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‘तन को शुद्ध और मन को बुद्ध बनाती है हिंदी’
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कवि अर्जुन शिशोदिया।
- फोटो : BULANDSHAHR
‘तन को शुद्ध और मन को बुद्ध बनाती है हिंदी’
बुलंदशहर। अमर उजाला फाउंडेशन के तत्वावधान में शनिवार को हिंदी हैं हम अभियान के तहत ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान जनपद के प्रतिष्ठित कवि और प्रबुद्धजनों ने कार्यक्रम में शामिल होकर हिंदी भाषा के प्रसार और उसके उत्थान के लिए किए जा रहे प्रयासों के ऊपर सार्थक चर्चा की। कार्यक्रम के दौरान कवियों नेे कविता के माध्यम से समृद्ध भाषा हिंदी के गुणों का बखान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. अर्जुन सिसौदिया और संचालन डॉ. अक्षय प्रताप ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ युवा कवि मोहित शौर्य ने सरस्वती वंदना कर किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि पूर्व अंतर्राष्ट्रीय विदेशी फुटबॉलर डेविड बैकहम भी हिंदी भाषा से इतने प्रभावित हैं कि उनके हाथ पर गुदा टैटू भी हिंदी में ही है। कवि यतीश अकिंचन ने कहा कि मातृभाषा मां के समान होती है। विश्व में तीन हजार भाषाओं में सर्वश्रेष्ठ हिंदी भाषा है। जो कि तन को शुद्ध व मन को बुद्ध बनाती है। कवि मधु वार्ष्णेय ने कहा कि हिंदी हमारी विरासत है, जिसे हम नजरअंदाज करते हैं। जबकि, दुनिया में सबसे बढ़ा शब्दकोष हमारे ही पास हिंदी के रूप में है। वहीं, एडीजे पल्लवी अग्रवाल ने कहा कि हिंदी हमारी राजभाषा है। जिस तरह अन्य देश अपनी भाषा में सारे कार्य कर उन्नति के शिखर पर पहुंचते हैं, उसी तरह हमें भी हिंदी में सारे कार्य कर देश को तरक्की पर ले जाना होगा। इस दौरान उन्होंने मां भारती के माथे की बिंदी, अपनी तो भाषा है हिंदी। यह विज्ञानी अलंकारी प्रेम से परिपूर्ण है, सारे भावों के अलग है रस यह बहुत ही गूढ़ है, कविता सुनाकर वाहवाही बटोेरी। इस दौरान कवि सिकंदर इलाहाबादी ने एक कविता के माध्यम से हिंदी का व्याख्यान किया। अलका शर्मा ने कहा कि हमें अपनी भाषा को प्राथमिकता देनी चाहिए। वहीं, अक्षय प्रताप अक्षय ने कहा कि हिंदी को विश्व पटल पर लाने के लिए सभी को एकजुट होना होगा। वहीं, डा. अर्जुन सिसौदिया ने कहा कि भाषा को संस्कृति प्रभावित करती है। प्रवासी भारतीयों में भाषा का गौरव है। सभी त्यौहार अपनी भाषा अपनी बोली में आयोजित करते हैं। भारत में लोगों की सोच, आमंत्रण पत्र की भाषा बदलने लगे हैं। लेकिन, ऐसा नहीं होना चाहिए। हिंदी को ही प्राथमिकता देनी होगी।
कविता के अंदाज में बयां की बात
भाषाएं हैं बहुत विश्व में सबको अपनी प्यारी है,
गुण गहनों से सजी किंतु हिंदी सुंदर सुकुमारी है।
अंग्रेजों अब भारत छोड़ो गांधी बोले हिंदी में,
राष्ट्रचेतना देश प्रेम के गढ़े हिंडोले हिंदी में।
गांधी कहते थे भारत मां जब स्वतंत्र हो जाएगी,
तो निश्चित ही हिंदी भाषा सिंहासन हो पाएगी।
है अवसर साकार करो, अब गांधी जी के सपने को,
हिंदी है भारत की बिंदी, इसको जरा पनपने दो।
- डा. अर्जुन सिसौदिया।
चेतना के बंद पट खोलती है हिंदी,
और भारतीय होने का प्रमाण बन जाती है।
