराकर गिर गए थे। अब निर्माण के लिए लगाए गए अस्थायी पुल के पास गंगा नदी के तेज कटाव ने एप्रोच रोड को निगलना शुरू कर दिया है, जिसके चलते सेतु निगम को काम रोकने के लिए मजबूर होना पड़ा है। अब शासन को बांध बनाने के लिए 50 करोड़ रुपये का नया प्रस्ताव भेजा गया है, जिस पर मंजूरी मिलना बाकी है।
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माजरा माली मढैया गंगा घाट पर पुल निर्माण की प्रक्रिया विवादों से भरी रही है। वर्ष 2021 में शासन ने इस परियोजना को स्वीकृति दी थी। जनवरी 2022 में निर्माण कार्य शुरू हुआ और 18 महीने में पूरा होने का लक्ष्य रखा गया था। पुल के दोनों ओर दो-दो सौ मीटर की एप्रोच रोड भी बनाई जानी थी लेकिन 29 मार्च 2024 की रात उस वक्त निर्माण की पोल खुल गई, जब कार्यदायी संस्था द्वारा बीम डालने का कार्य चल रहा था और अचानक तीन बीम भरभराकर गिर गए।
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इस बड़ी दुर्घटना ने बुलंदशहर से लेकर लखनऊ तक हड़कंप मचा दिया था। तुरंत शासन ने उच्च स्तरीय जांच टीम गठित की, जिसकी रिपोर्ट में घटिया सामग्री के प्रयोग और निर्माण में घोर लापरवाही का खुलासा हुआ था। जांच के नतीजों के बाद एडिकोन कंपनी के ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया और उसे 3 साल के लिए ब्लैक लिस्ट कर दिया गया।
इसके अलावा, पुल निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी कर रहे कई अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गाज गिरी थी। इस पूरी प्रक्रिया के चलते करीब छह महीने तक निर्माण कार्य पूरी तरह बंद रहा, जिससे परियोजना निर्धारित समय से कई महीने पीछे हो गई। बारिश के बाद जब दोबारा काम शुरू हुआ, तो स्थानीय लोगों में मार्च 2025 तक पुल की सौगात मिलने की उम्मीद जगी थी। निर्माण एजेंसी ने तेजी दिखाई और 1062.65 मीटर लंबा पुल का कार्य काफी हद तक पूर्ण भी कर लिया गया था लेकिन अब नई समस्या सामने आ गई है। ठेकेदार ने गंगा में अस्थायी पुल के जो पिलर बनाए थे, उनके पास सिल्ट और मानसून के तेज बहाव के कारण गंगा नदी ने एप्रोच रोड की ओर करीब तीन सौ मीटर तक भयानक कटान शुरू कर दिया है।