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21 साल से बरामदे में पढ़ाई कर रहे सैकड़ों बच्चे

Wed, 11 May 2016 08:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिकारपुर
अमर उजाला ब्यूरो, शिकारपुर Updated Wed, 11 May 2016 08:50 PM IST
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एक ओर शासन प्रशासन बच्चों की शिक्षा के लिए तमाम योजनाएं चला रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सैकड़ों स्कूली बच्चों को छत तक मयस्सर नहीं है। हम बात कर रहे हैं प्राथमिक विद्यालय नंबर-1 की। अपनी स्थापना के 130 साल बीत जाने के बाद भी इस स्कूल को अपनी छत नहीं मिल सकी।

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नतीजतन, कभी मंदिर परिसर तो कभी खुले आसमान के नीचे स्कूल चलता रहा। बीते 21 साल से ब्राह्मण धर्मशाला के बरामदे में इस स्कूल के बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। अंग्रेजी हुकूमत के दौरान वर्ष 1885 में चौधरी शिकारपुर की प्रेरणा से नगर व आसपास क्षेत्र के छात्रों की पढ़ाई के लिए नगर के बीचोबीच स्थित श्रीनर्वदेश्वर मंदिर में प्राथमिक स्कूल की शुरूआत की गई।
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आगे चलकर इसे प्राथमिक स्कूल नं-1 के रूप में जाना गया। आजादी के बाद शिकारपुर में प्राथमिक स्कूल नं.2, डीसी स्कूल व इस्लामिया स्कूल की स्थापना भी हुई। शिकारपुर को टाउन एरिया और नगर पालिका परिषद का भी दर्जा मिला लेकिन श्रीनर्वदेश्वर मंदिर में चल रहे प्राथमिक स्कूल को भवन निर्माण के लिए जमीन नहीं मिल पाई।
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समय बीतने के साथ मंदिर की इमारत जर्जर होने पर बच्चे खुले में बैठकर पढ़ने लगे। वर्ष 1995 मेंजब मंदिर परिसर में ब्राह्मण धर्मशाला का निर्माण कराया गया तो स्कूली बच्चों के सड़क पर बैठने की नौबत आ गई। धर्मशाला के संचालकों ने दया दिखाते हुए बच्चों को स्कूल के बरामदे में पढ़ाने की अनुमति दे दी।

तभी से स्कूली बच्चे इसी बरामदे में बैठकर पढ़ रहे हैं। विद्यालय की प्रधानाध्यापक विमला गोस्वामी ने बताया कि स्कूल में इस सत्र में 125 बच्चों का पंजीकरण हुआ है। धर्मशाला में होने वाले किसी समारोह के दौरान इन बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है।

कई बार तो स्कूल की छुट्टी भी करनी पड़ती है। विद्यालय के पूर्व प्रधानाध्यापक महेंद्र कुमार त्यागी ने बताया कि स्कूल भवन बनाने के लिए कई बार शासन से धनराशि स्वीकृत हुई लेकिन जमीन न मिलने के कारण धनराशि लौटा दी गई।

जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का शिकार है विद्यालय
विद्यालय जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का शिकार रहा है। इसी उपेक्षा के चलते आज तक स्कूल को भवन के लिए जमीन नहीं मिल पाई। एक जुलाई 1992 को तत्कालीन विधायक की सिफारिश पर स्कूल को ग्राम पंचायत खैलिया कल्यानपुर के माजरा नगला अशर्फाबाद में स्थानांतरित कर दिया गया था।

स्कूल में तैनात अध्यापकों की पैरवी पर सात अगस्त 1992 में विद्यालय पुन: धर्मशाला में आ गया। पूर्व प्रधानाध्यापक महेंद्र कुमार त्यागी ने बताया कि तैनाती के दौरान उन्होंने स्कूल को भूमि उपलब्ध कराने के लिए जनप्रतिनिधियों के यहां चक्कर लगाये थे लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि ने सरकारी भूमि उपलब्ध कराने का प्रयास नहीं किया।


मैंने हाल ही में पदभार संभाला है। शिकारपुर में चल रहे इस स्कूल से मैं वाकिफ नहीं हूं। मामला संज्ञान में आ गया है। इसकी जांच करवाई जाएगी। बच्चों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। इस समस्या से विभागीय अफसरों को भी अवगत करवाया जाएगा। - वेदराम, बीएसए

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