घनानंद, केशव के कुंज में विहारती तो,
भूषण की युद्ध में कृपाण बन जाती है।
भारत स्वतंत्रता का पांचजन्य फूंकने को,
मैथिली प्रसाद महाप्राण बन जाती है।
देश स्वाभिमान हेतु शत्रु को संहारती तो,
पृथ्वी का शब्दभेदी बाण बन जाती है।
- यतीश अकिंचन
भारती की छवि अभिराम कर लें,
आओ मातृभाषा को प्रणाम कर लें।
अज्ञानी से ज्ञानी तक करे ये सफर,
देववाणी संस्कृत है इसका घर।
भाषा ज्ञान सद्भाव मिलता यहीं,
रामायण जैसा क्या राम हैं कहीं।
वाल्मीकि जी को राम राम कर लें,
आओ मातृभाषा को प्रणाम कर लें।
- अक्षय कुमार ‘अक्षय’
मेरे प्यारे वतन की है प्यारी जमीं,
तुझपे ऐ मादरे हिंद सदआफरी।
अपनी तहजीब का है उजाला लिए,
यानि गिरजे मसाजिद शिवाला लिए।
तुझको यूं गोद में है हिमाला लिए,
जैसे शंकर है हाथों में भाला लिए।
पासबानी पे तेरी हमें है यकीं,
मेरे प्यारे वतन की है प्यारी जमीं।
- सिकंदर इलाहाबादी
हिंदी ही मेरी ज्ञान चेतना, चाहत यादें सपने मेरे सब हिंदी से हैं।
हिंदी ही मेरी परिकल्पना, हर रस, भाव, सृजन जीवन का आधार है हिंदी।
स्वीकार कोई अवमानना हिंदी है, मेरे भारत की बिंदी और विरासत,
हिंदी से हिंदू और हिंदुस्तान है, हिंदी से है हर संभावना।
- मधु वार्ष्णेय
जिसकी वीणा में सजे, सुर संगम अभिराम,
वंदन तेरा शारदे, करती आठों याम।
भाव, शब्द, रस, छंद से बरसे ज्ञान फुहार,
ऐसी मति दे शारदे, करती यही गुहार।
- अलका शर्मा
मात हमारी हिंदी ने राजा-रानी बना दिया हमको,
शून्य दिया दुनिया को स्वाभिमानी बना दिया हमको।
एहसान किए इतने हम पर कैसे गिनवाऊं मैं यारों,
‘अ’ अनपढ़ से शुरू किया ‘ज्ञ’ ज्ञानी बना दिया हमको।
- मोहित शौर्य
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बुलंदशहर। अमर उजाला फाउंडेशन के तत्वावधान में शनिवार को हिंदी हैं हम अभियान के तहत ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान जनपद के प्रतिष्ठित कवि और प्रबुद्धजनों ने कार्यक्रम में शामिल होकर हिंदी भाषा के प्रसार और उसके उत्थान के लिए किए जा रहे प्रयासों के ऊपर सार्थक चर्चा की। कार्यक्रम के दौरान कवियों नेे कविता के माध्यम से समृद्ध भाषा हिंदी के गुणों का बखान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. अर्जुन सिसौदिया और संचालन डॉ. अक्षय प्रताप ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ युवा कवि मोहित शौर्य ने सरस्वती वंदना कर किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि पूर्व अंतर्राष्ट्रीय विदेशी फुटबॉलर डेविड बैकहम भी हिंदी भाषा से इतने प्रभावित हैं कि उनके हाथ पर गुदा टैटू भी हिंदी में ही है। कवि यतीश अकिंचन ने कहा कि मातृभाषा मां के समान होती है। विश्व में तीन हजार भाषाओं में सर्वश्रेष्ठ हिंदी भाषा है। जो कि तन को शुद्ध व मन को बुद्ध बनाती है। कवि मधु वार्ष्णेय ने कहा कि हिंदी हमारी विरासत है, जिसे हम नजरअंदाज करते हैं। जबकि, दुनिया में सबसे बढ़ा शब्दकोष हमारे ही पास हिंदी के रूप में है। वहीं, एडीजे पल्लवी अग्रवाल ने कहा कि हिंदी हमारी राजभाषा है। जिस तरह अन्य देश अपनी भाषा में सारे कार्य कर उन्नति के शिखर पर पहुंचते हैं, उसी तरह हमें भी हिंदी में