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Bulandshahar News: शहर में बनेगा मिनी बाईपास, सिंचाई विभाग के नाले का होगा निर्माण
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बुलंदशहर। नगर के बीच से गुजर रहे सिंचाई विभाग के मुख्य नाले के निर्माण और नाले की पटरी पर सड़क बनाने की तैयारी की जा रही है। रोडवेज बस अड्डा से बाईपास जाने वाले लोगों को एक मिनी बाईपास की सुविधा भी मिलेगी, इससे लोगों को जाम से राहत मिलेगी। फिलहाल इसके लिए सिंचाई विभाग के अधिकारी ड्राइंग तैयार करने में जुटे हैं। तीन किमी लंबे नाले और सड़क के निर्माण पर करीब 25 करोड़ रुपये खर्च किया जाएगा।
नगर के बीचो-बीच से होकर एक नाला गुजर रहा है। सिंचाई विभाग के इस नाले के किनारे बसी कॉलोनियों, गली-मोहल्ले के लोग परेशान रहते हैं, क्योंकि नाला करीब 12 फीट गहरा और खुला होने के कारण हादसा होने का खतरा बना रहता है। अब लोगों की समस्या के समाधान और ट्रैफिक जाम से लोगों को राहत देने के लिए सिंचाई विभाग और नगर पालिका की ओर से कार्य योजना तैयार की जा रही है। बताया जा रहा है कि नगर के रोडवेज बस अड्डा से करीब तीन किमी लंबा काली नदी तक नाले का निर्माण कराने और नाले की पटरी पर सड़क बनाने की योजना है। फिलहाल नाले और सड़क की ड्रॉइंग तैयार की जा रही है, इसके बाद इस प्रस्ताव को स्वीकृति के लिए शासन को भेजा जाएगा। नगर पालिका अधिकारियों के मुताबिक करीब 25 करोड़ रुपये इस कार्य पर खर्च होने हैं। यदि प्रस्ताव को स्वीकृति मिलती है तो ऐसी स्थिति में नगर के पानी की निकासी के साथ गंदगी, नाले की सफाई और हादसों पर अंकुश लगाने में सफलता मिलेगी। बताया जा रहा है कि शासन स्तर से इस योजना की स्वीकृति के लिए 80 फीसदी प्रक्रिया राज्य आपदा न्यूनीकरण विभाग की ओर से पूरी कर ली गई है। जल्द ही प्रस्ताव भेजने पर शेष प्रक्रिया पूरी कर इसे स्वीकृति दी जाएगी।
मिनी बाईपास के तौर पर किया जाएगा प्रयोग
नाले की पटरी पर सड़क निर्माण और नाले पर स्लैब डाले जाने के बाद इसे मिनी बाईपास के तौर पर प्रयोग किया जाएगा। सड़क निर्माण के बाद रोडवेज बस अड्डा से नाले के किनारे बसी कॉलोनियों में जाने के लिए लोगों को अन्य कॉलोनियों से होकर गुजरना नहीं पड़ेगा। साथ ही बाईपास की ओर से रोडवेज बस अड्डा और रोडवेज बस अड्डा की ओर से बाईपास की ओर सीधे आवागमन हो सकेगा।
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सफाई के नाम पर होती है खानापूर्ति
सिंचाई विभाग के इस नाले में बड़ी मात्रा में कूड़ा फेंका जाता है। इसके चलते नाले में पानी कम और कूड़ा अधिक दिखाई देता है। इस नाले की सफाई नगर पालिका कराती है, लेकिन सफाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है। इस नाले की सफाई के नाम पर लाखों रुपये खर्च दिखाया जाता है, लेकिन नाला केवल बारिश के समय में ही साफ होता है। बताया जा रहा है कि करीब छह साल पहले भी इस नाले के निर्माण और स्लैब डालने के लिए 17 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कर भेजा गया था, लेकिन इसे शासन से स्वीकृति नहीं मिली थी। इसके चलते अभी भी लोगों के लिए यह नाला मुसीबत बना हुआ है।
बार-बार हुए हादसे, पर नहीं हुई सुनवाई
नगर के बीच से गुजरने वाले इस नाले के किनारे राधानगर, साठा समेत कई कालोनियां बसी हुई हैं। स्थिति यह है कि नाले के किनारे बने मकानों में न केवल सीलन की समस्या रहती है, बल्कि नाले के खुला होने के चलते आए दिन हादसे हुए। करीब दो साल पहले 21 सितंबर 2022 को राधा नगर निवासी गजेंद्र का दो वर्षीय बेटा भूपेश खेलते हुए नाले में गिर गया था। करीब 40 मिनट बाद भूपेश का शव मिला था। राधा नगर निवासी सचिन कुमार ने बताया कि शहर के बीच से गुजर रहे बड़े नाले के कारण लगातार हादसे हो रहे हैं। नाले में पूर्व में पांच से छह लोग गिर चुके हैं, जबकि ढाई साल पहले रोडवेज बस स्टैंड के पास नगर पालिका का ट्रेक्टर-ट्रॉली भी नाले में गिरे थे, जिसमें ट्रैक्टर चालक ने बमुश्किल कूदकर अपनी जान बचाई थी।
शहर के बीच से गुजर रहा नाला सिंचाई विभाग का है। नगर पालिका केवल इसकी सफाई करती है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने नगर पालिका जेई के साथ नाले का निरीक्षण किया है। प्रस्ताव तैयार करने के बाद नगर पालिका के पत्र के साथ इसे शासन को भेजा जाएगा। - डॉ. अश्विनी कुमार सिंह, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका
