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2500 बच्चों को पढ़ा रहे सात शिक्षक
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
Updated Sun, 01 May 2016 12:52 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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जनता इंटर कॉलेज शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है। हालात यह हैं कि कॉलेज के 2478 बच्चों को महज सात शिक्षक पढ़ा रहे हैं। इनमें भी गणित और विज्ञान के शिक्षकों का टोटा है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
जनता इंटर कॉलेज कस्बे का एकमात्र कॉलेज है। ऐसे में क्षेत्र के ज्यादातर बच्चे यहीं दाखिला लेते हैं। पिछले कई वर्षों से यहां शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई सुचारु नहीं हो पा रही है। कॉलेज के स्तर पर पढ़ाई सुचारु रखने के लिए प्राइवेट शिक्षक रखे जाते हैं लेकिन अभिभावकों के विरोध के चलते यह व्यवस्था भी डगमगा जाती है
कॉलेज के प्रधानाचार्य अयाज अहमद खान ने बताया कि कॉलेज में कुल 15 सेक्शन हैं। इनमें कुल 2478 बच्चे पढ़ाई करते हैं। नियम के अनुसार कॉलेज में 22 शिक्षक होने चाहिए लेकिन वर्तमान में कॉलेज में मात्र नौ शिक्षक ही हैं। इनमें से दो शिक्षक मेडिकल लीव पर हैं। ऐसे में मात्र सात शिक्षकों के कंधों पर 15 सेक्शन का भार है।
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इनमें भी विज्ञान और गणित के शिक्षकों का पूरी तरह से टोटा है। नतीजतन, गणित और विज्ञान की पढ़ाई सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है। जैसे-तैसे कर विद्यार्थियों को मैनेज किया जा रहा है। यदि सारे शिक्षक पूरे समय भी लगे रहें तो कई सेक्शन पढ़ाई से वंचित रह जाते हैं।
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जनता इंटर कॉलेज कस्बे का एकमात्र कॉलेज है। ऐसे में क्षेत्र के ज्यादातर बच्चे यहीं दाखिला लेते हैं। पिछले कई वर्षों से यहां शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई सुचारु नहीं हो पा रही है। कॉलेज के स्तर पर पढ़ाई सुचारु रखने के लिए प्राइवेट शिक्षक रखे जाते हैं लेकिन अभिभावकों के विरोध के चलते यह व्यवस्था भी डगमगा जाती है
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कॉलेज के प्रधानाचार्य अयाज अहमद खान ने बताया कि कॉलेज में कुल 15 सेक्शन हैं। इनमें कुल 2478 बच्चे पढ़ाई करते हैं। नियम के अनुसार कॉलेज में 22 शिक्षक होने चाहिए लेकिन वर्तमान में कॉलेज में मात्र नौ शिक्षक ही हैं। इनमें से दो शिक्षक मेडिकल लीव पर हैं। ऐसे में मात्र सात शिक्षकों के कंधों पर 15 सेक्शन का भार है।
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इनमें भी विज्ञान और गणित के शिक्षकों का पूरी तरह से टोटा है। नतीजतन, गणित और विज्ञान की पढ़ाई सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है। जैसे-तैसे कर विद्यार्थियों को मैनेज किया जा रहा है। यदि सारे शिक्षक पूरे समय भी लगे रहें तो कई सेक्शन पढ़ाई से वंचित रह जाते हैं।