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57 डॉक्टर संक्रमित हुए पर मरीजों की सेवा नहीं छोड़ी
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सीएमओ डॉ.भवतोष शंखधर।
- फोटो : BULANDSHAHR
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57 डॉक्टर संक्रमित हुए पर मरीजों की सेवा नहीं छोड़ी
बुलंदशहर। जिस वक्त कोरोना मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या से डर का माहौल था और लोग अपनों के अंतिम संस्कार तक से कतरा रहे थे तब खुद की परवाह किए बिना डॉक्टर मशाल बनकर जले। फर्ज की खातिर महीनों तक घर नहीं गए। मरीजों का इलाज करते हुए 160 सरकारी डॉक्टरों में से 57 खुद संक्रमण की चपेट में आ गए। फोन पर अपने मरीजों के संपर्क में रहे। ठीक होकर लौटे तो फिर से मरीजों के इलाज में जुट गए। दो-दो महीने तक कोई छुट्टी नहीं ली।
डॉक्टरों को धरती के भगवान का दर्जा यूं ही नहीं दिया जाता। कोराना की पहली और दूसरी लहर के दौरान लॉकडाउन और कोरोना कर्फ्यू में जब जिले के लोग घरों से नहीं निकल रहे तब डॉक्टर आठ-आठ घंटे तक बिना कुछ खाए पिए पीपीई किट पहनकर वार्ड में मरीजों के उपचार में जुटे रहे। जिला अस्पताल में वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. परवेंद्र कुमार तो दो बार संक्रमित हुए। खुद कोविड अस्पताल में भर्ती हुए और वहीं वार्ड में दूसरों के उपचार में जुट गए। एसीएमओ डॉक्टर भूदेव ने सीएमओ के संक्रमित होने के बाद कोविड मरीजों के उपचार का पूरा जिम्मा संभाला तो खुद भी संक्रमित हो गए। कोविड अस्पताल में भर्ती हुए तो वहां से भी हर वक्त फोन पर प्रबंधन में जुटे रहे।
सर्विलांस टीम के सदस्य डॉक्टर गौरव सक्सेना तीन बार पॉजिटिव हो चुके हैं। तीन साल का बेटा अस्वस्थ हो गया तब भी डॉक्टर गौरव अवकाश लेकर घर नहीं गए। पत्नी ने बच्चे का इलाज नोएडा में कराया। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर राजीव प्रसाद दूसरी लहर में संक्रमित हुए।
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258 पद, तैनात हैं सिर्फ 160 डॉक्टर
जनपद के सरकारी चिकित्सालयों में 258 पदों पर 160 चिकित्सक तैनात हैं। डॉक्टरों के 160 पद खाली हैं। करीब 160 चिकित्सकों में सीएमओ समेत 13 ऐसे हैं जिनके पास प्रशासनिक दायित्व भी हैं। इनके अलावा संविदा पर भी 84 डॉक्टर कार्य कर रहे हैं।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की है जरूरत
जिले के सरकारी चिकित्सालयों में न्यूरो सर्जन, कार्डियोलॉजिस्ट, मनोचिकित्सक, सर्जन, रेडियोलॉजिस्ट, बाल रोग विशेषज्ञ समेत कई अन्य पद के लिए चिकित्सक के पद रिक्त चल रहे हैं।
छुट्टी मांगी न कोई छूट
डॉक्टरों ने कोरोना की पहली और दूसरी लहर के पीक में अवकाश तक नहीं मांगा। बहुतों ने तो आठ-आठ घंटे से अधिक भी ड्यूटी की। जिले में 57 चिकित्सक संक्रमित भी हुए। कई ऐसे भी हैं जो दो से अधिक बार भी संक्रमित हुए। - डॉ. भवतोष शंखधर, सीएमओ
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बुलंदशहर। जिस वक्त कोरोना मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या से डर का माहौल था और लोग अपनों के अंतिम संस्कार तक से कतरा रहे थे तब खुद की परवाह किए बिना डॉक्टर मशाल बनकर जले। फर्ज की खातिर महीनों तक घर नहीं गए। मरीजों का इलाज करते हुए 160 सरकारी डॉक्टरों में से 57 खुद संक्रमण की चपेट में आ गए। फोन पर अपने मरीजों के संपर्क में रहे। ठीक होकर लौटे तो फिर से मरीजों के इलाज में जुट गए। दो-दो महीने तक कोई छुट्टी नहीं ली।
डॉक्टरों को धरती के भगवान का दर्जा यूं ही नहीं दिया जाता। कोराना की पहली और दूसरी लहर के दौरान लॉकडाउन और कोरोना कर्फ्यू में जब जिले के लोग घरों से नहीं निकल रहे तब डॉक्टर आठ-आठ घंटे तक बिना कुछ खाए पिए पीपीई किट पहनकर वार्ड में मरीजों के उपचार में जुटे रहे। जिला अस्पताल में वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. परवेंद्र कुमार तो दो बार संक्रमित हुए। खुद कोविड अस्पताल में भर्ती हुए और वहीं वार्ड में दूसरों के उपचार में जुट गए। एसीएमओ डॉक्टर भूदेव ने सीएमओ के संक्रमित होने के बाद कोविड मरीजों के उपचार का पूरा जिम्मा संभाला तो खुद भी संक्रमित हो गए। कोविड अस्पताल में भर्ती हुए तो वहां से भी हर वक्त फोन पर प्रबंधन में जुटे रहे।
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सर्विलांस टीम के सदस्य डॉक्टर गौरव सक्सेना तीन बार पॉजिटिव हो चुके हैं। तीन साल का बेटा अस्वस्थ हो गया तब भी डॉक्टर गौरव अवकाश लेकर घर नहीं गए। पत्नी ने बच्चे का इलाज नोएडा में कराया। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर राजीव प्रसाद दूसरी लहर में संक्रमित हुए।
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258 पद, तैनात हैं सिर्फ 160 डॉक्टर
जनपद के सरकारी चिकित्सालयों में 258 पदों पर 160 चिकित्सक तैनात हैं। डॉक्टरों के 160 पद खाली हैं। करीब 160 चिकित्सकों में सीएमओ समेत 13 ऐसे हैं जिनके पास प्रशासनिक दायित्व भी हैं। इनके अलावा संविदा पर भी 84 डॉक्टर कार्य कर रहे हैं।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की है जरूरत
जिले के सरकारी चिकित्सालयों में न्यूरो सर्जन, कार्डियोलॉजिस्ट, मनोचिकित्सक, सर्जन, रेडियोलॉजिस्ट, बाल रोग विशेषज्ञ समेत कई अन्य पद के लिए चिकित्सक के पद रिक्त चल रहे हैं।
छुट्टी मांगी न कोई छूट
डॉक्टरों ने कोरोना की पहली और दूसरी लहर के पीक में अवकाश तक नहीं मांगा। बहुतों ने तो आठ-आठ घंटे से अधिक भी ड्यूटी की। जिले में 57 चिकित्सक संक्रमित भी हुए। कई ऐसे भी हैं जो दो से अधिक बार भी संक्रमित हुए। - डॉ. भवतोष शंखधर, सीएमओ