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दावेदारों की पांच साल में बदल गई पार्टी के प्रति आस्था

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 09 Jan 2022 10:06 PM IST
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दावेदारों की पांच साल में बदल गई पार्टी के प्रति आस्था
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बुलंदशहर। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद इस बार पार्टियों के नेताओं की सूची में बड़े बदलाव हुए हैं। भाजपा में जहां नेताओं के जुड़ने का दौर रहा तो वहीं बसपा के नेताओं ने सबसे अधिक पार्टी छोड़ी है। सपा और रालोद के गठबंधन में सबसे अधिक बसपा के नेताओं ने दिलचस्पी दिखाई। पूर्व के दलों में खुद के राजनीतिक वर्चस्व को खतरा देखते हुए नेताओं ने पाला बदला और दूसरों दलों में टिकट के लिए भागदौड़ शुरू कर दी। अब नेता पुराने दलों की बुराइयां जनता को गिना रहे हैं तो टिकट की आस में नए दलों की खासियत से जनता को अवगत करा रहे हैं। इन नेताओं को टिकट मिलेगा या नहीं, यह अभी तक साफ नहीं है। अभी तक नेता दावा कर रहे हैं कि टिकट न मिलने की स्थिति में भी वह पार्टी नहीं छोड़ेंगे।
बोले नेता -
सपा के टिकट से मैं विधायक भी बना था, कुछ गलतियों के कारण पार्टी छोड़ दी थी और रालोद में शामिल हो गया थे लेकिन अब पार्टी की ताकत के बारे में जानकारी हुई। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने गलती माफ करते हुए दोबारा पार्टी में शामिल किया है। पार्टी की विचारधारा के चलते अन्य किसी दल में नहीं गए। - मुकेश शर्मा, पूर्व विधायक शिकारपुर
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भाजपा ने किसानों के साथ छल किया, जिसके चलते पार्टी से मन भर गया था। रालोद मेरा घर है और मैंने घर वापसी की है। फिर से जयंत चौधरी के नेतृत्व में पार्टी को मजबूत करूंगा। टिकट मिले या न मिले, हम पार्टी के साथ हैं। - राजीव चौधरी, पूर्व जिलाध्यक्ष रालोद
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बसपा में रहकर भी किसानों और मजदूरों की राजनीति की थी। अब पार्टी शून्य हो चली थी, जिसके चलते पार्टी छोड़ी थी। रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष और हमारी विचारधारा मेल खा रही थी, जिसके चलते रालोद ज्वाइन की। टिकट न मिलने पर भी पार्टी प्रत्याशी को जी-जान से चुनाव लड़ाया जाएगा। - गजेंद्र सिंह, पूर्व विधायक अनूपशहर
हमारे 80 फीसदी समर्थकों ने बसपा छोड़कर रालोद ज्वाइन करने की सलाह दी थी। पिछले विधानसभा चुनाव के बाद बसपा की नेता राजनीति से दूर हो गई थी। सर्व समाज के आह्वान पर ही मैंने रालोद की सदस्यता ली। टिकट मिले या न मिले, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। - हाजी यूनुस, पूर्व ब्लॉक प्रमुख बुलंदशहर
सपा पार्टी नहीं बल्कि मेरा घर है, मैंने घर वापसी की है। बसपा और सपा दोनों से विधायक रहने के बाद पता चला कि सपा लोगों के हित में कार्य करती है। सपा की नीतियों को जनता तक पहुंचाया जाएगा और जनता के हित में कार्य किए जाएंगे। - श्रीभगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित, पूर्व विधायक डिबाई

मेरे पिता भी रालोद के नेता रहे थे, जिसके चलते मैंने केवल घर वापसी की है। रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष का विजन और विचार शानदार हैं। घर लौटने के बाद जनता के लिए कार्य करने का मौका मिलेगा। किसान और मजदूर की लड़ाई लड़ने के लिए रालोद के साथ हैं। - दिलनवाज खान, पूर्व विधायक स्याना
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