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इलाज की दरकार, सरकार से ही आस

Sat, 02 Apr 2016 12:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर Updated Sat, 02 Apr 2016 12:25 AM IST
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injured didnt get treatment due to lack of money
च‌िक‌ित्‍सक - फोटो : अमर उजाला
‘सचिन की हालत बहुत खराब है साहब...। उसके दोनों पैरों में कई जगह फ्रैक्चर हैं। कूल्हे और टांगों के दो ऑपरेशन हो चुके  हैं। अभी एक और ऑपरेशन होना है। इलाज में अब तक करीब दो लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। अभी ऑपरेशन के लिए चार लाख रुपये और चाहिए। अब रुपये कहां से लाऊं... डॉक्टर कहते हैं कि ऑपरेशन नहीं हुआ तो सचिन कभी चल नहीं पाएगा...’ इतना कहते-कहते सचिन के पिता सुरेंद्र सिंह का गला रुंध गया।
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 कुरली निवासी सुरेंद्र सिंह कुछ उन बदनसीब लोगों में से हैं जिन्होंने होली के दिन गुलावठी-सिकंदराबाद मार्ग पर हुए सड़क हादसे में अपनों को खोया है। 24 मार्च को ट्रक व मैजिक की टक्कर में मैजिक सवार 9 लोगों की मौत हो गई थी। इनमें सात कुरली गांव के रहने वाले थे।
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गांव के 15 लोग हादसे में गंभीर रुप से घायल थे। सुरेंद्र के बेटे विपिन की इस हादसे में मौत हो गई। जबकि सचिन गंभीर रूप से घायल हो गया। उसका मेरठ के सुभारती अस्पताल में इलाज चल रहा है।
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हादसे के बाद तमाम सारे नेता और प्रशासनिक अधिकारियों ने मदद का आश्वासन दिया था। सुरेंद्र ने सबके दरवाजे पर गुहार लगाई लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिली। यहां तक कि अब तक हादसे के पीड़ितों को मुआवजा तक नहीं मिला है।

हादसे में गंभीर रूप से घायल ग्राम कुरली निवासी शीला को अब तक होश नहीं आया है। वह मेरठ के मंगलम अस्पताल में भर्ती हैं। पति मांगेराम की हादसे में मौत हो चुकी है। तीन लड़के और तीन लड़कियां किसी तरह मां का इलाज करवा रहे हैं। उनका बड़ा बेटा भूपेंद्र 12 वीं कक्षा में पढ़ता है।

बताता है, ‘मां जिस दिन से अस्पताल में भर्ती हुई है, वह बोली नहीं है और न ही उन्हें पहचानती है। उसकी हालत गंभीर है। इलाज में अब तक ढाई लाख रुपया खर्च हो चुका है। एक भैंस बेची है। पांच प्रतिशत के ब्याज पर कर्जा लिया है। अब आगे के इलाज के लिए पैसे कहां से लाऊं यह समझ नहीं आ रहा है...’

निशुल्क इलाज के आश्वासन पर शीला को परिवार के लोग ग्रेटर नोएडा के एक अस्पताल में ले गए थे। वहां उनसे 30 हजार रुपये जमा करने को कहा गया। पैसे न होने के कारण घरवाले शीला को लेकर वापस आ गए। आने-जाने में ही उनके करीब 12 हजार रुपये खर्च हो गए।

पैंतीस वर्षीय श्यौदान पुत्र श्यामलाल के चाचा तेजराम ने बताते हैं, ‘ श्यौदान के इलाज के लिए 50 हजार रुपये कर्जा लिया है। इलाज के लिए परिवार पर 40 हजार का कर्जा हो गया है। उसकी की हालत अब भी गंभीर है। हादसे में अपनी 16 वर्षीय पुत्री मधु की मौत से श्यौदान सदमे में है।’

तेजराम या उनके परिवार का कोई भी सदस्य इस समय मजदूरी नहीं कर पा रहा है। नतीजतन गृहस्थी चलनी भी मुश्किल हो गई है। यह पूछने पर कि कर्ज कैसे चुकाएंगे, तेजराम आसमान की ओर देखते हैं। बोलते हैं, ‘मवेशी बेच देंगे।’

घायल कपिल के पिता राजपाल सिंह ने बताया कि कपिल की हालत अब भी नाजुक है। वह बोल नहीं पा रहा है। राजपाल पर भी इलाज में हजारों रुपये कर्ज हो चुके हैं। कहते हैं कि ‘अगर सरकारी मदद मिल जाएगी तो ही बेटे का ठीक से इलाज हो पाएगा। नहीं तो जैसी भगवान की मर्जी... हम गरीब लोग हैं। हमें तो सरकार का ही आसरा है...।’

 
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