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Bulandshahar News: अब ड्रोन से खेतों में होगा यूरिया व डीएपी का छिड़काव
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बुलंदशहर। किसानों के लिए एक अच्छी खबर है। अब जल्द ही खेतों पर ड्रोन उड़ते दिखाई देंगे। नैनो यूरिया व डीएपी का चलन खेती-किसानी के लिए रोजगार के अवसर खोलेंगेा। इसके माध्यम से किसानों की खाद की लागत कम होगी तो ड्रोन के प्रयोग से लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
जिला कृषि अधिकारी राहुल सिंह तेवतिया ने बताया कि खेतों में ड्रोन से यूरिया, डीएपी और दवा के छिड़काव की व्यवस्था खेती-किसानी के लिए मील का पत्थर साबित होने जा रही है। इफको की ओर से इन दिनों भारत संकल्प यात्रा के तहत फसलों में नैनो यूरिया व डीएपी के साथ दवा के छिड़काव को लेकर ड्रोन के प्रयोग के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है। बताया कि कम पानी में भी ड्रोन से फसलों पर यूरिया व डीएपी का छिड़काव हो सकेगा। फसलों में उर्वरक और दवा डालने के लिए काफी समय लगता है। जबकि ड्रोन के माध्यम से करीब 10 से 15 मिनट में एक एकड़ खेत में खाद व दवा का छिड़काव किया जा सकेगा। खास बात यह है कि दानेदार के मुकाबले लिक्विड खाद के दाम कम हैं। ऐसे में उपयोग में भी कम लाई जाती है। ऐसे में लागत भी कम हो जाती है। इसका किसानों को लाभ मिलेगा।
इच्छुक किसान लखनऊ में इफको के मुख्य केंद्र में सात दिवसीय प्रशिक्षण ले सकते हैं। इस व्यवस्था को लेकर प्रचार-प्रसार शुरू कराया गया है। वहीं, दूसरी ओर शासन स्तर से भी ड्रोन लेने के लिए जल्द ही सब्सिडी की भी व्यवस्था शुरू होने वाली है। दूसरी ओर इफको के क्षेत्रीय प्रबंधक प्रहलाद सिंह ने बताया कि बाजार में 10 लाख रुपये से अधिक की कीमत के ड्रोन मिल रहे हैं। लेकिन इफको ड्रोन को चलाने का प्रशिक्षण और लाइसेंस लेने के बाद बहुत कम दाम पर मुहैया कराएगा। इच्छुक किसान ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण और लाइसेंस ले सकते हैं। ड्रोन लेकर किसान खुद के साथ दूसरे किसानों की फसलों में भी यूरिया, डीएपी व दवाओं का छिड़काव कर सकेंगे।
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जिला कृषि अधिकारी राहुल सिंह तेवतिया ने बताया कि खेतों में ड्रोन से यूरिया, डीएपी और दवा के छिड़काव की व्यवस्था खेती-किसानी के लिए मील का पत्थर साबित होने जा रही है। इफको की ओर से इन दिनों भारत संकल्प यात्रा के तहत फसलों में नैनो यूरिया व डीएपी के साथ दवा के छिड़काव को लेकर ड्रोन के प्रयोग के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है। बताया कि कम पानी में भी ड्रोन से फसलों पर यूरिया व डीएपी का छिड़काव हो सकेगा। फसलों में उर्वरक और दवा डालने के लिए काफी समय लगता है। जबकि ड्रोन के माध्यम से करीब 10 से 15 मिनट में एक एकड़ खेत में खाद व दवा का छिड़काव किया जा सकेगा। खास बात यह है कि दानेदार के मुकाबले लिक्विड खाद के दाम कम हैं। ऐसे में उपयोग में भी कम लाई जाती है। ऐसे में लागत भी कम हो जाती है। इसका किसानों को लाभ मिलेगा।
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इच्छुक किसान लखनऊ में इफको के मुख्य केंद्र में सात दिवसीय प्रशिक्षण ले सकते हैं। इस व्यवस्था को लेकर प्रचार-प्रसार शुरू कराया गया है। वहीं, दूसरी ओर शासन स्तर से भी ड्रोन लेने के लिए जल्द ही सब्सिडी की भी व्यवस्था शुरू होने वाली है। दूसरी ओर इफको के क्षेत्रीय प्रबंधक प्रहलाद सिंह ने बताया कि बाजार में 10 लाख रुपये से अधिक की कीमत के ड्रोन मिल रहे हैं। लेकिन इफको ड्रोन को चलाने का प्रशिक्षण और लाइसेंस लेने के बाद बहुत कम दाम पर मुहैया कराएगा। इच्छुक किसान ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण और लाइसेंस ले सकते हैं। ड्रोन लेकर किसान खुद के साथ दूसरे किसानों की फसलों में भी यूरिया, डीएपी व दवाओं का छिड़काव कर सकेंगे।
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