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Bulandshahar News: ब्राजील में फंसे प्रोफेसर की चार साल बाद हुई वतन वापसी
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिकंदराबाद। पिछले चार सालों से ब्राजील की राजधानी ब्राजीलिया में फंसे तहसील क्षेत्र के गांव नगला काला निवासी प्रोफेसर महेशचंद नौकरी छोड़कर बृहस्पतिवार को अपने वतन लौट आए। मामले को मीडिया द्वारा उठाए जाने पर भारत सरकार ने संज्ञान लिया था। भारत सरकार के दखल के बाद प्रोेफेसर महेशचंद अपनों के बीच लौट सके। पत्नी और परिजन में खुशी का माहौल है।
तहसील क्षेत्र के गांव नगला काला निवासी प्रोफेसर डॉ. महेशचंद ने बताया कि नई दिल्ली राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला से पीएचडी करने के बाद वह दिल्ली विश्वविद्यालय के भास्कराचार्य कॉलेज में पढ़ाने लगे थे। इस दौरान ब्राजीलिया फेडरेशन विश्वविद्यालय से विजिट पर आए प्रोफेसर जीरोम डिपेरोट ने अच्छे वेतन पर अपने विश्वविद्यालय में नौकरी के लिए उन्हें अपने विश्वविद्यालय में विजिटिंग प्रोफेसर की नौकरी का विज्ञापन उन्हें ईमेल किया। जिसमें करीब 5780 ब्राजीलियन रियाल वेतन था। इतने कम वेतन पर उन्होंने जाने से इन्कार कर दिया।
बाद में उन्हें 15806 ब्राजीलियन रियाल वेतन देने का मेल भेजा गया। 4 अप्रैल 2019 में वह यूनिवर्सिटी ऑफ ब्राजीलिया चले गए। 11 अप्रैल 2019 को उन्होंने विश्वविद्यालय के साथ 16199 ब्राजिलियन रियाल के वेतन के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। पांच महीने तक उन्हें वेतन नहीं दिया गया। वेतन दिए जाने के लिए बार-बार विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रोफेसर से संपर्क किया, लेकिन मामले का कोई हल नहीं निकला। विश्वविद्यालय प्रशासन उन्हें बताया कि विज्ञापन के अनुसार 5780 ब्राजीलियन रियाल का वेतन दिया जाएगा। तभी से वह कम वेतन पर काम कर रहे थे। अनुबंध के अनुसार वेतन दिए जाने की मांग को लेकर उन्होंने भारतीय दूतावास में भी संपर्क किया, लेकिन उन्हें कोई मदद नहीं मिली। जिसके बाद उन्होंने कोर्ट में इस संबंध में याचिका दायर की। डॉ. महेश ने आरोप लगाया कि पिछले चार साल से विश्वविद्यालय द्वारा उनका शोषण किया जा रहा था, जिसके चलते वह मानसिक तनाव में आए गए। भारत वापस पहुंचे प्रोफेसर महेश ने बताया कि ब्राजीलिया विश्वविद्यालय द्वारा 4 साल में अनुबंध के आधार पर वेतन नहीं देने पर उनका करीब डेढ़ करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है। प्रोफेसर महेशचंद ने बताया कि उन्होंने क्षतिपूर्ति, अनुबंध के अनुसार बकाया वेतन दिलाने के लिए पीएमओ कार्यालय को ट्वीट कर मदद की गुहार लगाई ।
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खुशी से झूम उठे परिजन
सिकंदराबाद। गांव नगला कला में प्रोफेसर महेशचंद के परिवार में पत्नी पूनम, साढे तीन वर्षीय बेटी, भाई हरेंद्र, दिनेश दोनों का परिवार रहता है। चार साल बाद प्रोफेसर के भारत लौटने का समाचार जैसे ही उनकी पत्नी पूनम को मिला, वे उन्हें रिसीव करने परिजनों के साथ एयरपोर्ट पहुंची। पत्नी और अन्य परिजनों ने बताया कि वह पिछले चार सालों के महेश के वापस लौटने की बाट जो रहे थे। प्रोफेसर के वापस आने पर परिजनों में खुशी का माहौल है।
जांच पड़ताल के बाद ही विदेश में जाए नौकरी के लिए
प्रोफेसर महेशचंद ने कहा कि जो युवा विदेश में बेहतर भविष्य के लिए विदेश में नौकरी करना चाहते हैं वह विदेश से नौकरी के लिए मिलने वाले ऑफर की पूरी तरह से जांच पड़ताल करें। संबंधित देश के दूतावास से भी नौकरी के बारे में पूरी जानकारी जुटाए। पूरी तरह से जांच पड़ताल करने के बाद ही विदेश में नौकरी के लिए जाएं।
(नोट- यह समाचार अमर उजाला में सात मार्च को प्रकाशित किया गया था। छह मार्च को समाचार भेजा गया था।)
