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Bulandshahar News: कॉलोनाइजर सुधीर समेत पांचों गैंगस्टर को भेजा गया जेल
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पुलिस गिरफ्त में आरोपी।
- फोटो : संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
बुलंदशहर। गैंगस्टर एक्ट में वांछित चल रहे काॅलोनाइजर सुधीर गोयल, उसकी पत्नी रेखा गोयल और जालसाजी के लिए बनाए गए उसके गिरोह के तीन सदस्यों को पुलिस ने शनिवार को कोर्ट के सामने पेश किया। पांचों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस ने बताया कि रेखा को छोड़ अन्य चारों आरोपियों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। ये लोग किसानों से सस्ते में जमीन लेकर बेच देते थे। जमीन के खरीदारों से रकम लेकर हड़प लेते थे।
एएसपी अनुकृति शर्मा ने बताया कि सुधीर कुमार गोयल, राखी गोयल निवासी राधिका एंकलेव कोतवाली देहात, आलोक कुमार जग्गा निवासी गांव वलीपुरा, जय सिंह निवासी गांव खदाना और जयप्रकाश निवासी गांव खालौर पीलीभीत से पकड़ा गया। उनके पास से एक फॉर्च्यूनर गाड़ी, 3.74 लाख रुपये की नकदी, 13 मोबाइल फोन, तीन चार्जर, कपड़ों से भरे हुए 17 बैग बरामद किए हैं। ये लोग पीलीभीत से मौका मिलते ही नेपाल भागने की फिराक में थे।
किसान की आत्महत्या के बाद आया निशाने पर - सुधीर गोयल की करतूत सामने आने पर भी पुलिस उस पर कार्रवाई से बच रही थी, लेकिन हापुड़ में उसकी जालसाजी के शिकार किसान ने आत्महत्या कर ली तो पुलिस को रुख बदलना पड़ा। उस पर गैंगस्टर एक्ट लगाया गया। इसके बाद उसकी तलाश शुरू हुई। वह गिरोह सहित नेपाल भाग गया। इस पर पुलिस ने उसकी नेपाल में घेराबंदी की तो गिरोह सहित पीलीभीत आ गया। वहां से फिर से नेपाल जाने की फिराक में था, लेकिन इससे पहले ही पकड़ लिया गया। वह कुछ दिन लखीमपुर खीरी में भी रहा। सीओ सिटी अनुकृति शर्मा ने बताया कि आरोपी के नेपाल में पांच से छह दिन रहने की जानकारी मिली है। एक दिन वह पीलीभीत में भी रहा था। सुधीर के खिलाफ 14 केस दर्ज हैं। उसने करोड़ों की घोखाधड़ी और जालसाजी की है। पुलिस को शक है कि वह सफेदपोशों का काला धन सफेद करता था। उसके खिलाफ मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत कार्रवाई हो सकती है। सुधीर गोयल अपने साथ आठ से दस बाउंसर रखता था। जिसमें चार से छह असलहाधारी भी होते थे। उसे कई संगठनों ने पद दे रखे थे।
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एक महीने में इस्तेमाल किए 13 मोबाइल और 100 सिम
पुलिस ने सुधीर गोयल से 13 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। पुलिस का कहना है कि उसने पिछले एक महीने में इन मोबाइल में बदल बदलकर 100 सिमकार्ड इस्तेमाल किए। कई सिम फर्जी दस्तावेज पर खरीदे गए हैं। इसकी जांच अलग से की जा रही है। पुलिस से बचने के लिए वह तरह तरह के हथकंडे अपना रहा था।
एक सिम को एक या दो कॉल के लिए ही इस्तेमाल किया गया। इसके बाद सिम को तोड़ कर फेंक दिया जाता था। अधिकतर बात व्हाट्सएप के द्वारा ही करता था। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी सुधीर अपने पास एक बैग में जमीन उसे बेचने वाले किसानों की हस्ताक्षर की हुई चेकबुक और पासबुक अपने साथ एक बैग में रखता था। बताया जा रहा है कि करीब 100 से अधिक चेकबुक और पासबुक उसके पास रहती थीं।
