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Bulandshahar News: स्वीकृति के आठ साल बाद भी ककोड़ को नहीं बनाया ब्लॉक
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ककोड़। कस्बे को ब्लॉक बनाने की स्वीकृति मिले आठ साल बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक इस योजना को परवान नहीं चढ़ाया जा सका है। इसके चलते अभी भी कस्बे के 45 गांवों के लोगों को सिकंदराबाद ब्लॉक के ही चक्कर काटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
सिकंदराबाद ब्लॉक से जुड़े ककोड़ और झाझर क्षेत्र के 45 गांवों को अलग करते हुए ककोड़ कस्बे को ब्लॉक बनाकर उसमें जोड़ने के लिए वर्ष 2013-14 में पहल शुरू की गई थी। इसके लिए तत्कालीन विधायक बिमला सिंह सोलंकी ने शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा था। विधायक के प्रस्ताव पर वर्ष 2016 में शासन ने ब्लॉक बनाने की स्वीकृति जारी कर दी थी। स्वीकृति मिलने के बाद नगर पंचायत क्षेत्र में ब्लॉक कार्यालय बनाने के लिए भी जमीन की तलाश करते हुए चिह्नित करने की कार्रवाई की गई थी। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव से पहले शासन ने स्वीकृति के साथ अन्य सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली, लेकिन विधानसभा चुनाव होने के बाद सत्ता परिवर्तन हुआ और कस्बे को ब्लॉक बनाने के लिए तैयार की गई प्रक्रिया को फाइलों में ही कैद कर दिया गया। ककोड़ कस्बे को जिले का 17वां ब्लॉक बनाने के इंतजार में कस्बे के 45 गांवों के करीब डेढ़ लाख लोगों की आंखें पथरा गई हैं, लेकिन अब न तो ब्ल़ॉक बनाने के लिए कोई जनप्रतिनिधि और न ही कोई अधिकारी पहल कर रहा है।
बने ब्लॉक तो आसानी से होगा विकास
ककोड़ को ब्लॉक न बनाए जाने पर वर्तमान में सिकंदराबाद ब्लॉक से ही विकास कार्य कराए जा रहे हैं। सिकंदराबाद ब्लॉक के अधीन गांवों की संख्या अधिक होने के चलते विकास कार्यों में देरी होती है। यदि ककोड़ को ब्लॉक बनाया जाता है तो ऐसे में क्षेत्र के गांवों के लोग ककोड़ में ही ब्लॉक पर अपनी समस्याओं और सड़कों व नालों का निर्माण कराने के लिए पहल कर सकेंगे।
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बोले लोग-- -
ककोड़ को ब्लॉक बनाने की कवायद शुरू हुई थी। परंतु ब्लॉक नहीं बन पाया। ब्लॉक बनने से क्षेत्र का चहुंमुखी विकास होगा और लोगों को भी अपने कामों के लिए सिकंदराबाद जाना नहीं पड़ेगा।-- देबू शर्मा
ककोड़ को ब्लॉक बनाए जाने पर लोगों को क्षेत्र के विकास, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र समेत अन्य कार्यों के लिए सिकंदराबाद नहीं जाना पड़ेगा। बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन सिकंदराबाद ब्लॉक जाकर अपना कार्य कराते हैं।-- मनोज
ककोड़ को ब्लॉक बनाने से क्षेत्र की समस्याओं के निस्तारण के साथ गांवों में नाली, सड़क व अन्य निर्माण कार्य आसानी से कराए जा सकेंगे। इससे क्षेत्र के लोगों की परेशानी भी दूर होगी।-- ऋषभ भारद्वाज
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सिकंदराबाद ब्लॉक से जुड़े ककोड़ और झाझर क्षेत्र के 45 गांवों को अलग करते हुए ककोड़ कस्बे को ब्लॉक बनाकर उसमें जोड़ने के लिए वर्ष 2013-14 में पहल शुरू की गई थी। इसके लिए तत्कालीन विधायक बिमला सिंह सोलंकी ने शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा था। विधायक के प्रस्ताव पर वर्ष 2016 में शासन ने ब्लॉक बनाने की स्वीकृति जारी कर दी थी। स्वीकृति मिलने के बाद नगर पंचायत क्षेत्र में ब्लॉक कार्यालय बनाने के लिए भी जमीन की तलाश करते हुए चिह्नित करने की कार्रवाई की गई थी। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव से पहले शासन ने स्वीकृति के साथ अन्य सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली, लेकिन विधानसभा चुनाव होने के बाद सत्ता परिवर्तन हुआ और कस्बे को ब्लॉक बनाने के लिए तैयार की गई प्रक्रिया को फाइलों में ही कैद कर दिया गया। ककोड़ कस्बे को जिले का 17वां ब्लॉक बनाने के इंतजार में कस्बे के 45 गांवों के करीब डेढ़ लाख लोगों की आंखें पथरा गई हैं, लेकिन अब न तो ब्ल़ॉक बनाने के लिए कोई जनप्रतिनिधि और न ही कोई अधिकारी पहल कर रहा है।
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बने ब्लॉक तो आसानी से होगा विकास
ककोड़ को ब्लॉक न बनाए जाने पर वर्तमान में सिकंदराबाद ब्लॉक से ही विकास कार्य कराए जा रहे हैं। सिकंदराबाद ब्लॉक के अधीन गांवों की संख्या अधिक होने के चलते विकास कार्यों में देरी होती है। यदि ककोड़ को ब्लॉक बनाया जाता है तो ऐसे में क्षेत्र के गांवों के लोग ककोड़ में ही ब्लॉक पर अपनी समस्याओं और सड़कों व नालों का निर्माण कराने के लिए पहल कर सकेंगे।
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बोले लोग
ककोड़ को ब्लॉक बनाने की कवायद शुरू हुई थी। परंतु ब्लॉक नहीं बन पाया। ब्लॉक बनने से क्षेत्र का चहुंमुखी विकास होगा और लोगों को भी अपने कामों के लिए सिकंदराबाद जाना नहीं पड़ेगा।
ककोड़ को ब्लॉक बनाए जाने पर लोगों को क्षेत्र के विकास, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र समेत अन्य कार्यों के लिए सिकंदराबाद नहीं जाना पड़ेगा। बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन सिकंदराबाद ब्लॉक जाकर अपना कार्य कराते हैं।
ककोड़ को ब्लॉक बनाने से क्षेत्र की समस्याओं के निस्तारण के साथ गांवों में नाली, सड़क व अन्य निर्माण कार्य आसानी से कराए जा सकेंगे। इससे क्षेत्र के लोगों की परेशानी भी दूर होगी।