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सिकंदराबाद। पिछले चार सालों से ब्राजील की राजधानी ब्राजीलिया में फंसे तहसील क्षेत्र के गांव नगला काला निवासी प्रोफेसर महेशचंद नौकरी छोड़कर बृहस्पतिवार को अपने वतन लौट आए। मामले को मीडिया द्वारा उठाए जाने पर भारत सरकार ने संज्ञान लिया था। भारत सरकार के दखल के बाद प्रोेफेसर महेशचंद अपनों के बीच लौट सके। पत्नी और परिजन में खुशी का माहौल है।
तहसील क्षेत्र के गांव नगला काला निवासी प्रोफेसर डॉ. महेशचंद ने बताया कि नई दिल्ली राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला से पीएचडी करने के बाद वह दिल्ली विश्वविद्यालय के भास्कराचार्य कॉलेज में पढ़ाने लगे थे। इस दौरान ब्राजीलिया फेडरेशन विश्वविद्यालय से विजिट पर आए प्रोफेसर जीरोम डिपेरोट ने अच्छे वेतन पर अपने विश्वविद्यालय में नौकरी के लिए उन्हें अपने विश्वविद्यालय में विजिटिंग प्रोफेसर की नौकरी का विज्ञापन उन्हें ईमेल किया। जिसमें करीब 5780 ब्राजीलियन रियाल वेतन था। इतने कम वेतन पर उन्होंने जाने से इन्कार कर दिया।
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बाद में उन्हें 15806 ब्राजीलियन रियाल वेतन देने का मेल भेजा गया। 4 अप्रैल 2019 में वह यूनिवर्सिटी ऑफ ब्राजीलिया चले गए। 11 अप्रैल 2019 को उन्होंने विश्वविद्यालय के साथ 16199 ब्राजिलियन रियाल के वेतन के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। पांच महीने तक उन्हें वेतन नहीं दिया गया। वेतन दिए जाने के लिए बार-बार विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रोफेसर से संपर्क किया, लेकिन मामले का कोई हल नहीं निकला। विश्वविद्यालय प्रशासन उन्हें बताया कि विज्ञापन के अनुसार 5780 ब्राजीलियन रियाल का वेतन दिया जाएगा। तभी से वह कम वेतन पर काम कर रहे थे। अनुबंध के अनुसार वेतन दिए जाने की मांग को लेकर उन्होंने भारतीय दूतावास में भी संपर्क किया, लेकिन उन्हें कोई मदद नहीं मिली। जिसके बाद उन्होंने कोर्ट में इस संबंध में याचिका दायर की। डॉ. महेश ने आरोप लगाया कि पिछले चार साल से विश्वविद्यालय द्वारा उनका शोषण किया जा रहा था, जिसके चलते वह मानसिक तनाव में आए गए। भारत वापस पहुंचे प्रोफेसर महेश ने बताया कि ब्राजीलिया विश्वविद्यालय द्वारा 4 साल में अनुबंध के आधार पर वेतन नहीं देने पर उनका करीब डेढ़ करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है। प्रोफेसर महेशचंद ने बताया कि उन्होंने क्षतिपूर्ति, अनुबंध के अनुसार बकाया वेतन दिलाने के लिए पीएमओ कार्यालय को ट्वीट कर मदद की गुहार लगाई ।
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खुशी से झूम उठे परिजन
सिकंदराबाद। गांव नगला कला में प्रोफेसर महेशचंद के परिवार में पत्नी पूनम, साढे तीन वर्षीय बेटी, भाई हरेंद्र, दिनेश दोनों का परिवार रहता है। चार साल बाद प्रोफेसर के भारत लौटने का समाचार जैसे ही उनकी पत्नी पूनम को मिला, वे उन्हें रिसीव करने परिजनों के साथ एयरपोर्ट पहुंची। पत्नी और अन्य परिजनों ने बताया कि वह पिछले चार सालों के महेश के वापस लौटने की बाट जो रहे थे। प्रोफेसर के वापस आने पर परिजनों में खुशी का माहौल है।
जांच पड़ताल के बाद ही विदेश में जाए नौकरी के लिए
प्रोफेसर महेशचंद ने कहा कि जो युवा विदेश में बेहतर भविष्य के लिए विदेश में नौकरी करना चाहते हैं वह विदेश से नौकरी के लिए मिलने वाले ऑफर की पूरी तरह से जांच पड़ताल करें। संबंधित देश के दूतावास से भी नौकरी के बारे में पूरी जानकारी जुटाए। पूरी तरह से जांच पड़ताल करने के बाद ही विदेश में नौकरी के लिए जाएं।
(नोट- यह समाचार अमर उजाला में सात मार्च को प्रकाशित किया गया था। छह मार्च को समाचार भेजा गया था।)