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अब आईआईटी रुड़की के प्लान से होगा काली नदी का उद्धार
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अब आईआईटी रुड़की के प्लान से होगा काली नदी का उद्धार
बुलंदशहर। जिले से गुजरने वाली काली की स्वच्छता को लेकर अच्छी खबर है। अब प्रदेश सरकार ने आईआईटी रुड़की के साथ हाथ मिलाते हुए मनरेगा योजना के बजट से काली नदी को साफ करने का कदम उठाया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि नदी के हालातों को सौ वर्ष पूर्व की भांति किया जाए, ताकि लोगों को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराया जा सके।
नए साल में सी गंगा प्रोजेक्ट के तहत सरकार ने गंगा की सहायक 61 नदियों को स्वच्छ करने का कदम उठाया है। सरकार ने इस योजना के तहत काली नदी को भी ईस्ट और वेस्ट दो हिस्सों में बांटकर साफ करने की योजना बनाई है। पश्चिम के हिस्से को साफ करने के लिए आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों का साथ और मनरेगा योजना के तहत संबंधित जिलों के बजट से काली के अस्तित्व को बचाने का खाका खींचा गया है। इसके अलावा सिंचाई विभाग, व न विभाग, उद्यान विभाग, कृषि के साथ पंचायतीराज विभाग का भी सहयोग लिया जाएगा। पूर्वांचल के राज्यों में सोमवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग से इसकी रूपरेखा तैयार की जाएगी, लेकिन पश्चिम में करीब एक माह बाद अधिकारी योजना बनाएंगे। शासन की ओर से इस संबंध में निर्देश मिलने के बाद अधिकारियों ने तैयारी शुरू कर दी है। बताते चलें कि हापुड़ से होकर जिले में प्रवेश करने वाली काली नदी की जिले में करीब 50 किमी लंबाई है। शहर के बीच से गुजरने के दौरान अतिक्रमण और शहर का गंदा पानी डाले जाने से यह एक नाले का रूप बनकर रह गई है।
पुराने गुंबद सहेजने के लिए एनजीओ ने बढ़ाया कदम
काली नदी का जिले में विशेष महत्व माना जाता है। अंग्रेजी हुकूमत के दौरान काली पर एक शानदार पुल के साथ गुंबद और दरवाजा बनाया गया था। देखरेख के अभाव में अब यह जर्जर हालात में जा रहे हैं। नगर पालिका ईओ मनोज रस्तोगी ने बताया कि एक एनजीओ की टीम ने काली की इस धरोहर को सहेजने में दिलचस्पी दिखाई है। हालांकि अभी नगर पालिका और एनजीओ के बीच इसके लिए कोई करार नहीं हुआ है।
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काली नदी को स्वच्छ बनाने के लिए शासन की ओर से निर्देश मिले हैं। मनरेगा योजना के तहत इस पर बजट खर्च किया जाएगा। अभी इसके लिए अधिकारियों की बैठक होगी, इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। - विनय कुमार श्रीवास्तव, ग्राम्य विकास अधिकारी व परियोजना निदेशक मनरेगा
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बुलंदशहर। जिले से गुजरने वाली काली की स्वच्छता को लेकर अच्छी खबर है। अब प्रदेश सरकार ने आईआईटी रुड़की के साथ हाथ मिलाते हुए मनरेगा योजना के बजट से काली नदी को साफ करने का कदम उठाया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि नदी के हालातों को सौ वर्ष पूर्व की भांति किया जाए, ताकि लोगों को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराया जा सके।
नए साल में सी गंगा प्रोजेक्ट के तहत सरकार ने गंगा की सहायक 61 नदियों को स्वच्छ करने का कदम उठाया है। सरकार ने इस योजना के तहत काली नदी को भी ईस्ट और वेस्ट दो हिस्सों में बांटकर साफ करने की योजना बनाई है। पश्चिम के हिस्से को साफ करने के लिए आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों का साथ और मनरेगा योजना के तहत संबंधित जिलों के बजट से काली के अस्तित्व को बचाने का खाका खींचा गया है। इसके अलावा सिंचाई विभाग, व न विभाग, उद्यान विभाग, कृषि के साथ पंचायतीराज विभाग का भी सहयोग लिया जाएगा। पूर्वांचल के राज्यों में सोमवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग से इसकी रूपरेखा तैयार की जाएगी, लेकिन पश्चिम में करीब एक माह बाद अधिकारी योजना बनाएंगे। शासन की ओर से इस संबंध में निर्देश मिलने के बाद अधिकारियों ने तैयारी शुरू कर दी है। बताते चलें कि हापुड़ से होकर जिले में प्रवेश करने वाली काली नदी की जिले में करीब 50 किमी लंबाई है। शहर के बीच से गुजरने के दौरान अतिक्रमण और शहर का गंदा पानी डाले जाने से यह एक नाले का रूप बनकर रह गई है।
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पुराने गुंबद सहेजने के लिए एनजीओ ने बढ़ाया कदम
काली नदी का जिले में विशेष महत्व माना जाता है। अंग्रेजी हुकूमत के दौरान काली पर एक शानदार पुल के साथ गुंबद और दरवाजा बनाया गया था। देखरेख के अभाव में अब यह जर्जर हालात में जा रहे हैं। नगर पालिका ईओ मनोज रस्तोगी ने बताया कि एक एनजीओ की टीम ने काली की इस धरोहर को सहेजने में दिलचस्पी दिखाई है। हालांकि अभी नगर पालिका और एनजीओ के बीच इसके लिए कोई करार नहीं हुआ है।
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काली नदी को स्वच्छ बनाने के लिए शासन की ओर से निर्देश मिले हैं। मनरेगा योजना के तहत इस पर बजट खर्च किया जाएगा। अभी इसके लिए अधिकारियों की बैठक होगी, इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। - विनय कुमार श्रीवास्तव, ग्राम्य विकास अधिकारी व परियोजना निदेशक मनरेगा