सारे कार्य कर देश को तरक्की पर ले जाना होगा। इस दौरान उन्होंने मां भारती के माथे की बिंदी, अपनी तो भाषा है हिंदी। यह विज्ञानी अलंकारी प्रेम से परिपूर्ण है, सारे भावों के अलग है रस यह बहुत ही गूढ़ है, कविता सुनाकर वाहवाही बटोेरी। इस दौरान कवि सिकंदर इलाहाबादी ने एक कविता के माध्यम से हिंदी का व्याख्यान किया। अलका शर्मा ने कहा कि हमें अपनी भाषा को प्राथमिकता देनी चाहिए। वहीं, अक्षय प्रताप अक्षय ने कहा कि हिंदी को विश्व पटल पर लाने के लिए सभी को एकजुट होना होगा। वहीं, डा. अर्जुन सिसौदिया ने कहा कि भाषा को संस्कृति प्रभावित करती है। प्रवासी भारतीयों में भाषा का गौरव है। सभी त्यौहार अपनी भाषा अपनी बोली में आयोजित करते हैं। भारत में लोगों की सोच, आमंत्रण पत्र की भाषा बदलने लगे हैं। लेकिन, ऐसा नहीं होना चाहिए। हिंदी को ही प्राथमिकता देनी होगी।
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कविता के अंदाज में बयां की बात
भाषाएं हैं बहुत विश्व में सबको अपनी प्यारी है,
गुण गहनों से सजी किंतु हिंदी सुंदर सुकुमारी है।
अंग्रेजों अब भारत छोड़ो गांधी बोले हिंदी में,
राष्ट्रचेतना देश प्रेम के गढ़े हिंडोले हिंदी में।
गांधी कहते थे भारत मां जब स्वतंत्र हो जाएगी,
तो निश्चित ही हिंदी भाषा सिंहासन हो पाएगी।
है अवसर साकार करो, अब गांधी जी के सपने को,
हिंदी है भारत की बिंदी, इसको जरा पनपने दो।
- डा. अर्जुन सिसौदिया।
चेतना के बंद पट खोलती है हिंदी,
और भारतीय होने का प्रमाण बन जाती है।
घनानंद, केशव के कुंज में विहारती तो,
भूषण की युद्ध में कृपाण बन जाती है।
भारत स्वतंत्रता का पांचजन्य फूंकने को,
मैथिली प्रसाद महाप्राण बन जाती है।
देश स्वाभिमान हेतु शत्रु को संहारती तो,
पृथ्वी का शब्दभेदी बाण बन जाती है।
- यतीश अकिंचन
भारती की छवि अभिराम कर लें,
आओ मातृभाषा को प्रणाम कर लें।
अज्ञानी से ज्ञानी तक करे ये सफर,
देववाणी संस्कृत है इसका घर।
भाषा ज्ञान सद्भाव मिलता यहीं,
रामायण जैसा क्या राम हैं कहीं।
वाल्मीकि जी को राम राम कर लें,
आओ मातृभाषा को प्रणाम कर लें।
- अक्षय कुमार ‘अक्षय’
मेरे प्यारे वतन की है प्यारी जमीं,
तुझपे ऐ मादरे हिंद सदआफरी।
अपनी तहजीब का है उजाला लिए,
यानि गिरजे मसाजिद शिवाला लिए।
तुझको यूं गोद में है हिमाला लिए,
जैसे शंकर है हाथों में भाला लिए।
पासबानी पे तेरी हमें है यकीं,
मेरे प्यारे वतन की है प्यारी जमीं।
- सिकंदर इलाहाबादी
हिंदी ही मेरी ज्ञान चेतना, चाहत यादें सपने मेरे सब हिंदी से हैं।
हिंदी ही मेरी परिकल्पना, हर रस, भाव, सृजन जीवन का आधार है हिंदी।
स्वीकार कोई अवमानना हिंदी है, मेरे भारत की बिंदी और विरासत,
हिंदी से हिंदू और हिंदुस्तान है, हिंदी से है हर संभावना।
- मधु वार्ष्णेय
जिसकी वीणा में सजे, सुर संगम अभिराम,
वंदन तेरा शारदे, करती आठों याम।
भाव, शब्द, रस, छंद से बरसे ज्ञान फुहार,
ऐसी मति दे शारदे, करती यही गुहार।
- अलका शर्मा
मात हमारी हिंदी ने राजा-रानी बना दिया हमको,
शून्य दिया दुनिया को स्वाभिमानी बना दिया हमको।
एहसान किए इतने हम पर कैसे गिनवाऊं मैं यारों,
‘अ’ अनपढ़ से शुरू किया ‘ज्ञ’ ज्ञानी बना दिया हमको।
- मोहित शौर्य