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पुश्तैनी घर का दीदार कर भर आईं थीं आंखें

Wed, 03 Feb 2016 10:39 PM IST
अमर उजाला, बुलंदशहर
अमर उजाला, बुलंदशहर Updated Wed, 03 Feb 2016 10:39 PM IST
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Pakistani writer intjaar Hussain came in Dibai in 2012.
मशहूर उपन्यास ‘बस्ती’ और ‘हिंदुस्तान से आखिरी खत’ जैसी रचनाओं से अपनी साहित्यिक क्षमता का लोहा मनवाने वाले पाकिस्तानी लेखक इंतजार हुसैन का भारत से काफी लगाव था।
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मंगलवार को पाकिस्तान के लाहौर में एक अस्पताल में उनका निधन हो गया। डिबाई में 7 दिसंबर 1923 को जन्मे हुसैन सन 1947 में बंटवारे के दौरान पाकिस्तान चले गए थे।
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मगर अपनी जन्मभूमि डिबाई से उन्हें बेइंतहा प्यार था। वर्ष 2012 में अपनी पुरानी यादों को ताजा करने के लिए इंतजार हुसैन अलीगढ़ के एक लेखक के साथ अपना मकान ढूंढते हुए डिबाई आए थे। अपने घर का दीदार कर इंतजार हुसैन की आंखें भर आईं थीं।
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इंतजार हुसैन के निधन की जानकारी पर मोहल्ला शेखान स्थित उनके पैतृक मकान के मालिक पूर्व चेयरमैन अर्जुन कुमार सर्राफ और मोहल्लेवासियों की आंखें भर आईं।

अर्जुन कुमार ने बताया कि यह मकान उनके पिता पूर्व चेयरमैन राम नरायन ने इंतजार हुसैन के नाना इजहार हुसैन से 1948 में खरीदा था। अर्जुन ने बताया कि बड़े ही सरल वहरदिल अजीज हुसैन साहब अपना मकान तलाशते हुए 2012 में जब यहां पहुंचे, तो वह घर पर ही थे।

अर्जुन कुमार ने बताया कि हुसैन साहब को याद था कि जिस मकान में वह रहे उस मकान के मुख्य दरवाजे के दाएं-बाएं चौकियां थीं। उनके कमरे के  तीन दरवाजे सड़क की ओर खुलते थे।

मकान के एक ओर कुछ दूरी पर फकीर चंद हलवाई की दुकान और दूसरी ओर कुछ दूरी पर एक मस्जिद थी। यहां वह रोज नमाज पढ़ा करते थे। हुसैन साहब ने कई घंटे मकान का दीदार करने के बाद दीवारा को कई बार चूमा था।

इस दौरान पुराने लम्हों को याद कर उनकी आंखें भर आई थीं। परिवार के साथ फोटो भी खिंचवाई थी। उसके आने की खबर से मोहल्ले वालों में भी उत्साह था।

वह प्राचीन चामुंडा मंदिर भी गए थे। करीब तीन घंटे वह यहां रहे थे। अर्जुन कुमार ने बताया कि हुसैन साहब ने उन्हें पाकिस्तान घूमने के लिए आमंत्रित भी किया था।


मिठ्ठन लाल हलवाई के पोते गुंजन जायसवाल ने बताया कि वह उनकी दुकान पर पेड़े खाने पहुंचे जो वह बचपन में खाया करते थे। वह पेडे़ खरीद कर अपने साथ भी ले गए थे।
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