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डेंगू से आरपीएफ के सिपाही की मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
Updated Sat, 03 Sep 2016 11:44 PM IST
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डेंगू
- फोटो : अमर उजाला
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जनपद में डेंगू के डंक से शनिवार को एक आरपीएफ के सिपाही की मौत हो गई। इसके अलावा ककोड़ क्षेत्र में एक महिला ने बुखार से दम तोड़ दिया है। जनपद में दो मौतों के बाद बुखार से मरने वालों का आंकड़ा अब 36 पहुंच गया है।
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जहांगीराबाद क्षेत्र के गांव खालौर निवासी मनोज पुत्र तेजपाल सिंह आरपीएफ में सिपाही थे। वह लखनऊ में तैनात थे। ग्राम प्रधान पुत्र दीपक खालौर ने बताया कि मनोज पिछले 8-10 दिन से बुखार से पीड़ित थे। उन्हें बुलंदशहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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यहां जांच में डेंगू की पुष्टि हुई थी, जिसके बाद उसे हायर मेडिकल सेंटर मेरठ रेफर कर दिया गया था। मेरठ में उपचार के दौरान शनिवार को मनोज ने दम तोड़ दिया। डेंगू से सिपाही की मौत के बाद स्वास्थ्य अफसरों में हड़कंप मच गया है। हालांकि, अभी कोई भी स्वास्थ्य अफसर डेंगू की पुष्टि नहीं कर रहा है।
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इसके अलावा थाना ककोड़ के गांव भवरा निवासी अनारदेयी पत्नी राजन की बुखार से मौत हो गई। वह कई दिनों से बुखार से पीड़ित थीं। वहीं, स्वास्थ्य अफसरों ने बुखार से महिला की मौत पर अनभिज्ञता जताई है।
मौत के आंकड़ों में खेल कर रहे अफसर
बुलंदशहर (ब्यूरो)। जिले में एक के बाद एक बुखार से मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। अब तक 36 लोगों की मौत हो चुकी है। हजारों लोग बुखार की चपेट में आ चुके हैं, लेकिन अफसर आंकड़ों में खेल करने में जुटे हैं। डेंगू, मलेरिया के आंकड़ों में खेल करने में माहिर स्वास्थ्य विभाग के अफसर बड़े पैमाने पर हेराफेरी कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों और निजी अस्पतालों के आंकड़ों में जमीन-आसमान का अंतर आ रहा है। स्वास्थ्य अफसरों को कार्रवाई के डर से मलेरिया और डेंगू दिखाई ही नहीं देता। मरीजों का उपचार भी सामान्य बुखार के तहत कर दिया जाता है।
सरकारी अस्पतालों में नहीं हैं इंतजाम
बुखार के मरीज बढ़ रहे हैं, लेकिन सरकारी अस्पतालों में कोई इंतजाम नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के अफसर बुखार पर पिछले वर्ष मचे कोहराम से भी सबक लेने को तैयार नहीं है। बुखार से जनपद में 36 मौत हो चुकी हैं। संक्रमण तेजी से फैल रहा है। गांव-गांव में हर घर से कोई न कोई बुखार से पीड़ित है।
बुखार अपना प्रकोप दिखाने लगा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के मुखिया अभी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। वहीं, सीएमओ डॉ. दीपक ओहरी का कहना है कि बुखार पर नियंत्रण के लिए पहले ही टीमें गठित कर दी गई हैं। गांव-गांवों मेें मेडिकल टीम भेजी जा रही हैं। सभी प्रभारियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं। कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पैसा डकार रहे हैं एएनएम-प्रधान
कीटनाशक दवाओं का पैसा एएनएम और प्रधान डकार रहे हैं तो ग्रामीण जानलेवा बुखार की चपेट में आ रहे हैं। हर साल प्रत्येक गांव में कीटनाशक दवाओं के छिड़काव के लिए प्रधान-एएनएम के खाते में 10-10 हजार रुपये आते हैं। पहली किश्त 3300-3300 की आ चुकी है, लेकिन यह पैसा प्रधान और एएनएम डकार जाते हैं।
बुखार से मौतों के बाद स्वास्थ्य महकमा और प्रशासन हरकत में आता है। न तो एएनएम के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है और न प्रधान के खिलाफ। हर साल करीब 90 लाख रुपये कीटनाशक दवाओं के छिड़काव के नाम पर डकार लिया जाता है।
जवान की मौत किस कारण से हुई है, इसकी जांच कराई जा रही है। जब तक सभी जांच रिपोर्ट नहीं देखी जाती, तब तक डेंगू की पुष्टि नहीं कर सकते। गांव में टीम भेजकर जांच कराई जाएगी। - डॉ. दीपक ओहरी, सीएमओ