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अब शादी के लिए नहीं छूटेगी बेटियों की पढ़ाई
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गौरी शंकर कालेज में संवाद में चर्चा करती छात्राएं।
- फोटो : BULANDSHAHR
अब शादी के लिए नहीं छूटेगी बेटियों की पढ़ाई
बुलंदशहर। लड़कियों की शादी की कानूनी उम्र 21 वर्ष होने से खुशी है। परिजन 18 वर्ष की आयु होते ही शादी कर देते थे, जिससे उनकी पढ़ाई बीच में ही छूट जाती थी। इस फैसले के बाद लड़कियां पढ़ लिखकर आत्मनिर्भर बन सकेंगी। इसके बाद किसी का दबाव भी नहीं रहेगा। यह कहना है गौरी शंकर कन्या महाविद्यालय की छात्राओं का। शुक्रवार को संवाद कार्यक्रम में उन्होंने दहेज पर रोक लगाने के लिए कठोर कानून बनाने की भी मांग उठाई।
18 वर्ष तक की उम्र में अधिकतर लड़कियां 12वीं कक्षा तक ही पढ़ाई कर पाती थीं और उसके बाद अभिभावक शादी कर देते थे। लेकिन अब शादी की उम्र बढ़ने से हमें उच्च शिक्षा तक पढ़ने का मौका मिलेगा। इसके साथ अपने पैरों पर खड़े होने के लिए समय मिलेगा, ताकि किसी दूसरे पर निर्भर न रह सकें। यदि हम शादी से पहले अपने पैरों पर खड़ी हो जाएंगी तो आगे चलकर किसी के भरोसे नहीं रहेंगी। ऐसा नहीं है कि आज लड़कियां किसी भी क्षेत्र में लड़कों से पीछे हैं। बावजूद इसके हमारी नौकरी लग जाए तो दूसरी लड़कियों की तरह हम भी अपने परिवार का नाम रोशन कर सकेंगी। चर्चा में छात्राओं ने सरकार से एक खास मांग रखी, जिसके तहत उन्हाेंने दहेज पर रोक लगाने के लिए कड़ा कदम उठाने और कठोर कानून व नियम बनाने की बात कहीं। उनका कहना है कि यदि ऐसा होता है तो उन अभिभावकों की परेशानी दूर हो जाएगी, जो दहेज देने में समक्ष नहीं हैं।
बोली छात्राएं
सरकार के इस निर्णय का पता चला तो खुशी से झूम उठीं। अब शादी की उम्र बढ़ने से मुझे और पढ़ने का मौका मिलेगा तो अपने पैरों पर खड़ी हो सकूंगी। मेरा कुछ अलग कर अभिभावकों का नाम रोशन करने का भी मौका मिलेगा। - सिंदू।
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सरकार के इस निर्णय का उन सभी लड़कियों को लाभ मिलेगा, जो किसी कारण आगे की पढ़ाई नहीं कर पाती थी। साथ ही शादी होने के बाद उनका सपना अधूरा रह जाता था। तीन साल के समय में कुछ भी हासिल किया जा सकता है। - प्रेरणा।
शादी की उम्र 21 साल करने पर एक तो महिलाआें को अब पुरुषों की बराबरी करने का एक और अच्छा कदम बढ़ाया है। कम उम्र में शादी और उसके बाद सिर पर जल्द आने वाली जिम्मेदारी से भी कुछ समय के लिए निजात मिलेगी। साथ ही सभी तरह की परेशानियों से निजात पाने की सीख मिलेगी। - कीर्ति शर्मा।
सरकार का यह कदम सराहनीय है। इसी तरह सरकार को एक और ऐसी ही पहल दहेज पर रोक लगाने के लिए करनी चाहिए। यदि दहेज पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए कठोर कानून और नियम बना दिए जाएं तो दहेज देने में असमर्थ अभिभावकों को राहत मिलेगी। - आरती शर्मा।
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बुलंदशहर। लड़कियों की शादी की कानूनी उम्र 21 वर्ष होने से खुशी है। परिजन 18 वर्ष की आयु होते ही शादी कर देते थे, जिससे उनकी पढ़ाई बीच में ही छूट जाती थी। इस फैसले के बाद लड़कियां पढ़ लिखकर आत्मनिर्भर बन सकेंगी। इसके बाद किसी का दबाव भी नहीं रहेगा। यह कहना है गौरी शंकर कन्या महाविद्यालय की छात्राओं का। शुक्रवार को संवाद कार्यक्रम में उन्होंने दहेज पर रोक लगाने के लिए कठोर कानून बनाने की भी मांग उठाई।
18 वर्ष तक की उम्र में अधिकतर लड़कियां 12वीं कक्षा तक ही पढ़ाई कर पाती थीं और उसके बाद अभिभावक शादी कर देते थे। लेकिन अब शादी की उम्र बढ़ने से हमें उच्च शिक्षा तक पढ़ने का मौका मिलेगा। इसके साथ अपने पैरों पर खड़े होने के लिए समय मिलेगा, ताकि किसी दूसरे पर निर्भर न रह सकें। यदि हम शादी से पहले अपने पैरों पर खड़ी हो जाएंगी तो आगे चलकर किसी के भरोसे नहीं रहेंगी। ऐसा नहीं है कि आज लड़कियां किसी भी क्षेत्र में लड़कों से पीछे हैं। बावजूद इसके हमारी नौकरी लग जाए तो दूसरी लड़कियों की तरह हम भी अपने परिवार का नाम रोशन कर सकेंगी। चर्चा में छात्राओं ने सरकार से एक खास मांग रखी, जिसके तहत उन्हाेंने दहेज पर रोक लगाने के लिए कड़ा कदम उठाने और कठोर कानून व नियम बनाने की बात कहीं। उनका कहना है कि यदि ऐसा होता है तो उन अभिभावकों की परेशानी दूर हो जाएगी, जो दहेज देने में समक्ष नहीं हैं।
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बोली छात्राएं
सरकार के इस निर्णय का पता चला तो खुशी से झूम उठीं। अब शादी की उम्र बढ़ने से मुझे और पढ़ने का मौका मिलेगा तो अपने पैरों पर खड़ी हो सकूंगी। मेरा कुछ अलग कर अभिभावकों का नाम रोशन करने का भी मौका मिलेगा। - सिंदू।
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सरकार के इस निर्णय का उन सभी लड़कियों को लाभ मिलेगा, जो किसी कारण आगे की पढ़ाई नहीं कर पाती थी। साथ ही शादी होने के बाद उनका सपना अधूरा रह जाता था। तीन साल के समय में कुछ भी हासिल किया जा सकता है। - प्रेरणा।
शादी की उम्र 21 साल करने पर एक तो महिलाआें को अब पुरुषों की बराबरी करने का एक और अच्छा कदम बढ़ाया है। कम उम्र में शादी और उसके बाद सिर पर जल्द आने वाली जिम्मेदारी से भी कुछ समय के लिए निजात मिलेगी। साथ ही सभी तरह की परेशानियों से निजात पाने की सीख मिलेगी। - कीर्ति शर्मा।
सरकार का यह कदम सराहनीय है। इसी तरह सरकार को एक और ऐसी ही पहल दहेज पर रोक लगाने के लिए करनी चाहिए। यदि दहेज पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए कठोर कानून और नियम बना दिए जाएं तो दहेज देने में असमर्थ अभिभावकों को राहत मिलेगी। - आरती शर्मा।