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बंद बिजलीघरों पर कर्मियों के भुगतान पर फंसे एसई

Sun, 29 Jan 2017 11:31 PM IST
अमर उजाला/बुलंदशहर
अमर उजाला/बुलंदशहर Updated Sun, 29 Jan 2017 11:31 PM IST
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Off payment of workers stranded at stations SE
बंद बिजलीघरों पर कर्मियों के भुगतान पर फंसे एसई - फोटो : ब्यूरो

बंद पड़े बिजलीघरों पर संविदाकर्मियों की तैनाती दिखाकर फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया। कर्मियों के वेतन के नाम पर ठेकेदार को 6.75 लाख रुपये का भुगतान हो गया। एक्सईएन डिबाई ने तत्कालीन एक्सईएन और वर्तमान में एसई के खिलाफ अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी है। एक्सईएन डिबाई की रिपोर्ट में एसई का नाम उल्लखित होने से विभागीय अफसरों में हड़कंप मच गया है।

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एक्सईएन डिबाई ने एमडी मेरठ को भेजी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मैसर्स कुमार इंजीनियरिंग वर्क्स के स्वामी अरुण भारद्वाज द्वारा विद्युत उपकेंद्रों के बिना ऊर्जीकृत किए ही संविदाकर्मियों के मद का भुगतान करा लिया गया। फर्म को खुशरुपुर, खुशहालाबाद, चिरौरी, नरायनपुर, सुल्तानपुर, बिलौनी, गालिबपुर पर संविदाकर्मियों की तैनाती का टेंडर जारी किया गया।
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एक्सईएन डिबाई की रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि जांच में पता चला कि लेखाकार महेश चंद्र वर्मा, मुख्य कैशियर विनीत कुमार शर्मा की मिलीभगत से तत्कालीन एक्सईएन राजेश सिंह द्वारा सात मार्च 2014 को 6 लाख 75 हजार रुपये का भुगतान करा दिया गया।
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एक्सईएन ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि इसके कारण निगम को वित्तीय हानि हुई है। एक्सईएन डिबाई की जांच रिपोर्ट से विभागीय अफसरों में हड़कंप मच गया है। आरोपित तत्कालीन एक्सईएन डिबाई राजेश सिंह वर्तमान में एसई द्वितीय के पद पर तैनात हैं।

कर्मी तैनात नहीं, वेतन उठा लिया
एक्सईएन डिबाई की रिपोर्ट में साफ-साफ लिखा हुआ है कि बिजलीघरों पर कर्मचारी तैनात ही नहीं किए गए थे। कर्मचारियों की भविष्य निधि जमा नहीं कराई गई। जांच में प्रमाण मांगने पर साक्ष्य भी प्रस्तुत नहीं किए गए। इसके बावजूद संविदाकर्मियों के मद का भुगतान विभागीय अफसर-कर्मियों की मिलीभगत से निकाल लिया गया।

अफसरों-फर्म से रिकवरी की संस्तुति 
एक्सईएन ने एमडी को भेजी रिपोर्ट में कहा है कि विभाग को 6.75 लाख रुपये की आर्थिक क्षति हुई है। आर्थिक क्षति को आरोपी अफसर और फर्म संचालक से वसूल किया जाए।

गंगानगर फर्जीवाड़े में नपे थे एक्सईएन बुलंदशहर
बुलंदशहर में हुए गंगानगर बिजलीघर फर्जीवाड़े में तत्कालीन एक्सईएन पर गाज गिरी थी। एक्सईएन भी बंद पड़े गंगानगर बिजलीघर पर संविदाकर्मियों की तैनाती दिखाते हुए सालों तक वेतन निकालते रहे थे। तब फर्जीवाड़ा खुलने पर जांच बैठी थी। एक्सईएन से रिकवरी की गई थी। इसके अलावा एक्सईएन को हटाकर संबद्ध कर दिया गया था।

बंद पड़े बिजलीघरों में फर्जी तरीके से संविदाकर्मियों की तैनाती दिखाकर वेतन निकाला जाता रहा। अफसरों और बाबुओं की सांठगांठ से ठेकेदार को 6.75 लाख रुपये का चैक जारी कर दिया गया। इससे विभाग को वित्तीय हानि उठानी पड़ी। एमडी समेत उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी गई है। -पंकज कुमार, एक्सईएन डिबाई


आरोप पूरी तरह निराधार हैं। विभाग के नियम विरुद्ध कोई कार्य नहीं किया गया। कोई भुगतान बिना सर्किल कार्यालय के नहीं किया जा सकता है। जेई-एसडीओ के वेरीफिकेशन पर भुगतान होता है।- राजेश सिंह, अधीक्षण अभियंता

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