बुलंदशहर पुलिस की चार टीमें लगी हुई थीं। जिनमें कोतवाली देहात, कोतवाली नगर, एसओजी और सर्विलांस की टीम थी। इसके अलावा आरोपी की लोकेशन नेपाल आने के बाद बुलंदशहर पुलिस ने नेपाल बॉर्डर से जुड़ पीलीभीत समेत विभिन्न छह थानों की मदद ली। इन छह थानों के विभिन्न पुलिसकर्मी आरोपियों के नेपाल से भारत में एंट्री होने के बाद से गिरफ्तारी होने तक नजर रखे हुए थे।
दर्ज कराता था झूठे मुकदमे
सुधीर गोयल ने कई लोगों पर झूठे केस दर्ज कराए। एएसपी ने बताया कि कई ऐसे मामले सामने आए हैं। जब कोई उसकी शिकायत करने की बात करता तो वह बाहरी महिलाओं को रुपये देकर ऐसे लोगों के खिलाफ झूठी तहरीर दिला देता था।
राधिका एंक्लेव में 50 प्रतिशत फर्जी बैनामे
आरोपी सुधीर की राधिका एंक्लेव कालोनी में ही 50 प्रतिशत से अधिक बैनामे फर्जी बताए जा रहे हैं। शनिवार को भी एक सरकारी विभाग में तैनात महिला देहात कोतवाली पहुंची थी। जिसने बताया कि सुधीर ने उसके करीब दो करोड़ रुपये का हड़पे हैं। इसके अलावा आरोपी ने नीलकंठ कालोनी की विवादित जमीन पर भी 40 से अधिक फर्जी बैनामे कर दिए थे।आरोपियों ने किसानों से कृषि भूमि क्रय कर 10 से अधिक अवैध कालोनी काटी गई है। कोई भी कॉलोनी बीडीए व अन्य संबंधित विभाग से अनुमोदित या पंजीकृत नहीं है। कालोनियों के नाम भी आरोपी सुधीर गोयल ने देवी देवताओं के नाम पर रखे हुए थे।
ऐसे करते थे धोखाधड़ी
किसान से जमीन का सौदा कर कुछ रकम दे दी जाती थी। इसके बाद जमीन पर प्लाॅट काटकर उसे बेचने के लिए ग्राहक ढूंढते थे।ग्राहक मिलने पर प्लाॅट की रजिस्ट्री किसान के नाम की जाती। रकम किसान के खाते में जाती, लेकिन खाते का नियंत्रण सुधीर गोयल और उसके साथियों के पास था। किसान के खाते से काॅलोनाइजर और उसके गिरोह के सदस्य रकम निकाल लेते थे। जमीन के खरीदार को कब्जा नहीं मिलता तो वह उनके पास ही जाता। खरीदार को प्लाॅट के बदले दूसरा प्लाॅट देने की बात करते। पहले प्लाॅट का बैनामा उससे अपने नाम करा लेते। इसके बाद दूसरा प्लाॅट नहीं देते। पहले प्लाॅट की रकम हड़प लेते।
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बुलंदशहर। गैंगस्टर एक्ट में वांछित चल रहे काॅलोनाइजर सुधीर गोयल, उसकी पत्नी रेखा गोयल और जालसाजी के लिए बनाए गए उसके गिरोह के तीन सदस्यों को पुलिस ने शनिवार को कोर्ट के सामने पेश किया। पांचों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस ने बताया कि रेखा को छोड़ अन्य चारों आरोपियों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। ये लोग किसानों से सस्ते में जमीन लेकर बेच देते थे। जमीन के खरीदारों से रकम लेकर हड़प लेते थे।
एएसपी अनुकृति शर्मा ने बताया कि सुधीर कुमार गोयल, राखी गोयल निवासी राधिका एंकलेव कोतवाली देहात, आलोक कुमार जग्गा निवासी गांव वलीपुरा, जय सिंह निवासी गांव खदाना और जयप्रकाश निवासी गांव खालौर पीलीभीत से पकड़ा गया। उनके पास से एक फॉर्च्यूनर गाड़ी, 3.74 लाख रुपये की नकदी, 13 मोबाइल फोन, तीन चार्जर, कपड़ों से भरे हुए 17 बैग बरामद किए हैं। ये लोग पीलीभीत से मौका मिलते ही नेपाल भागने की फिराक में थे।
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किसान की आत्महत्या के बाद आया निशाने पर - सुधीर गोयल की करतूत सामने आने पर भी पुलिस उस पर कार्रवाई से बच रही थी, लेकिन हापुड़ में उसकी जालसाजी के शिकार किसान ने आत्महत्या कर ली तो पुलिस को रुख बदलना पड़ा। उस पर गैंगस्टर एक्ट लगाया गया। इसके बाद उसकी तलाश शुरू हुई। वह गिरोह सहित नेपाल भाग गया। इस पर पुलिस ने उसकी नेपाल में घेराबंदी की तो गिरोह सहित पीलीभीत आ गया। वहां से फिर से नेपाल जाने की फिराक में था, लेकिन इससे पहले ही पकड़ लिया गया। वह कुछ दिन लखीमपुर खीरी में भी