फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bulandshahar News ›   RLD Titans can upset the equation

रालोद के महारथी बिगाड़ सकते हैं समीकरण

Fri, 20 Jan 2017 12:17 AM IST
शशि कुमार श्रीवास्तव, बुलंदशहर
शशि कुमार श्रीवास्तव, बुलंदशहर Updated Fri, 20 Jan 2017 12:17 AM IST
विज्ञापन
RLD Titans can upset the equation
रालोद - फोटो : अमर उजाला

विज्ञापन

मिशन यूपी फतह करने के प्रयास में जुटे सभी दलों को जिले के बिगड़ते समीकरण से झटका लग सकता है। विधायक बंधुओं के रालोद से चुनाव लड़ने पर बुलंदशहर और शिकारपुर सीट पर समीकरण बदल जाएंगे। ब्राह्मण और जाट मतदाता बंट सकते हैं। खुर्जा और सिकंदराबाद में भी मुकाबला रोचक हो सकता है।

जिले के राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। भाजपा से मायूसी हाथ लगने के बाद विधायक बंधुओं ने रालोद का दामन थाम लिया। माना जा रहा है कि गुड्डू पंडित बुलंदशहर और मुकेश पंडित शिकारपुर से चुनाव लड़ेगे। ऐसी स्थिति में इस सीट पर मुकाबला बेहद रोचक हो जाएगा। शिकारपुर सीट पर सबसे ज्यादा ब्राह्मण 45 हजार और जाट मतदाता 42 हजार हैं।
विज्ञापन


मुकेश पंडित के मैदान में उतरने से यह वोट बैंक बंट जाएगा। इसके अलावा बुलंदशहर सीट पर करीब 35 हजार जाट वोट है। भाजपा ने इस सीट पर जाट प्रत्याशी वीरेंद्र सिंह सिरोही को मैदान में उतारा है। वह पिछले चुनाव में छह हजार वोट हारे थे। जबकि उस समय राक्रांपा भाजपा के विरोध में थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस साल बुलंदशहर से गुड्डू पंडित को टिकट मिलने पर जाट वोट बैंक में लग सकती है, जिससे मुकाबला रोचक हो जाएगा। इसके अलावा सिकंदराबाद सीट पर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष आशा यादव के रालोद से चुनाव लड़ने पर भी विधानसभा का समीकरण पूरा  पलट जाएगा।

 सिकंदराबाद सीट पर करीब 30 हजार जाट और 32 हजार यादव वोट हैं। यदि यादव वोट में सेंध लगी तो मुकाबला कांटे का होगा। वहीं खुर्जा के पूर्व बसपा प्रत्याशी रहे मनोज गौतम के रालोद से चुनाव लड़ने से भी यहां भी समीकरण गड़बड़ाएंगे। रालोद के टिकट पर मनोज गौतम के चुनाव लड़ने से जाट वोट बंट सकता है।

अपने गढ़ में वापसी की बाट जोह रही रालोद
कभी पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के गढ़ रहे जनपद में लगातार पिछड़ती जा रही रालोद पार्टी वापसी की बाट जोह रही  है। कांग्रेस की लहर में भी चौधरी चरण सिंह की पार्टी जिले की कई-कई सीटों पर चुनाव जीतती रही, लेकिन 1985 के बाद से खाता भी नहीं खोल पाई है। लोकदल के विधायक के तौर पर 1985 में बाबू त्रिलोक चंद्र और किरनपाल सिंह अंतिम बार चुने गए।

आजादी के बाद 1952 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में सभी सीट कांग्रेस को मिली थीं। 1957 के चुनाव में चौधरी चरण सिंह की प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से जेवर पर गोपाली, बुलंदशहर पर चौधरी रघुराज सिंह और खुर्जा पर छत्तर सिंह को जीत मिली थी। 1962 के विधानसभा चुनाव में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से स्याना पर मुमताज मोहम्मद खान जीते थे।

1967 के चुनाव में जेवर से हरी सिंह और स्याना से स्वामी नेमपाल सिंह जीते। 1969 के मध्यावधि चुनाव में चौधरी चरण सिंह की भारतीय क्रांति दल के बैनर तले जेवर से धर्म सिंह, छतारी से त्रिलोक चंद्र, खुर्जा से रघुराज सिंह चुनाव जीते। 1974 के चुनाव में अगौता से विक्रम सिंह, अनूपशहर से खचेड़ू सिंह मौहरिया जीते।


1977  में खुर्जा से मोहन लाल पिप्पल और बुलंदशहर से महमूद हसन खान चुनाव जीते। 1977 के मध्यावधि विधानसभा चुनाव में गैर कांग्रेसी दलों को मिलाकर जनता पार्टी बनाई गई, जिसने जिले की सभी 10 विधानसभा सीटें जीत लीं। 1980  में चौधरी चरण सिंह की जनता (सेक्यूलर) ने दोनों सीटें जीतीं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed