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खेती में कुछ बचता नहीं, महंगाई से कमर टूट रही

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 27 Jan 2022 10:09 PM IST
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हरतोली निवासी महिला इंदिरा देवी। - फोटो : BULANDSHAHR
खेती में कुछ बचता नहीं, महंगाई से कमर टूट रही
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बुलंदशहर। चुनावी सरगर्मियां बढ़ने के साथ ही मतदाता भी मुखर होने लगे हैं। उनका कहना है कि महंगाई कमर तोड़ रही है। जो इससे छुटकारा दिला सके, उसी की सरकार को चुनना है। अब प्रत्याशी के कहने या किसी भी दल के दबाव में आकर मतदान नहीं करेंगे। सरकार ऐसी बने जो किसानों को फसलों का लागत मूल्य बढ़ाकर दिला सके। महंगे उर्वरक व डीजल से राहत दे सके। मजदूरों का पारिश्रमिक बढ़वा सके।
एदलपुर धीमरी गांव के जंगल से लड़की लेकर जा रहीं कृष्णा देवी ने बताती हैं कि प्रत्याशी गांव में चुनाव के दौरान आते हैं। बड़े-बड़े वादे और सपने दिखाकर जाते हैं, लेकिन करता कोई कुछ भी नहीं है। चुनाव जीतने के बाद इन लोगों के पास जाते हैं तो समस्या समाधान कराना तो दूर सुनते तक नहीं है। ये लोग गरीब-मजदूर का दर्द नहीं समझेंगे। इस बार का वोट गरीबी दूर और मजदूरों को काम देने वाले व्यक्ति को देंगे।
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सत्ता में आने के बाद किसान का दर्द नहीं समझते नेता
गांव नैथला में गन्ना काट रहे किसान महेंद्र शर्मा ने दर्द बयां करते हुए कहा कि किसी भी दल को वोट देने का कोई फायदा नहीं है। सरकार में आने से पहले नेता किसानों के लिए बड़े वादे करते हैं। बाद में सबसे ज्यादा किसान छला जाता है। गन्ने में लागत अधिक होती है, लेकिन उसका मूल्य पूरा नहीं मिल पाता है। गन्ने का मूल्य 450 रुपये से अधिक मिले तो किसानों का लाभ होगा। हम लोग इस बार फसलों का लागत और समर्थन मूल्य बढ़ाने वाली सरकार को चुनेंगे।
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बच्चों की शिक्षा हो सस्ती
शहर से दूध बेचकर जा रहे युवक गौरव सिंह ने बताया कि महंगाई बढ़ती जा रही है। गरीब और मध्यम परिवार के लोगों को बच्चे पढ़ाना मुश्किल हो रहा है। सरकार को अंग्रेजी माध्यम के स्कूल खोलने चाहिए, जिससे गरीब परिवार भी अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दे सके। इससे निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर भी रोक लग सकेगी। इस मुद्दे पर काम करने वाले दल को मतदान करेंगे।
मजदूरों को काम देने वाली चुनेंगे सरकार
गांव मंशागढ़ी नगलिया के खेतों में बकरी चरा रही रेखा का कहना है कि उनके पति मजदूरी करने के लिए जाते हैं। वह बकरी चराकर घर में दूध की व्यवस्था करती हैं। उन्होंने चुनाव के मुद्दे पर बात करते हुए कहा कि पहले वोट सम्मान से बात करने वाले प्रत्याशी को देते थे, लेकिन इस बार ऐसा नहीं करेंगे। परिवार के लोगों ने सलाह की है कि जो भी प्रत्याशी गांव में वोट मांगने आएगा, वह हमारी मजदूरी बढ़ाने और काम दिलाने का आश्वासन देगा तभी उसे वोट करेंगे।
जो किसानों की उठाएगा आवाज, उसे करेंगे मतदान
गंगेरुआ निवासी श्यामलाल खेत से बुग्गी में चारा लेकर आ रहे थे। उन्होंने साफ कहा कि किसानों के साथ छल होता है। जो प्रत्याशी वोट मांगने आएगा, उसका विरोध करेंगे और उससे पुराने वादों के बारे में पूछेंगे। अब तो हम उसी के पक्ष में मतदान करेंगे जो विधानसभा में किसान की आवाज को उठाएगा। कई सरकार देख चुके हैं, उनके वादे भी। हमेशा किसान ही छला जाता है।

गरीबों का परिवार चलाने के लिए दिलाए पेंशन
हरतौली गांव निवासी वृद्धा इंदिरा देवी चोला मार्ग पर मूंगफली भून रही थीं, उनसे चुनाव के बारे में पूछा गया तो वह गुस्सा होने लगीं। बोलीं कोई सरकार हमें खाने को देबे है क्या? हमें तो मजदूरी करके ही घर चलानो है। टूटा हुआ घर है, उसमें बरसात होने पर पानी टपकता है। गरीबों को परिवार चलाने के लिए पेंशन की व्यवस्था होनी चाहिए। जो यह करेगा उसी को वोट करेंगे।
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