रहा। सीओ सिटी अनुकृति शर्मा ने बताया कि आरोपी के नेपाल में पांच से छह दिन रहने की जानकारी मिली है। एक दिन वह पीलीभीत में भी रहा था। सुधीर के खिलाफ 14 केस दर्ज हैं। उसने करोड़ों की घोखाधड़ी और जालसाजी की है। पुलिस को शक है कि वह सफेदपोशों का काला धन सफेद करता था। उसके खिलाफ मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत कार्रवाई हो सकती है। सुधीर गोयल अपने साथ आठ से दस बाउंसर रखता था। जिसमें चार से छह असलहाधारी भी होते थे। उसे कई संगठनों ने पद दे रखे थे।
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एक महीने में इस्तेमाल किए 13 मोबाइल और 100 सिम
पुलिस ने सुधीर गोयल से 13 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। पुलिस का कहना है कि उसने पिछले एक महीने में इन मोबाइल में बदल बदलकर 100 सिमकार्ड इस्तेमाल किए। कई सिम फर्जी दस्तावेज पर खरीदे गए हैं। इसकी जांच अलग से की जा रही है। पुलिस से बचने के लिए वह तरह तरह के हथकंडे अपना रहा था।
एक सिम को एक या दो कॉल के लिए ही इस्तेमाल किया गया। इसके बाद सिम को तोड़ कर फेंक दिया जाता था। अधिकतर बात व्हाट्सएप के द्वारा ही करता था। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी सुधीर अपने पास एक बैग में जमीन उसे बेचने वाले किसानों की हस्ताक्षर की हुई चेकबुक और पासबुक अपने साथ एक बैग में रखता था। बताया जा रहा है कि करीब 100 से अधिक चेकबुक और पासबुक उसके पास रहती थीं।
बुलंदशहर पुलिस की चार टीमें लगी हुई थीं। जिनमें कोतवाली देहात, कोतवाली नगर, एसओजी और सर्विलांस की टीम थी। इसके अलावा आरोपी की लोकेशन नेपाल आने के बाद बुलंदशहर पुलिस ने नेपाल बॉर्डर से जुड़ पीलीभीत समेत विभिन्न छह थानों की मदद ली। इन छह थानों के विभिन्न पुलिसकर्मी आरोपियों के नेपाल से भारत में एंट्री होने के बाद से गिरफ्तारी होने तक नजर रखे हुए थे।
दर्ज कराता था झूठे मुकदमे
सुधीर गोयल ने कई लोगों पर झूठे केस दर्ज कराए। एएसपी ने बताया कि कई ऐसे मामले सामने आए हैं। जब कोई उसकी शिकायत करने की बात करता तो वह बाहरी महिलाओं को रुपये देकर ऐसे लोगों के खिलाफ झूठी तहरीर दिला देता था।
राधिका एंक्लेव में 50 प्रतिशत फर्जी बैनामे
आरोपी सुधीर की राधिका एंक्लेव कालोनी में ही 50 प्रतिशत से अधिक बैनामे फर्जी बताए जा रहे हैं। शनिवार को भी एक सरकारी विभाग में तैनात महिला देहात कोतवाली पहुंची थी। जिसने बताया कि सुधीर ने उसके करीब दो करोड़ रुपये का हड़पे हैं। इसके अलावा आरोपी ने नीलकंठ कालोनी की विवादित जमीन पर भी 40 से अधिक फर्जी बैनामे कर दिए थे।आरोपियों ने किसानों से कृषि भूमि क्रय कर 10 से अधिक अवैध कालोनी काटी गई है। कोई भी कॉलोनी बीडीए व अन्य संबंधित विभाग से अनुमोदित या पंजीकृत नहीं है। कालोनियों के नाम भी आरोपी सुधीर गोयल ने देवी देवताओं के नाम पर रखे हुए थे।
ऐसे करते थे धोखाधड़ी
किसान से जमीन का सौदा कर कुछ रकम दे दी जाती थी। इसके बाद जमीन पर प्लाॅट काटकर उसे बेचने के लिए ग्राहक ढूंढते थे।ग्राहक मिलने पर प्लाॅट की रजिस्ट्री किसान के नाम की जाती। रकम किसान के खाते में जाती, लेकिन खाते का नियंत्रण सुधीर गोयल और उसके साथियों के पास था। किसान के खाते से काॅलोनाइजर और उसके गिरोह के सदस्य रकम निकाल लेते थे। जमीन के खरीदार को कब्जा नहीं मिलता तो वह उनके पास ही जाता। खरीदार को प्लाॅट के बदले दूसरा प्लाॅट देने की बात करते। पहले प्लाॅट का बैनामा उससे अपने नाम करा लेते। इसके बाद दूसरा प्लाॅट नहीं देते। पहले प्लाॅट की रकम हड़प लेते।