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Bulandshahar News: बरसात से पहले करवन नदी की होगी सफाई, खर्च होंगे डेढ़ करोड़
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बुलंदशहर करवन नदी। संवाद
बुलंदशहर। सिकंदराबाद, चोला, खुर्जा क्षेत्र से होकर गुजर रही करवन नदी की सिंचाई विभाग ने सफाई कराने की तैयारी शुरू कर दी है। जल प्रवाह बेहतर होने से इन क्षेत्रों में जहां जलभराव नहीं होगा। वहीं, बरसात के दिनों में अधिक बारिश होने पर नदी के दोनों ओर खेती करने वाले करीब 20 हजार किसानों की फसल भी खराब नहीं होगी। नदी की सफाई के लिए सिचाई विभाग ने प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया है।
सिकंदराबाद के गांव लाठौर से करवन नदी निकलकर मुहाना, दादूपुर नीला, इस्माईलपुर, चंदेरू होते हुए चोला पहुंचती है। चोला क्षेत्र में गांव कौंदू, बंचावली, रसूलपुर, बोहराबास, खबरा होते हुए खुर्जा क्षेत्र में प्रवेश कर जाती है। खुर्जा के बाद अलीगढ़ होते हुए आगरा में यमुना में गिरती है। 90 किलोमीटर लंबी नदी का करीब 45 किलोमीटर भाग जनपद की सीमा में आता है। नदी में गांव के तालाबों से निकलने वाले नालों के अलावा क्षेत्र के करीब दस बड़े नाले भी गिरते हैं।
सामान्य जल निकासी के अलावा बरसात के दिनों में अधिक बारिश होने पर क्षेत्र के पानी की निकासी के लिए करवन नदी एक मात्र माध्यम है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों के तालाबों से निकलने वाले नाले भी करवन नदी में गिरते हैं। जनपद में पड़ने वाले करीब 45 किलोमीटर भाग के दोनों करीब 20 हजार किसान खेती करते हैं। बरसात के दिनों में अधिक बारिश होने पर खेतों का पानी ओवरफ्लो होकर करवन नदी में आता है।
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नदी की सफाई होने के बाद जल प्रवाह बेहतर होने के कारण बरसात के दिनों में अधिक बारिश होने पर किसानों की फसलों के पानी में डूबने का खतरा भी कम हो जाएगा।
ये नाले गिरते है नदी में
खुर्जा नाला, सोमना नाला, चंदेरू नाला, जावल नाला खुर्जा, इस्माईलपुर नाला, गाजीपुर बैनीपुर नाला
कोट
करवन नदी की सफाई के लिए करीब डेढ़ करोड़ का बजट बनाकर शासन को भेज दिया गया है। बरसात से पहले करवन नदी की सफाई कराने की योजना है, ताकि नदी के आसपास के गांवों में जलभराव की समस्या न हो। ओमकार सिंह, सहायक अभियंता, बुलंदशहर खंड गंग नहर
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सिकंदराबाद के गांव लाठौर से करवन नदी निकलकर मुहाना, दादूपुर नीला, इस्माईलपुर, चंदेरू होते हुए चोला पहुंचती है। चोला क्षेत्र में गांव कौंदू, बंचावली, रसूलपुर, बोहराबास, खबरा होते हुए खुर्जा क्षेत्र में प्रवेश कर जाती है। खुर्जा के बाद अलीगढ़ होते हुए आगरा में यमुना में गिरती है। 90 किलोमीटर लंबी नदी का करीब 45 किलोमीटर भाग जनपद की सीमा में आता है। नदी में गांव के तालाबों से निकलने वाले नालों के अलावा क्षेत्र के करीब दस बड़े नाले भी गिरते हैं।
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सामान्य जल निकासी के अलावा बरसात के दिनों में अधिक बारिश होने पर क्षेत्र के पानी की निकासी के लिए करवन नदी एक मात्र माध्यम है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों के तालाबों से निकलने वाले नाले भी करवन नदी में गिरते हैं। जनपद में पड़ने वाले करीब 45 किलोमीटर भाग के दोनों करीब 20 हजार किसान खेती करते हैं। बरसात के दिनों में अधिक बारिश होने पर खेतों का पानी ओवरफ्लो होकर करवन नदी में आता है।
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नदी की सफाई होने के बाद जल प्रवाह बेहतर होने के कारण बरसात के दिनों में अधिक बारिश होने पर किसानों की फसलों के पानी में डूबने का खतरा भी कम हो जाएगा।
ये नाले गिरते है नदी में
खुर्जा नाला, सोमना नाला, चंदेरू नाला, जावल नाला खुर्जा, इस्माईलपुर नाला, गाजीपुर बैनीपुर नाला
कोट
करवन नदी की सफाई के लिए करीब डेढ़ करोड़ का बजट बनाकर शासन को भेज दिया गया है। बरसात से पहले करवन नदी की सफाई कराने की योजना है, ताकि नदी के आसपास के गांवों में जलभराव की समस्या न हो। ओमकार सिंह, सहायक अभियंता, बुलंदशहर खंड गंग नहर