विभाग के नाले के निर्माण और सड़क के निर्माण के लिए ड्राइंग तैयार की जा रही है। प्रस्ताव तैयार होने के बाद इसे स्वीकृति के लिए शासन को भेजा जाएगा।-- बीके सिंह, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग
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नगर के बीचो-बीच से होकर एक नाला गुजर रहा है। सिंचाई विभाग के इस नाले के किनारे बसी कॉलोनियों, गली-मोहल्ले के लोग परेशान रहते हैं, क्योंकि नाला करीब 12 फीट गहरा और खुला होने के कारण हादसा होने का खतरा बना रहता है। अब लोगों की समस्या के समाधान और ट्रैफिक जाम से लोगों को राहत देने के लिए सिंचाई विभाग और नगर पालिका की ओर से कार्य योजना तैयार की जा रही है। बताया जा रहा है कि नगर के रोडवेज बस अड्डा से करीब तीन किमी लंबा काली नदी तक नाले का निर्माण कराने और नाले की पटरी पर सड़क बनाने की योजना है। फिलहाल नाले और सड़क की ड्रॉइंग तैयार की जा रही है, इसके बाद इस प्रस्ताव को स्वीकृति के लिए शासन को भेजा जाएगा। नगर पालिका अधिकारियों के मुताबिक करीब 25 करोड़ रुपये इस कार्य पर खर्च होने हैं। यदि प्रस्ताव को स्वीकृति मिलती है तो ऐसी स्थिति में नगर के पानी की निकासी के साथ गंदगी, नाले की सफाई और हादसों पर अंकुश लगाने में सफलता मिलेगी। बताया जा रहा है कि शासन स्तर से इस योजना की स्वीकृति के लिए 80 फीसदी प्रक्रिया राज्य आपदा न्यूनीकरण विभाग की ओर से पूरी कर ली गई है। जल्द ही प्रस्ताव भेजने पर शेष प्रक्रिया पूरी कर इसे स्वीकृति दी जाएगी।
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मिनी बाईपास के तौर पर किया जाएगा प्रयोग
नाले की पटरी पर सड़क निर्माण और नाले पर स्लैब डाले जाने के बाद इसे मिनी बाईपास के तौर पर प्रयोग किया जाएगा। सड़क निर्माण के बाद रोडवेज बस अड्डा से नाले के किनारे बसी कॉलोनियों में जाने के लिए लोगों को अन्य कॉलोनियों से होकर गुजरना नहीं पड़ेगा। साथ ही बाईपास की ओर से रोडवेज बस अड्डा और रोडवेज बस अड्डा की ओर से बाईपास की ओर सीधे आवागमन हो सकेगा।
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सफाई के नाम पर होती है खानापूर्ति
सिंचाई विभाग के इस नाले में बड़ी मात्रा में कूड़ा फेंका जाता है। इसके चलते नाले में पानी कम और कूड़ा अधिक दिखाई देता है। इस नाले की सफाई नगर पालिका कराती है, लेकिन सफाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है। इस नाले की सफाई के नाम पर लाखों रुपये खर्च दिखाया जाता है, लेकिन नाला केवल बारिश के समय में ही साफ होता है। बताया जा रहा है कि करीब छह साल पहले भी इस नाले के निर्माण और स्लैब डालने के लिए 17 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कर भेजा गया था, लेकिन इसे शासन से स्वीकृति नहीं मिली थी। इसके चलते अभी भी लोगों के लिए यह नाला मुसीबत बना हुआ है।
बार-बार हुए हादसे, पर नहीं हुई सुनवाई
नगर के बीच से गुजरने वाले इस नाले के किनारे राधानगर, साठा समेत कई कालोनियां बसी हुई हैं। स्थिति यह है कि नाले के किनारे बने मकानों में न केवल सीलन की समस्या रहती है, बल्कि नाले के खुला होने के चलते आए दिन हादसे हुए। करीब दो साल पहले 21 सितंबर 2022 को राधा नगर निवासी गजेंद्र का दो वर्षीय बेटा भूपेश खेलते हुए नाले में गिर गया था। करीब 40 मिनट बाद भूपेश का शव मिला था। राधा नगर निवासी सचिन कुमार ने बताया कि शहर के बीच से गुजर रहे बड़े नाले के कारण लगातार हादसे हो रहे हैं। नाले में पूर्व में पांच से छह लोग गिर चुके हैं, जबकि ढाई साल पहले रोडवेज बस स्टैंड के पास नगर पालिका का ट्रेक्टर-ट्रॉली भी नाले में गिरे थे, जिसमें ट्रैक्टर चालक ने बमुश्किल कूदकर अपनी जान बचाई थी।
शहर के बीच से गुजर रहा नाला सिंचाई विभाग का है। नगर पालिका केवल इसकी सफाई करती है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने नगर पालिका जेई के साथ नाले का निरीक्षण किया है। प्रस्ताव तैयार करने के बाद नगर पालिका के पत्र के साथ इसे शासन को भेजा जाएगा। - डॉ. अश्विनी कुमार सिंह, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका
विभाग के नाले के निर्माण और सड़क के निर्माण के लिए ड्राइंग तैयार की जा रही है। प्रस्ताव तैयार होने के बाद इसे स्वीकृति के लिए शासन को भेजा जाएगा।